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Delhi : ऊर्जा आपूर्ति में सुधार की उम्मीद, लेकिन 2026 तक पूर्व स्तर पर वापसी मुश्किल

Kavita2
17 May 2026 3:07 PM IST
Delhi : ऊर्जा आपूर्ति में सुधार की उम्मीद, लेकिन 2026 तक पूर्व स्तर पर वापसी मुश्किल
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Delhi दिल्ली: ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज़ रेटिंग्स ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि भारत सहित तेल आयात करने वाले देश अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए द्विपक्षीय (बाइलेटरल) बातचीत का सहारा ले सकते हैं। इसमें संभावित रूप से कोऑर्डिनेटेड ट्रांज़िट कॉरिडोर जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2026 तक युद्ध-पूर्व स्तर के ट्रैफिक वॉल्यूम पर वापसी की संभावना कम है।

मूडीज़ ने अपने वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम (geopolitical risk) विश्लेषण में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी तेज़ और स्थायी समझौते की संभावना सीमित है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह से दोबारा खुलने की उम्मीद भी कम जताई गई है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में ऊर्जा ट्रांज़िट फ्लो में धीरे-धीरे सुधार देखा जा सकता है, लेकिन यह सुधार किसी एक बड़े समझौते या पूर्ण बहाली के बजाय छोटे-छोटे द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से होगा। इसका मतलब यह है कि देशों को ऊर्जा आपूर्ति के लिए अलग-अलग चैनलों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

मूडीज़ ने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति लगभग शून्य से धीरे-धीरे बेहतर होने की दिशा में बढ़ेगी, लेकिन यह प्रक्रिया स्थिर और आसान नहीं होगी। इसमें समय-समय पर रुकावटें और अस्थिरता बनी रह सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक मार्गों पर अनिश्चितता का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति, कीमतों और व्यापारिक लागतों पर पड़ सकता है। ऐसे में देशों के लिए वैकल्पिक ऊर्जा मार्ग और आपूर्ति समझौते और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

मूडीज़ की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था अभी भी भू-राजनीतिक तनावों के प्रभाव में है और पूर्ण स्थिरता आने में समय लग सकता है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह दर्शाती है कि ऊर्जा आपूर्ति में सुधार की संभावना तो है, लेकिन 2026 तक पुरानी स्थिति में वापसी की उम्मीद फिलहाल कमजोर बनी हुई है।

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