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Delhi : स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ घोटाला जांच तेज, 6 हिरासत में

New Delhi नई दिल्ली : दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में कथित 650 करोड़ रुपये के दवा एवं चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले की जांच तेज हो गई है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने शनिवार को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े वेंडरों सहित कुल छह संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला स्वास्थ्य विभाग में दवा और मेडिकल उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है। प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर नियमों के उल्लंघन और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के संकेत मिले हैं, जिसके बाद एसीबी ने अपनी जांच को तेज कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के कई स्तरों पर जांच की जा रही है। विभागीय अधिकारियों की भूमिका, टेंडर प्रक्रिया और वेंडरों की भागीदारी सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। एसीबी ने हिरासत में लिए गए लोगों से लगातार पूछताछ शुरू कर दी है और उनसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों एवं प्रक्रियाओं को लेकर सवाल किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में वर्तमान प्रभारी डीजीएचएस (डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज) डॉ. सुषमा जैन से भी पूछताछ की गई है। उनसे विभागीय खरीद प्रक्रिया, फाइलों के अनुमोदन और संबंधित रिकॉर्ड को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जांच एजेंसियों ने कब्जे में लिए हैं।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन अब तक सामने आए तथ्यों से यह संकेत मिलते हैं कि मामले में गंभीर अनियमितताएं हो सकती हैं। खरीद प्रक्रिया में नियमों के पालन, टेंडर आवंटन और भुगतान प्रक्रिया की बारीकी से जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश के बाद इस मामले में जांच की रफ्तार और तेज कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी के बाद एसीबी ने सक्रियता बढ़ाई और कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
एसीबी सूत्रों का यह भी कहना है कि पूछताछ के दौरान सामने आ रहे नए तथ्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस घोटाले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इतने बड़े स्तर पर घोटाला बिना उच्च स्तर की जानकारी या संलिप्तता के संभव नहीं है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी जांच पूरी होने का इंतजार करने की बात कही गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में दवा और उपकरण खरीद में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर आम जनता की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता गंभीर चिंता का विषय है।
फिलहाल एसीबी की टीम विभिन्न दस्तावेजों, टेंडर फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही, वेंडरों के लेनदेन और भुगतान प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे घोटाले की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
इस मामले के सामने आने के बाद दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है और अधिकारी स्तर पर भी पूछताछ और दस्तावेजों की जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।





