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नरेन्द्र मोहन स्मृति व्याख्यान में रक्षा मंत्री का अहम संदेश

nidhi
11 Oct 2026 6:55 AM IST
नरेन्द्र मोहन स्मृति व्याख्यान में रक्षा मंत्री का अहम संदेश
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नरेन्द्र मोहन स्मृति व्याख्यान में राजनाथ सिंह ने रखे विचार
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वर्गीय नरेन्द्र मोहन स्मृति व्याख्यान में लोकतंत्र, असहमति, संवैधानिक संस्थाओं और युवा पीढ़ी की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार के नाम पर अराजकता फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाने और सरकार की नीतियों से असहमति रखने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन इसके साथ नागरिक जिम्मेदारियों का पालन करना भी आवश्यक है।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती उसके नागरिकों की जागरूकता, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान और संवाद की परंपरा पर निर्भर करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असहमति और विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन विरोध की प्रक्रिया में कानून और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए।
संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर जताई चिंता
रक्षा मंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नागरिकों को इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने और उनसे जवाब मांगने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि संस्थाओं की विश्वसनीयता को सुनियोजित तरीके से कमजोर करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग और भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है।
युवाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप बननी चाहिए नीतियां
राजनाथ सिंह ने व्याख्यान के विषय युवा पीढ़ी, पीढ़ियों के अंतर और नीति निर्माण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समय के साथ समाज की परिस्थितियां बदलती हैं और नई पीढ़ी की आवश्यकताएं भी पहले से अलग होती हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिनमें युवाओं की आकांक्षाओं और क्षमताओं का ध्यान रखा जाए। युवाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय नीति निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी देने की जरूरत है। रक्षा मंत्री ने कहा कि अब युवाओं के लिए नीति बनाने की सोच से आगे बढ़कर युवाओं द्वारा और युवाओं के साथ मिलकर नीतियां बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने पीढ़ियों के बीच अंतर को टकराव के रूप में देखने के बजाय अनुभव और नई सोच के संगम के रूप में देखने की बात कही। उनका कहना था कि वरिष्ठ पीढ़ी के अनुभव और युवाओं की रचनात्मक सोच मिलकर बेहतर परिणाम दे सकते हैं।
युवाओं के विकास के लिए माली जैसी हो सरकार की भूमिका
रक्षा मंत्री ने युवाओं के विकास में सरकारी नीतियों की भूमिका समझाने के लिए बढ़ई और माली का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ई लकड़ी को पहले से निर्धारित आकार में ढालता है, जबकि माली पौधे को उसकी प्रकृति के अनुसार बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए बनाई जाने वाली नीतियों का उद्देश्य भी इसी प्रकार होना चाहिए। सरकार को युवाओं की प्रतिभा को किसी निर्धारित ढांचे में सीमित करने के बजाय उन्हें अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए। राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में एक हजार से अधिक रक्षा स्टार्टअप काम कर रहे हैं। युवा ड्रोन, मिसाइल, एंटी-ड्रोन सिस्टम और बुलेटप्रूफ जैकेट जैसे उपकरणों के विकास में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि माई भारत प्लेटफॉर्म से तीन करोड़ से अधिक युवा जुड़ चुके हैं। वहीं विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 से देशभर के 50 लाख से अधिक युवाओं के जुड़ने की जानकारी भी उन्होंने दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को नेतृत्व, नवाचार और सामाजिक भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना है।
सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी बोले
कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीक ने युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं, लेकिन इसके अत्यधिक इस्तेमाल से जुड़ी चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि कई देशों में युवाओं को अत्यधिक डिजिटल गतिविधियों के संभावित दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। भारत में भी युवाओं के संतुलित विकास के लिए तकनीक के इस्तेमाल और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों पर ध्यान देना आवश्यक है।
रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, समस्या समाधान और विभिन्न विषयों के समन्वित अध्ययन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ मानवीय मूल्यों को बनाए रखने की अपील की। उनका कहना था कि दुनिया के श्रेष्ठ विचारों और तकनीकों से सीखना जरूरी है, लेकिन अपनी संस्कृति, सभ्यता और विरासत से जुड़ाव भी बना रहना चाहिए।
नरेन्द्र मोहन को श्रद्धांजलि, साहित्यकार बुद्धिनाथ मिश्र सम्मानित
स्वर्गीय नरेन्द्र मोहन स्मृति व्याख्यान में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नरेन्द्र मोहन के व्यक्तित्व और योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोहन ने पत्रकारिता में उच्च मूल्यों और आदर्शों को हमेशा महत्व दिया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार और गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र को साहित्य सृजन सम्मान प्रदान किया गया। रक्षा मंत्री ने उनकी लंबी साहित्यिक साधना और विशेष रूप से नवगीत के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में राजनाथ सिंह ने युवा पीढ़ी की ऊर्जा और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा में युवाओं के योगदान को याद किया।
उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगने पर समाज और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि इस ऊर्जा का गलत दिशा में इस्तेमाल होने पर नुकसान भी हो सकता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जागरूक है और अपनी जिम्मेदारियों को समझती है। उन्होंने विश्वास जताया कि युवाओं को कुछ समय के लिए भ्रमित किया जा सकता है, लेकिन उन्हें राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से स्थायी रूप से दूर नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अपने संबोधन का समापन करते हुए अधिकारों के साथ उत्तरदायित्व, स्वतंत्रता के साथ अनुशासन, शक्ति के साथ संयम और सामर्थ्य के साथ सेवा भावना को आवश्यक बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि युवाओं पर भरोसा करने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना भी जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई पीढ़ी अपनी प्रतिभा, मेहनत और नवाचार के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी।
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