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Delhi फायर सर्विस में स्टाफ और कम्युनिकेशन की कमी, 853 पद खाली

Delhi दिल्ली: दिल्ली फायर सर्विस (DFS) गंभीर स्टाफ की कमी और कमजोर कम्युनिकेशन सिस्टम से जूझ रही है। हाल ही में मालवीय नगर में हुई दुखद आग की घटना के बाद यह समस्या और सामने आई है, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने राजधानी में फायर सर्विस की तैयारी और संसाधनों की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली फायर सर्विस में फायरफाइटर के कुल 3,312 मंज़ूर पद हैं, जिनमें से 853 पद खाली हैं। यह संख्या पूरे विभाग के लगभग एक-चौथाई पदों के खाली होने के बराबर है। खाली पदों की वजह से आपात स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रभावित होती है और आग जैसे हादसों में नुकसान बढ़ सकता है।
साथ ही, स्टेशन ऑफिस के 90 मंज़ूर पदों में भी कई खाली हैं। इन पदों की कमी से विभाग के प्रशासनिक कामकाज और आपातकालीन स्थिति में समन्वय प्रभावित होता है। DFS में कम्युनिकेशन सिस्टम की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। पुराने रेडियो और संवाद उपकरणों की वजह से फायर फाइटर्स को घटनास्थल पर सही समय पर जानकारी और निर्देश मिलने में बाधा आती है।
मालवीय नगर हादसे की जांच में यह भी सामने आया कि फायर सर्विस की कमी और संसाधनों की अपर्याप्तता ने बचाव कार्य को धीमा कर दिया था। घटना में 22 लोगों की जान चली गई और कई घायल हुए। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि फायर सर्विस में पर्याप्त स्टाफ, आधुनिक उपकरण और बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम होना कितना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि DFS के पदों की भरपाई और कम्युनिकेशन सिस्टम के आधुनिकीकरण के लिए तत्काल कदम उठाना आवश्यक है। अधिकारियों को नए फायरफाइटर भर्ती करने, प्रशिक्षण बढ़ाने और उपकरणों को उन्नत बनाने पर जोर देना चाहिए। इसके अलावा, फायर सर्विस की तैनाती और प्रतिक्रिया समय पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है, ताकि हादसों में नुकसान को कम किया जा सके।
दिल्ली फायर सर्विस विभाग ने कहा है कि वह खाली पदों को भरने के लिए प्रयास कर रहा है। साथ ही, कम्युनिकेशन और तकनीकी सुधारों के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि ये सुधार बहुत धीरे हो रहे हैं, और अभी भी आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता पर्याप्त नहीं है।
मालवीय नगर की घटना ने राजधानी में फायर सर्विस की कमजोरियों को उजागर किया है। अब सरकार और DFS के लिए यह चुनौती है कि वे विभाग को पर्याप्त स्टाफ और आधुनिक उपकरण प्रदान करें, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो।





