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दिल्ली: देश में सरकारी नौकरी और विदेश में प्राइवेट नौकरी के नाम पर ठगी का बड़ा मामला

देश में बेरोजगारी बढने के साथ ही सरकारी नौकरी पाने और लोगों में विदेश में नौकरी पाने की चाहत आसानी से ठगों का शिकार बना दे रहा है। स्थिति यह है कि शातिर ठग पहले अपने को रसूखदार बता नौकर दिलाने का झांसा देते है, बाद में उसी रसूख के नाम पर डराने धमकाने लगते हैं। यहां तक की पुलिस और प्रशासन के नाक के नीचे ऑफिस खोल ठग अपने इस धंधे को चला रहे हैं। इसमें ठग बड़े राजनीतिक पार्टियों का नाम भी इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते। लोग भी नौकरी पाने के लालच में इस कदर अंधे हो गए हैं कि बिना जांच के ही ऐसे ठगों के जाल में फंस अपनी जमा पूंजी गंवा देते हैं। पुलिस तक शिकायत पहुंचे पर कुछ मामलों में पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिलती है, तो कुछ अब भी फरार हैं, पर इसके शिकार के हाथ कुछ नहीं लगता।
कनाडा का वीजा व वहां नौकरी दिलवाने के नाम पर ठग लिए 1 करोड़: विदेश जाकर वहां नौकरी करने की चाहत में कई लोग आसानी से ठगी के शिकार हो रहे हैं। ठग भी अपने को रसूख व ऊंची पहुंच वाला बंदा बता पहले ऐसे लोगों को झांसे में लेते हैं। फिर रुपये एंठने के बाद उसी रसूख और पहुंच की धमकी देने लगते हैं। ऐसी ही एक वारदात साउथ कैंपस थाना क्षेत्र में हुई है, जहां चार ठग, जिसमें एक महिला भी है ने कनाडा का वीजा बनवाने और कनाडा में बेहतर वेतन पर नौकरी दिलाने के नाम पर एक करोड़ रुपये ठग लिए। इसके बाद कई महिनों तक उन्हें दौड़ाते रहे। जब उनके जालसाजी की पोल खुली तो जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे तो मुख्य आरोपी देने से मुकर गए और पुलिस में जाने की बात कहने पर वे खुद को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) का सदस्य बताते हुए देश के राजनेताओं से संपर्क होने और पुलिस से शिकायत करने पर बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी। पर उनकी यह हरकत उल्टी पड़ गई, जब पीडि़तों की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई करते हुए चोरी आरोपी गुरदीप सिंह, उसकी पत्नी नरेंद्र कौर, हरविंदर और राजवंत कौर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर मामले की जांच करने के साथ ही उनकी तलाश भी शुरू कर दी।
पीडि़त द्वारका के पोचनपुर गांव निवासी पीडि़त रंजीत सिंह (46) द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार उन्हें अपने तीन मित्र अशोक कुमार जांगिड़, अशोक कुमार और प्रवीन कुमार के साथ कनाडा में नौकरी करने की योजना बनाई थी। इसी दौरान वे आरोपी गुरदीप सिंह से मिले थे, जिसने दावा किया था कि वह उन्हें कनाडा का वीजा बनवाने के साथ ही वहां नौकरी का भी प्रबंध कर देगा। इसके लिए उसने चारो को सत्य निकेतन स्थित अपने ऑफिस बुलाया। जहां उनसे गुरदीप के साथ हरविंदर और राजवंत कौर मिली। उन्होंने वीजा बनवाने व विदेश में नौकरी दिलवाने के लिए प्रति व्यक्ति 25 लाख रुपये की मांग की। वे राजी हो गए और उन्होंने एडवांस के रूप में उन्हें पांच लाख रुपये और अपने पासपोर्ट नरेंद्र कौर को दे दिए। कुछ दिनों के अंदर ही उन्होंने उन्हें पहले 14 लाख और फिर वीजा मिल जाने का झांसा देते हुए 20 लाख रुपये और ले लिए।
टिकट और विदेश में रुकने की व्यवस्था के नाम पर ले लिए 20 लाख: कुछ दिनों बाद ही आरोपियों ने फोन कर वीजा और नौकरी की व्यवस्था हो जाने के बाद हवाई जहाज के टिकट और विदेश में रहने-रुकने की व्यवस्था के उनसे 20 लाख की मांग की। उन्होंने वह रुपये भी दे दिए। पर कुछ दिनों बाद भी उनकी ओर से कोई जानकारी नहीं मिली कि इस पर शिकायतकर्ता ने कनाडा में मिलने वाले नौकरी के बारे में ब्यौरा मांगा तो उन लोगों ने 41 लाख देकर ऑफिस से वीजा व अपने पासपोर्ट ले जाने को कहा। जब वे लोग उनके ऑफिस पहुंचे तो राजवंत कौर ने उन्हें असली वीजा के बजाय वीजा लगे उनके पासपोर्ट की फोटोकापी दिखा दी। बताया कि उनका वीजा लगा पासपोर्ट यात्रा के दिन एयरपोर्ट पर दे देंगे। इस बार भी शिकायतकर्ता उनकी बातों में आ गए और बाकी 41 लाख कर भुगतान किर दया।
