- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- भारत की GDP पर छिड़ी...
दिल्ली-एनसीआर
भारत की GDP पर छिड़ी बहस पीयूष गोयल ने आलोचकों को दिया करारा जवाब
Ratna Netam
2 Sept 2026 8:09 PM IST

x
नई दिल्ली। भारत की अप्रैल-जून 2026 तिमाही में **7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि** को लेकर सरकार और आलोचकों के बीच बहस तेज हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री **पीयूष गोयल** ने बुधवार को GDP के आंकड़ों पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं, पूर्व अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों पर तीखा हमला बोला। दिल्ली में ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ACMA के वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि कुछ 'बेरोजगार लोग' खुद को अर्थशास्त्री बताते हैं और टीवी चैनलों पर बैठकर देश की आर्थिक उपलब्धियों को कमतर दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे लोगों के 'झांसे' में नहीं आने की अपील की।
गोयल की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पूर्व RBI गवर्नर **रघुराम राजन** और पूर्व वित्त सचिव **सुभाष चंद्र गर्ग** समेत कुछ विशेषज्ञों ने नए GDP आंकड़ों, रोजगार और नई GDP सीरीज को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने भी बुधवार को छह बिंदुओं में स्पष्टीकरण जारी कर आलोचनाओं को खारिज किया और कहा कि पुरानी तथा नई GDP सीरीज की सीधे तुलना करना सही नहीं है।
'7.8 प्रतिशत की ग्रोथ एक वास्तविकता'
पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि आलोचक कुछ भी कहते रहें लेकिन भारत की 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि वास्तविकता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत अपनी आर्थिक दिशा पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत की विकास दर बेहद मजबूत बनी हुई है।
गोयल ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और देश के 140 करोड़ लोगों की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभरा है।
सरकार के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक है।
सेब की तुलना सेब से करनी चाहिए'
GDP विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा **बेस ईयर में बदलाव** है।
गोयल ने आलोचकों पर आरोप लगाया कि वे पुरानी GDP सीरीज के आंकड़ों की तुलना नई सीरीज के आंकड़ों से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब बेस ईयर ही बदल चुका है तो दोनों आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं की जा सकती।
उन्होंने इसे 'apples with apples' यानी समान आधार वाले आंकड़ों की तुलना करने का मामला बताया।
भारत ने GDP गणना के लिए नई सीरीज में बेस ईयर **2011-12 से बदलकर 2022-23** किया है। बेस ईयर बदलने का उद्देश्य अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना, नए क्षेत्रों और उपलब्ध बेहतर डेटा स्रोतों को राष्ट्रीय आय के आकलन में शामिल करना है।
इसी बदलाव को लेकर अब सरकार और आलोचकों के बीच विवाद छिड़ा हुआ है।
सुभाष चंद्र गर्ग ने क्या सवाल उठाया?
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने 7.8 प्रतिशत के हेडलाइन आंकड़े को लेकर सवाल उठाया था।
उनका तर्क था कि पिछले वर्ष के मौजूदा कीमतों पर GDP के आंकड़े को नए आधार पर कम दिखाया गया है और इससे मौजूदा वृद्धि ज्यादा नजर आती है। गर्ग ने कहा कि 7.8 प्रतिशत का आंकड़ा पहली नजर में प्रभावशाली जरूर लगता है, लेकिन इसकी वास्तविकता समझने के लिए गणना के आधार को देखना जरूरी है।
यही वह तर्क है जिसे केंद्र सरकार ने गलत बताया है।
MoSPI ने स्पष्ट किया कि **86.05 लाख करोड़ रुपये** वाला आंकड़ा पुरानी 2011-12 बेस ईयर सीरीज का था और उसकी तुलना नई 2022-23 बेस ईयर सीरीज के आंकड़े से नहीं की जा सकती।
