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दीप्ति गौर मुखर्जी बनीं नई उच्च शिक्षा सचिव, विनीत जोशी की लेंगी जगह

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियां कीं। इसी क्रम में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। वह विनीत जोशी की जगह लेंगी। जोशी को पिछले महीने ही पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया गया था।
कार्मिक मंत्रालय की ओर से सोमवार देर रात जारी आदेश के मुताबिक, कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने दीप्ति गौर मुखर्जी की उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। मुखर्जी फिलहाल कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। नई जिम्मेदारी के साथ उन्हें देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े नीतिगत और प्रशासनिक मामलों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालनी होगी।
1993 बैच की IAS अधिकारी हैं मुखर्जी
दीप्ति गौर मुखर्जी मध्य प्रदेश कैडर की 1993 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव के दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वर्तमान में वह कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की सचिव के रूप में कार्यरत हैं।
उच्च शिक्षा सचिव के रूप में उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर काम चल रहा है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े नियमन, शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थागत सुधार और उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने जैसे विषयों पर केंद्र सरकार का लगातार जोर रहा है।
विनीत जोशी की जगह लेंगी
दीप्ति गौर मुखर्जी उच्च शिक्षा विभाग में विनीत जोशी का स्थान लेंगी। जोशी को पिछले महीने पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया गया था। उनके स्थानांतरण के बाद उच्च शिक्षा विभाग में नए सचिव की नियुक्ति की गई है।
विनीत जोशी के कार्यकाल के बाद अब मुखर्जी के सामने विभाग की चल रही योजनाओं और नीतिगत कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश में उनकी नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा बताया गया है।
कैबिनेट नियुक्ति समिति की मंजूरी
केंद्र सरकार में सचिव स्तर की नियुक्तियों के लिए कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंजूरी महत्वपूर्ण होती है। कार्मिक मंत्रालय के सोमवार देर रात जारी आदेश में बताया गया कि समिति ने दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।
यह नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा किए गए व्यापक प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा है। एक साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। सचिव स्तर पर होने वाले ऐसे बदलावों का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज में निरंतरता के साथ-साथ विभिन्न विभागों की प्राथमिकताओं के अनुरूप अधिकारियों की तैनाती करना होता है।
उच्च शिक्षा विभाग में बड़ी जिम्मेदारी
उच्च शिक्षा विभाग शिक्षा मंत्रालय के महत्वपूर्ण विभागों में शामिल है। देश में विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों और उच्च शिक्षा से जुड़े कई नीतिगत विषयों के संचालन और समन्वय में विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
नई सचिव के सामने उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। इनमें उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, तकनीक का इस्तेमाल, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देना और उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाना प्रमुख विषय हो सकते हैं।
इसके अलावा केंद्र और राज्यों के बीच उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर समन्वय भी सचिव स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। विभिन्न केंद्रीय संस्थानों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े निकायों के साथ तालमेल बनाना भी विभाग के कामकाज का अहम हिस्सा है।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में भी निभाई अहम भूमिका
उच्च शिक्षा विभाग में नियुक्ति से पहले दीप्ति गौर मुखर्जी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की सचिव के रूप में कार्यरत थीं। कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े नियामकीय और प्रशासनिक मामलों को संभालने का उन्हें अनुभव है।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में उनके कार्यकाल के दौरान कंपनी कानून, कॉर्पोरेट प्रशासन और कारोबारी संस्थाओं से जुड़े विभिन्न नीतिगत विषयों पर काम हुआ। अब उच्च शिक्षा विभाग में उनकी प्रशासनिक विशेषज्ञता का अलग क्षेत्र में इस्तेमाल होगा।
प्रशासनिक अनुभव बनेगा उपयोगी
दीप्ति गौर मुखर्जी का लंबा प्रशासनिक अनुभव उच्च शिक्षा विभाग के लिए उपयोगी माना जा सकता है। राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर काम करने के अनुभव के कारण उन्हें नीतियों के क्रियान्वयन और विभिन्न संस्थानों के साथ समन्वय का अनुभव है।
उच्च शिक्षा जैसे व्यापक क्षेत्र में केंद्र सरकार की नीतियों को विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसके लिए मंत्रालय, राज्यों, नियामकीय संस्थाओं और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
बड़े प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा
केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को किया गया यह फेरबदल केवल उच्च शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं है। कई वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इन बदलावों के जरिए सरकार ने सचिव स्तर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव किया है।
दीप्ति गौर मुखर्जी की नियुक्ति भी इसी व्यापक फेरबदल का हिस्सा है। अब उनकी नई जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग की नीतियों और प्रशासनिक कामकाज को आगे बढ़ाने की होगी।
केंद्र सरकार के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। मुखर्जी के सामने मौजूदा योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ उच्च शिक्षा क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी होगी। आने वाले समय में विभाग की नीतिगत दिशा और नई पहलों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।