पैसे मिलने के बाद बंद किया फोन उठाना: इसके बाद गुरदीप सिंह ने पीडि़तों का फोन उठाना बंद कर दिया। संदेह होने पर पीडि़तों ने फोटोकापी वाले वीजा के बारे में पता किया तो वह फर्जी निकला। जब पीडि़त स्वजन के साथ गुरदीप सिंह से मिले और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही तो उसने 15 लाख तुरंत वापस कर दिए। बाकी के 85 लाख भी एक साल के अंदर लौटाने की बात कही। लगभग 18 महीने बाद भी पैसे न मिलने पर एक दिन पीडि़त आरोपी से इस बाबत बात करने पहुंचे तो आरोपी खुद को एआईसीसी का सदस्य बताने लगा और बड़े राजनेताओं से लिंक होने की बात कहकर अंजाम भुगतने की की धमकी देने लगा। इसके बाद पीडि़तों ने मामला दर्ज कराया।
ओएनजीसी में पैन इंडिया फर्जी भर्ती घोटाला मामले का मास्टर माइंड हैदराबाद से गिरफ्तार: ओएनजीसी में पैन-इंडिया फर्जी भर्ती घोटाला मामले के मास्टर माइंड रविचंद्र को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया है। ये कंसल्टेंसी फर्म की आड़ में इस गोरख धंधे को अंजाम दे रहा था। यह फर्जीवाड़ा के कई मामलों में शामिल है। हैदराबाद मेट्रो और वायुसेना में नौकरी दिलाने के मामले में 50 लोगों से लाखों की ठगी के मामले में वह पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
डीसीपी रोहित मीणा के मुताबिक, 14 मई 2018 को तिलक राज शर्मा, चीफ मैनेजर (एचआर), ओएनजीसी ने वसंतकुंज उत्तरी थाने में शिकायत कर आरोप लगाया था कि युवाओं को ओएनजीसी में सहायक अभियंता के रूप में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगा जा रहा है। मामला दर्ज कर जांच के लिए केस को क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया था। जांच के दौरान पता चला कि पीडि़तों को आधिकारिक ओएनजीसी ई-मेल खाते से ई-मेल प्राप्त हुआ था और उनका एक सरकारी कार्यालय में साक्षात्कार हुआ था। पीडि़तों को रणधीर सिंह उर्फ कुणाल किशोर नाम के एक व्यक्ति से मिलवाया गया, जिसने प्रति व्यक्ति से ओएनजीसी में नौकरी दिलाने के लिए 22 लाख रुपये की मांग की थी । बाद में रणधीर सिंह भूमिगत हो गया था। 13 सितंबर 2018 को क्राइम ब्रांच ने सात जालसाज किशोर कुणाल, निवासी सीतामढ़ी, बिहार, वसीम ,मेरठ, अंकित गुप्ता, बागपत रोड, मेरठ, विशाल गोयल, मेरठ, सुमन सौरभ, लक्ष्मी नगर, संदीप कुमार, नजफगढ़ व जगदीश राज को गिरफ्तार कर लिया था। मास्टर माइंड रविचंद्र फरार था। वह लगातार गिरफ्तारी से बच रहा था।
छानबीन में पता चला है कि वर्ष 2017 में रविचंद्र हैदराबाद में टीम वेब के नाम से एक कंसल्टेंसी ऑफिस चला रहा था। मई, 2017 में, उसके एक पूर्व छात्र बाला ने रणधीर सिंह को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया, जिसके मंत्रालय में संपर्क हैं। उसी के बाद ठगी का धंधा शुरू किया गया। हैदराबाद में एक कंसल्टेंसी फर्म चलाने वाले रवि चंद्रा ऐसे पीडि़तों को चुनता था जो सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए पैसे देने को तैयार थे और उन्हें कुणाल किशोर से मिलवाया जाता था। कुणाल दावा करता था कि उसका साला ओएनजीसी का कर्मचारी है और ओएनजीसी में उसका अच्छा प्रभाव है। वह पीडि़तों से शिक्षा प्रमाण पत्र और पैसे एकत्र करता था और अपने सहयोगी वसीम की मदद से फर्जी इंटरव्यू कॉल लेटर तैयार किया था जो विशेषज्ञ वेब डिजाइनर है। वसीम ने कुणाल किशोर के लिए फर्जी वोटर कार्ड भी तैयार किया था। रवि चंद्रा पेशे से वेब डिजाइनर है। 2017 में उसने एशियन ब्राइट करियर नामक एक कंसल्टेंसी फर्म खोली, जहां वह छात्रों को नौकरियों, आईटी कौशल, संचार कौशल आदि के लिए प्रशिक्षण देता था। लेकिन वह उक्त कार्यालय की आड़ में नकली नौकरी भर्ती घोटाला चला रहा था।





