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दिल्ली कोर्ट ने अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के मजिस्ट्रेट आदेश पर रोक लगाई

Kavita2
10 Jun 2026 4:52 PM IST
दिल्ली कोर्ट ने अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के मजिस्ट्रेट आदेश पर रोक लगाई
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Delhi दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने पॉलिटिकल कमेंटेटर अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगा दी है। मामला न्यूज़ पोर्टल न्यूज़लॉन्ड्री से जुड़ी महिला पत्रकारों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी से संबंधित है, जिसे अदालत ने "शायरी" के रूप में देखा है।

एडिशनल सेशंस जज पुरुषोत्तम पाठक ने मित्रा की रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई करते हुए 22 अप्रैल के मजिस्ट्रेट आदेश पर रोक लगाने की अर्जी स्वीकार की। कोर्ट ने 9 जून के आदेश में कहा कि कथित अपमानजनक शब्द शायरी के रूप में हैं और इनमें किसी व्यक्ति का नाम विशेष रूप से नहीं लिया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि इस्तेमाल किए गए शब्दों और वाक्यों का सही अर्थ और संवैधानिक दायरे में उनका मूल्यांकन रिवीजन पिटीशन पर दोनों पक्षों की मेरिट सुनने के बाद ही किया जा सकता है।

इस मामले में पत्रकार मनीषा पांडे और अन्य लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर मालवीय नगर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हेड ऑफिसर (SHO) को FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया था। मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए अभिजीत अय्यर मित्रा ने अदालत में रिवीजन पिटीशन दायर की थी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी टिप्पणी या शायरी का मूल्यांकन करते समय उसके साहित्यिक और सांस्कृतिक संदर्भ को ध्यान में रखना आवश्यक है। जज ने कहा कि आलोचनात्मक या व्यंग्यात्मक भाषा का इस्तेमाल कई बार शायरी या साहित्य के रूप में होता है और इसे व्यक्तिगत अपमान के रूप में नहीं देखा जा सकता।

अभिजीत अय्यर मित्रा के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर व्यक्त की गई टिप्पणियां स्वतंत्र अभिव्यक्ति के दायरे में आती हैं। अदालत ने इस तर्क को ध्यान में रखते हुए FIR दर्ज करने के मजिस्ट्रेट आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।

मामले की सुनवाई अब आगे की तारीखों पर जारी रहेगी, जिसमें अदालत दोनों पक्षों के तर्कों और सबूतों की मेरिट को पूरी तरह से देखेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

इस फैसले के बाद अभिजीत अय्यर मित्रा ने कहा कि यह निर्णय उनके लिए न्यायिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है। वहीं पत्रकारों और सोशल मीडिया विशेषज्ञों ने भी कहा कि यह मामला प्रेस की स्वतंत्रता और आलोचनात्मक शायरी के अधिकार को लेकर न्यायालय में महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में न्यायालय का संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है, ताकि किसी भी व्यक्ति के अधिकारों की हानि न हो और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी उचित ध्यान दिया जाए।

इस घटना ने मीडिया और सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर आलोचना, व्यंग्य और शायरी के दायरे पर भी बहस छेड़ दी है। अदालत की रोक से यह स्पष्ट हुआ है कि किसी भी FIR दर्ज करने से पहले मामला कानूनी और साहित्यिक दृष्टि से पूरी तरह जांचा जाएगा।

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