मंत्रालय ने कहा कि पुराने और नए बेस ईयर के आंकड़ों के अंतर को पिछले साल की GDP में जानबूझकर की गई कटौती बताना गलत है।
रघुराम राजन ने रोजगार पर उठाया सवाल
पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने भी GDP आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं।
राजन ने पूछा कि अगर भारत इतनी तेजी से विकास कर रहा है तो उसी अनुपात में **अच्छी नौकरियां क्यों नहीं बन रही हैं और निवेश अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं बढ़ रहा है?**
उन्होंने GDP आंकड़ों में कुछ विसंगतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि इनकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
राजन का सवाल केवल GDP की गणना तक सीमित नहीं है। उनका व्यापक तर्क यह है कि तेज आर्थिक वृद्धि का असर रोजगार, निवेश और लोगों की आय जैसे संकेतकों में भी दिखाई देना चाहिए।
इसी रोजगार वाले सवाल पर गोयल ने सबसे तीखा पलटवार किया।
'खुद ही बेरोजगार बचे हैं'
पीयूष गोयल ने आलोचकों पर तंज कसते हुए कहा कि वे रोजगार खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उन्हें यह बात हजम नहीं हो रही कि शायद वे खुद ही 'बेरोजगार' बचे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के पास टीवी पैनल पर बैठकर तर्क गढ़ने का काम रह गया है।
इसके बाद गोयल ने रोजगार के अपने तर्क के समर्थन में उद्योगों का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि जब वह टेक्सटाइल सेक्टर के लोगों से मिलते हैं तो उन्हें कर्मचारियों की कमी की शिकायत सुनने को मिलती है।
गोयल के मुताबिक तमिलनाडु के **तिरुपुर** के उद्योग उनसे एक लाख और लोगों की मांग कर रहे हैं और उनका कहना है कि वे उन्हें कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार देने के लिए तैयार हैं।
L&T का भी दिया उदाहरण
गोयल ने इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी L&T का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कंपनी से पूछा था कि वह अपना विस्तार और तेजी से क्यों नहीं कर रही है।
उनके मुताबिक कंपनी की तरफ से मानव संसाधन की कमी का मुद्दा उठाया गया।
गोयल ने इसका इस्तेमाल इस तर्क के समर्थन में किया कि देश में रोजगार के अवसर नहीं होने की तस्वीर पेश करना वास्तविक स्थिति का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं करता।
हालांकि अर्थशास्त्रियों के बीच रोजगार पर बहस केवल रिक्त पदों की संख्या तक सीमित नहीं रहती। इसमें रोजगार की गुणवत्ता, वेतन, औपचारिक रोजगार, श्रम भागीदारी और कौशल के अनुरूप नौकरियों जैसे कई संकेतक भी शामिल होते हैं।
इसलिए GDP और रोजगार के संबंध को लेकर सरकार और आलोचकों की व्याख्या अलग-अलग बनी हुई है।
मंत्री नहीं बनाते GDP के आंकड़े'
GDP आंकड़ों में कथित हेरफेर के आरोपों पर भी गोयल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि **मंत्री इन आंकड़ों को तैयार नहीं करते हैं**। देश में सांख्यिकीय डेटा तैयार करने की एक संस्थागत व्यवस्था है और आंकड़ों को राजनीतिक रूप से गढ़े जाने का आरोप लगाना गलत है।
गोयल ने कहा कि सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता। उन्होंने आलोचकों पर देश के लोगों को गुमराह और हतोत्साहित करने का आरोप लगाया।
उनका कहना था कि अर्थव्यवस्था को लेकर लगातार नकारात्मक माहौल बनाने से देश को नुकसान होता है।
MoSPI भी मैदान में उतरा
विवाद बढ़ने के बाद सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बुधवार को छह बिंदुओं में स्पष्टीकरण जारी किया।
मंत्रालय ने बिना सुभाष चंद्र गर्ग का नाम लिए उनके उस तर्क का खंडन किया जिसमें मौजूदा तिमाही की वास्तविक वृद्धि काफी कम होने की बात कही गई थी।
