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Delhi : बैटरी रीसाइक्लिंग साइट्स के पास मिट्टी में खतरनाक लेड

Delhi दिल्ली: हाल ही में पब्लिश हुई एक स्टडी में पता चला है कि दिल्ली-NCR, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बैटरी रीसाइक्लिंग यूनिट्स के आस-पास की मिट्टी में लेड का स्तर बेहद उच्च है, जिससे लोगों की सेहत और पर्यावरण की सुरक्षा पर गंभीर चिंता बढ़ गई है। 'Soiled with Lead: from Battery Recycling' नामक यह एनालिसिस एनवायरनमेंटल रिसर्च और एडवोकेसी ऑर्गनाइज़ेशन टॉक्सिक्स लिंक ने तैयार किया और बुधवार को सार्वजनिक किया।
स्टडी में कुछ चुनिंदा शहरों के रेजिडेंशियल एरिया, लोकल कम्युनिटी और प्राइमरी स्कूल के पास से कुल 23 मिट्टी के सैंपल लिए गए। एनालिसिस में पाया गया कि सभी सैंपल्स में लेड कंटैमिनेशन 100 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) से लेकर 43,800 ppm तक था। यह स्तर एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन (कंटैमिनेटेड साइट्स का मैनेजमेंट) रूल्स, 2025 के अनुसार खतरनाक मानकों से बहुत ऊपर है।
विशेष रूप से, सैंपल्स में से 52 प्रतिशत (23 में से 12) में लेड का स्तर 5,000 ppm से अधिक था, जो खतरनाक कंटैमिनेटेड साइट्स की सीमा है। वहीं, 31 प्रतिशत सैंपल औद्योगिक एरिया के लिए तय सीमा से ऊपर पाए गए।
स्टडी में यह भी सामने आया कि औपचारिक या ऑथराइज़्ड रीसाइक्लिंग यूनिट्स से लिए गए सैंपल्स में अनौपचारिक या अनऑथराइज़्ड यूनिट्स की तुलना में लेड का एवरेज स्तर अधिक था। लेड-एसिड बैटरी 150 साल से अधिक समय से ऑटोमोबाइल, बैकअप पावर सिस्टम, UPS, टेलीकम्युनिकेशन और रेलवे नेटवर्क में इस्तेमाल हो रही हैं।
खर्च हो चुकी बैटरियों को लेड और प्लास्टिक कंपोनेंट्स निकालने के लिए रीसाइक्लिंग यूनिट या स्मेल्टिंग फैसिलिटी भेजा जाता है। इन यूनिट्स में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह के सेट-अप शामिल हैं। हालांकि, गलत हैंडलिंग और खराब प्रक्रियाओं की वजह से, खासकर अनऑथराइज़्ड यूनिट्स में, लेड मिट्टी, पानी और हवा में अनियंत्रित रूप से फैलता है।
लेड सबसे खतरनाक हेवी मेटल्स में से एक है। इंसान इसकी अत्यधिक मात्रा में संपर्क में आने से न्यूरोलॉजिकल डैमेज, हृदय रोग, ब्लड प्रॉब्लम्स और बच्चों में डिवेलपमेंटल इश्यूज जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हो सकते हैं। इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) की 2016 की स्टडी के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लेड एक्सपोज़र के कारण लगभग 5,40,000 मौतें होती हैं, जिनमें अधिकतम प्रभाव कम और मध्यम आय वाले देशों में देखने को मिलता है।
टॉक्सिक्स लिंक के ऑथर्स ने चेताया है कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की हेल्थ और बच्चों की सुरक्षा पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लेड रीसाइक्लिंग यूनिट्स की नियमित निगरानी और सख्त नियमों के पालन से मिट्टी, पानी और हवा में प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।
इस स्टडी से साफ़ है कि लेड कंटैमिनेशन न केवल पर्यावरणीय खतरा है बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।





