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Delhi : आग हादसों से 6 साल में 543 मौतें, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Kavita2
6 Jun 2026 10:33 AM IST
Delhi :  आग हादसों से 6 साल में 543 मौतें, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
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Delhi दिल्ली: मालवीय नगर में हाल ही में हुए होटल हादसे के बाद दिल्ली में आग से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में राजधानी में आग से जुड़े हादसों में कुल 543 लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा शहर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता बढ़ाने वाला है।

बुधवार को दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टेज़ B&B में लगी भीषण आग ने स्थिति की गंभीरता को और उजागर किया। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर विदेशी नागरिक शामिल थे, जबकि 25 अन्य लोग घायल हुए। इस घटना के बाद पूरे शहर में आग सुरक्षा नियमों के पालन और इमारतों की जांच को लेकर बहस तेज हो गई है।

हाल के दिनों में भी दिल्ली में कई बड़े आग हादसे सामने आए हैं। विवेक विहार और पालम इलाकों में हुई अलग-अलग घटनाओं में नौ-नौ लोगों की मौत हुई थी, जिसने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। इन घटनाओं के बाद फायर सेफ्टी नियमों के सख्त पालन की मांग फिर से उठने लगी है।

दिल्ली सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2019 से मार्च 2026 तक आग से संबंधित हादसों में कुल 543 लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ते जोखिम और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की स्थिति को दर्शाता है।

इसके अलावा, आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि केवल 2026 के पहले छह महीनों में ही आग से जुड़ी घटनाओं में 65 लोगों की मौत हो चुकी है। यह संख्या यह संकेत देती है कि आग लगने की घटनाएं कम होने के बजाय बढ़ रही हैं और इन पर नियंत्रण की आवश्यकता और अधिक गंभीर हो गई है।

दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) को मिलने वाली आपातकालीन कॉल्स में भी पिछले कुछ वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार, शहर में बढ़ती आबादी, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण आग की घटनाओं का जोखिम बढ़ा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई पुरानी इमारतों में फायर सेफ्टी सिस्टम या तो अनुपस्थित हैं या सही ढंग से काम नहीं करते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। साथ ही, संकरी गलियां और भीड़भाड़ वाले इलाके राहत और बचाव कार्यों में बाधा उत्पन्न करते हैं।

हालिया होटल हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दिल्ली में फायर सेफ्टी नियमों का सही ढंग से पालन हो रहा है। प्रशासन पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वह इमारतों की नियमित जांच, फायर ऑडिट और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।

सरकारी स्तर पर कहा गया है कि आग से बचाव के लिए जागरूकता अभियान और निरीक्षण प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। वहीं, फायर विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि वे अपने भवनों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच कराएं और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी योजना तैयार रखें।

कुल मिलाकर, दिल्ली में आग से होने वाली लगातार घटनाएं और बढ़ती मौतों का आंकड़ा शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हालिया हादसों के बाद अब यह आवश्यकता और बढ़ गई है कि फायर सेफ्टी नियमों को सख्ती से लागू किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसों को रोका जा सके।

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