MoSPI ने दोहराया कि अलग-अलग बेस ईयर वाली GDP सीरीज के आंकड़ों को सीधे जोड़कर या घटाकर विकास दर निकालना सांख्यिकीय रूप से सही तरीका नहीं है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष की GDP को केवल मौजूदा वर्ष की विकास दर ज्यादा दिखाने के लिए जानबूझकर नीचे नहीं किया गया।
यानी सरकार ने स्पष्ट तौर पर 7.8 प्रतिशत के आंकड़े का बचाव किया है।
कांग्रेस ने कहा 'Greatly Distorted Picture'
GDP आंकड़ों को लेकर विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमला कर रहा है।
कांग्रेस महासचिव **जयराम रमेश** ने GDP को लेकर तंज कसते हुए इसे **'Greatly Distorted Picture'** कहा। उनका आरोप है कि सरकार प्रचार के जरिए आर्थिक तस्वीर को बेहतर दिखा सकती है लेकिन अर्थव्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों को छिपाया नहीं जा सकता।
कांग्रेस से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट से भी GDP आंकड़ों पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। इस तरह आर्थिक आंकड़ों की तकनीकी बहस राजनीतिक टकराव में भी बदल गई है।
संजीव सान्याल ने भी किया आंकड़ों का बचाव
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से जुड़े अर्थशास्त्री **संजीव सान्याल** ने भी 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि पर उठ रहे सवालों को खारिज किया है।
उन्होंने कहा कि बेस ईयर बदलना सामान्य सांख्यिकीय प्रक्रिया है और अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना को बेहतर तरीके से मापने के लिए समय-समय पर ऐसा किया जाता है।
सान्याल का कहना है कि भारत के आर्थिक विकास से जुड़े दूसरे संकेतक भी मजबूत वृद्धि की तरफ इशारा कर रहे हैं।
आखिर GDP विवाद है क्या?
पूरे विवाद के केंद्र में तीन प्रमुख सवाल हैं।
पहला—क्या नई GDP सीरीज के तहत सामने आई **7.8 प्रतिशत की विकास दर** भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक मजबूती को सही तरीके से दिखाती है?
दूसरा—पुरानी और नई GDP सीरीज के बीच आंकड़ों में आए बदलाव की व्याख्या कैसे की जानी चाहिए?
और तीसरा—अगर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में है तो यह वृद्धि **रोजगार और निवेश में कितनी तेजी से बदल रही है?
सरकार पहले दो सवालों पर साफ तौर पर कह रही है कि नई सीरीज की कार्यप्रणाली सही है और पुरानी सीरीज से सीधी तुलना भ्रामक है। रोजगार के सवाल पर सरकार उद्योगों में कर्मचारियों की मांग और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का उदाहरण दे रही है।
दूसरी तरफ आलोचक रोजगार की गुणवत्ता, निजी निवेश और GDP गणना की पद्धति पर अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
आर्थिक बहस से राजनीतिक टकराव तक पहुंचा मामला
पीयूष गोयल के तीखे बयान ने अब GDP की तकनीकी बहस को राजनीतिक विवाद में बदल दिया है।
एक तरफ केंद्र सरकार 7.8 प्रतिशत वृद्धि को भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बड़ी उपलब्धि बता रही है। दूसरी तरफ विपक्ष और कुछ पूर्व नीति निर्माता आंकड़ों की पद्धति तथा रोजगार के सवालों को लेकर सरकार को घेर रहे हैं।
GDP आंकड़ों को लेकर बहस होना किसी भी अर्थव्यवस्था में असामान्य नहीं है। बेस ईयर में बदलाव और नई सीरीज लागू होने के बाद पुराने तथा नए आंकड़ों की तुलना कैसे की जाए, यह तकनीकी विषय है। इसलिए राजनीतिक बयानों से अलग आधिकारिक कार्यप्रणाली और तुलनीय डेटा इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल पीयूष गोयल ने साफ संदेश दिया है कि सरकार **7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि के आंकड़े के साथ मजबूती से खड़ी है**। साथ ही उन्होंने आलोचकों पर कटाक्ष करते हुए लोगों से उनकी बातों में नहीं आने को कहा है। लेकिन रोजगार, निवेश और GDP की नई गणना पद्धति को लेकर शुरू हुई बहस आने वाले दिनों में भी आर्थिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहने वाली है।
Next Story





