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दिल्ली सेंट्रल रिज को मिलेगा नया रूप 13 हजार पेड़ों पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

nidhi
18 Sept 2026 9:16 AM IST
दिल्ली सेंट्रल रिज को मिलेगा नया रूप 13 हजार पेड़ों पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश

नई दिल्ली : दिल्ली की हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। राजधानी की सेंट्रल रिज से बाहरी प्रजातियों के करीब 13 हजार पेड़ों को हटाने की योजना पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। इन पेड़ों में मुख्य रूप से विलायती कीकर (Prosopis Juliflora), बबूल और यूकेलिप्टस जैसी गैर-देशी प्रजातियां शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली रिज क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन बहाल करने के लिए इको-रिस्टोरेशन योजना पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बाहरी प्रजातियों के पेड़ों के कारण स्थानीय वनस्पतियों और जैव विविधता पर असर पड़ा है, इसलिए इन्हें हटाकर उनकी जगह देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।

क्यों हटाए जा रहे हैं विदेशी प्रजातियों के पेड़?
दिल्ली रिज को राजधानी का "ग्रीन फेफड़ा" माना जाता है। यह अरावली पर्वतमाला का हिस्सा है और यहां कई तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ विदेशी प्रजातियों के पेड़ तेजी से फैलते हैं और स्थानीय वनस्पतियों के विकास में बाधा बन सकते हैं। विलायती कीकर को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। उनका कहना है कि यह पेड़ जमीन के संसाधनों पर अधिक दबाव डाल सकता है और स्थानीय पौधों की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है।
हटाने के बाद लगाए जाएंगे देशी पेड़
योजना के तहत विदेशी पेड़ों को हटाने के बाद उनकी जगह दिल्ली के प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल देशी प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएंगे। इनमें नीम, बरगद, पीपल और अन्य स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा देने की योजना है। इसका उद्देश्य रिज क्षेत्र में प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और वन्यजीवों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है।
सेंट्रल रिज क्यों है महत्वपूर्ण?
दिल्ली रिज करीब 35 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे चार हिस्सों में बांटा गया है। यह क्षेत्र राजधानी में तापमान नियंत्रण, वायु गुणवत्ता सुधार और भूजल संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है। बढ़ते शहरीकरण के बीच रिज क्षेत्र दिल्ली के लिए पर्यावरणीय सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसलिए यहां होने वाली किसी भी गतिविधि पर पर्यावरणविदों और अदालतों की नजर रहती है।
पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन
रिज क्षेत्र में पेड़ों को हटाने का फैसला पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण समूहों की चिंताएं भी सामने आती रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह सामान्य पेड़ कटाई नहीं बल्कि वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा पुनर्स्थापन अभियान है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने भी साउथ सेंट्रल रिज के संजय वन क्षेत्र में इको-रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट के तहत विलायती कीकर जैसे आक्रामक पौधों को हटाने का काम शुरू किया है। आने वाले समय में इस अभियान के जरिए दिल्ली रिज को फिर से प्राकृतिक स्वरूप देने की कोशिश की जाएगी, ताकि राजधानी को बेहतर हरित क्षेत्र मिल सके।

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