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Delhi : ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, संसद में चर्चा की मांग

Delhi दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह सुरक्षा कारणों की आड़ लेकर ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर हो रही “असली और जरूरी बहस” को दबाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि 28 अप्रैल को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ग्रेट निकोबार दौरे के बाद सरकार इस मामले में “डैमेज कंट्रोल मोड” में आ गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह परियोजना देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के लिए गंभीर खतरा है और इसे “सबसे बड़े घोटालों में से एक” बताया।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि सरकार इस परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर उठ रहे सवालों से बच रही है और सुरक्षा के नाम पर जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है।
वहीं, सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए एक प्रेस नोट जारी किया है। सरकार का कहना है कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य अंडमान सागर क्षेत्र में भारत की मौजूदगी को मजबूत करना है। साथ ही इसे बंदरगाह-आधारित विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ाया जा रहा है।
सरकारी बयान में यह भी कहा गया कि इस परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है और विकास तथा सुरक्षा दोनों पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।
इस बीच कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि सरकार के स्पष्टीकरण में स्थानीय समुदायों, पर्यावरणविदों, मानवशास्त्रियों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों का कोई समाधान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर पारदर्शी चर्चा जरूरी है और संसद ही इसके लिए सही मंच है।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद में भी गरमाने की संभावना है।





