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रक्षा मंत्रालय की बड़ी डील वायुसेना को मिलेंगे 160 स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन

Ratna Netam
23 Sept 2026 6:26 PM IST
रक्षा मंत्रालय की बड़ी डील वायुसेना को मिलेंगे 160 स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन
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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) की सटीक हवाई हमला क्षमता को मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बड़ा कदम उठाया। मंत्रालय ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) और उनसे जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए 810.79 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। यह समझौता 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुआ।रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस खरीद को ‘Buy (Indian–Indigenously Designed, Developed and Manufactured)’ यानी भारतीय और स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित एवं निर्मित श्रेणी में रखा गया है। इस सौदे का उद्देश्य भारतीय वायुसेना को आधुनिक स्वदेशी हथियार उपलब्ध कराने के साथ रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
SAT-SAAW एक हवा से जमीन पर हमला करने वाला सटीक निर्देशित ग्लाइड बम है। इसे दुश्मन के एयरफील्ड और वहां मौजूद महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसे Jaguar, Hawk और Su-30 MKI जैसे विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि लड़ाकू विमान लक्ष्य से काफी दूरी पर रहते हुए इसे छोड़ सकता है।रिपोर्ट के अनुसार SAT-SAAW लगभग 100 किलोमीटर तक की स्टैंड-ऑफ रेंज से दुश्मन के एयरफील्ड से जुड़े लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है। स्टैंड-ऑफ हथियार का फायदा यह होता है कि हमला करने वाले विमान को लक्ष्य के बेहद करीब जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे विमान और उसके चालक दल को दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों के सीधे खतरे से अपेक्षाकृत दूर रखते हुए हमला करने का विकल्प मिलता है।
इस हथियार प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसमें करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी। परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण सब-सिस्टम के स्वदेशीकरण पर भी काम किया जा रहा है। इनमें इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज और ट्विन स्टोर कैरियर शामिल हैं।SAT-SAAW को खास तौर पर एयरफील्ड से जुड़े महत्वपूर्ण जमीनी ठिकानों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है। DRDO से संबंधित सरकारी जानकारी के मुताबिक स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन को रडार, बंकर, टैक्सी ट्रैक और रनवे जैसे एयरफील्ड परिसंपत्तियों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह उच्च सटीकता वाला निर्देशित हथियार है और समान श्रेणी की कई अन्य हथियार प्रणालियों की तुलना में हल्का है।
160 SAT-SAAW की खरीद भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी से सटीक जमीनी लक्ष्यों पर प्रहार करने की क्षमता को बढ़ाएगी। आधुनिक हवाई अभियानों में एयरफील्ड, रनवे और उससे जुड़े सैन्य ढांचे महत्वपूर्ण लक्ष्य होते हैं। ऐसी स्थिति में स्टैंड-ऑफ हथियार लड़ाकू विमानों को लक्ष्य के करीब पहुंचे बिना मिशन को अंजाम देने का विकल्प प्रदान करते हैं।रक्षा मंत्रालय के मुताबिक नए हथियारों की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। SAT-SAAW की डिलीवरी वित्त वर्ष 2027-28 और 2028-29 के दौरान निर्धारित है। मंत्रालय का कहना है कि इसके वायुसेना में शामिल होने से उसकी परिचालन क्षमता बढ़ेगी और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी।
इस सौदे का एक महत्वपूर्ण पहलू स्वदेशी रक्षा उत्पादन भी है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से रक्षा उपकरणों और हथियार प्रणालियों में घरेलू डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा दे रही है। SAT-SAAW के मामले में DRDO की ओर से विकसित तकनीक का उत्पादन BDL के जरिए किया जाएगा। इससे रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।भारत डायनामिक्स लिमिटेड रक्षा मंत्रालय के अधीन प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में शामिल है और मिसाइल तथा अन्य हथियार प्रणालियों के निर्माण से जुड़ी हुई है। SAT-SAAW का नया अनुबंध कंपनी को एक और स्वदेशी हथियार प्रणाली के उत्पादन से जोड़ता है।
SAT-SAAW के विकास के दौरान DRDO और भारतीय वायुसेना ने इसके विभिन्न संस्करणों का परीक्षण भी किया है। पूर्व में सरकार ने बताया था कि इसके सैटेलाइट नेविगेशन और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर आधारित कॉन्फिगरेशन के सफल उड़ान परीक्षण किए गए थे। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर को भी स्वदेशी रूप से विकसित किया गया था।आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में सटीक निर्देशित हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे हथियारों का उद्देश्य निर्धारित सैन्य लक्ष्य पर अधिक सटीक प्रहार करना होता है। SAT-SAAW को विशेष रूप से एयरफील्ड से संबंधित लक्ष्यों के लिए तैयार किया गया है, जिससे यह भारतीय वायुसेना के मौजूदा हथियार विकल्पों में एक विशिष्ट क्षमता जोड़ेगा।₹810.79 करोड़ के इस अनुबंध के जरिए भारतीय वायुसेना को कुल 160 SAT-SAAW और संबंधित उपकरण मिलेंगे। रक्षा मंत्रालय ने इस खरीद को स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने और वायुसेना की परिचालन क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 2027-28 से इन हथियारों की आपूर्ति शुरू होने की योजना है।
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