- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- Delhi CJP प्रदर्शन...

x
Delhi दिल्ली गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को सस्पेंड कर दिया गया है। इस मजिस्ट्रेट ने गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट को नोटिस जारी करके CJP के विरोध-प्रदर्शन के लिए कथित तौर पर कैंपेन चलाने के मामले में 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने को कहा था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने यह बात कही। यह बेंच स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें BNSS की धारा 130 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी। जब सीनियर एडवोकेट पीवी दिनेश ने कहा कि ऐसे अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश जाना चाहिए, तो मेहता ने बताया कि अधिकारी को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई थी कि मजिस्ट्रेट ने स्टूडेंट को CJP के नेतृत्व वाले जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया, जबकि कोर्ट ने इसके उलट आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि वह मजिस्ट्रेट से उनके इस कदम के बारे में सफाई मांगेगा।
CJI ने कहा था, "मजिस्ट्रेट की नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे हुई? हमने साफ कर दिया था कि किसी भी स्टूडेंट के खिलाफ कोई जबरदस्ती वाली कार्रवाई नहीं होगी! कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।" उन्होंने हैरानी जताई कि जब शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि स्टूडेंट्स के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं। CJI कांत ने कहा, "हमें हैरानी है कि मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि हमने इसे पहले ही रद्द कर दिया था। किसी भी स्टूडेंट के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। यह बिल्कुल साफ आदेश था।" उन्होंने वकील से तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा और बेंच ने कहा, "हम सफाई मांगेंगे। उन्हें सफाई देने दें।"
त्रिपाठी ने मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस नोटिस में उनसे 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम की दो ज़मानत देने को कहा गया था, क्योंकि उन पर आरोप था कि उन्होंने साथी स्टूडेंट्स को प्रस्तावित CJP धरने में शामिल होने के लिए उकसाया था।
यह नोटिस ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट III ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126/135 के तहत त्रिपाठी को जारी किया था। पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि वह दूसरे स्टूडेंट्स को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे। त्रिपाठी ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130 के तहत 4 सितंबर को जारी नोटिस को पहले ही रद्द कर दिया गया है।
Next Story





