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डीडीए ने कमाए 1020 करोड़, बढ़ी आय या पुराना स्टॉक खपाया?

Saba Naaz
17 July 2026 10:10 PM IST
डीडीए ने कमाए 1020 करोड़, बढ़ी आय या पुराना स्टॉक खपाया?
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दिल्ली: विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार राजस्व दर्ज किया है। डीडीए ने अप्रैल से जून की अवधि में 1,020 करोड़ रुपये की कमाई की है, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले 120 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल इसी अवधि में डीडीए की आय 462 करोड़ रुपये रही थी।

डीडीए के मुताबिक, इस तिमाही में कुल 1,284 फ्लैटों की बिक्री हुई है। हालांकि, इस बढ़ी हुई कमाई के पीछे सबसे बड़ा योगदान नरेला क्षेत्र के फ्लैटों की बिक्री का रहा है। कुल बिके हुए फ्लैटों में से करीब 90 प्रतिशत यानी 1,153 फ्लैट अकेले नरेला में बिके हैं। इससे साफ है कि डीडीए की बढ़ी हुई आय का बड़ा आधार नरेला की आवासीय योजनाएं रही हैं।

नरेला में फ्लैटों की बिक्री में आई तेजी अचानक नहीं आई है। पिछले कुछ वर्षों से यहां मौजूद समस्याओं को दूर करने के लिए कई स्तरों पर सुधार किए गए हैं। पहले नरेला क्षेत्र में कनेक्टिविटी, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण खरीदारों का रुझान कम था। लेकिन अब इन क्षेत्रों में सुधार होने के बाद लोगों का भरोसा बढ़ा है।

नरेला में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुलिस चौकी और स्टेशन शुरू किए गए। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाने के लिए डीटीसी बसों के नए रूट शुरू किए गए। क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए मेट्रो विस्तार योजना को भी आगे बढ़ाया गया। इसके लिए डीडीए की ओर से डीएमआरसी को फंड उपलब्ध कराया गया है।

इसके अलावा खरीदारों को आकर्षित करने के लिए डीडीए ने फ्लैटों की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तक की छूट वाली योजनाएं भी शुरू कीं। साथ ही क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम निर्माण की योजना ने भी लोगों की रुचि बढ़ाई है। यूईआर-2 सड़क परियोजना के पूरा होने से नरेला और आसपास के क्षेत्रों की पहुंच बेहतर हुई है, जिसका सीधा फायदा आवासीय बिक्री को मिला है।

हालांकि, डीडीए की इस बढ़ी हुई कमाई की तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि पूरी तरह से नई व्यावसायिक सफलता नहीं है, बल्कि वर्षों से जमा पुराने आवासीय स्टॉक को निकालने की रणनीति का परिणाम भी है। डीडीए के पास लंबे समय से कई ऐसे फ्लैट मौजूद थे, जिन्हें खरीदारों की कम रुचि के कारण बेचने में परेशानी आ रही थी।

डीडीए ने पुराने फ्लैटों की बिक्री बढ़ाने के लिए ऑनलाइन योजनाएं शुरू कीं। इनमें "पहले आओ-पहले पाओ" जैसी स्कीम शामिल है। इस योजना की अवधि को 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाया गया है। तत्काल कब्जा और फ्रीहोल्ड जैसे विकल्पों ने भी खरीदारों को आकर्षित किया है।

हालांकि, डीडीए के लिए अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। खासकर दिल्ली के पॉश इलाकों में नए स्टॉक की कमी और महंगे फ्लैटों की धीमी बिक्री चिंता का विषय है। इस तिमाही में मध्यम आय वर्ग यानी एमआईजी के 435 फ्लैट बिके, जबकि उच्च आय वर्ग यानी एचआईजी के केवल 191 फ्लैट ही बिक सके।

यह आंकड़े बताते हैं कि महंगे फ्लैटों के मामले में खरीदार अब भी निजी बिल्डरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। डीडीए की योजनाओं में किफायती आवास की मांग ज्यादा दिखाई दे रही है, जबकि प्रीमियम श्रेणी के मकानों को लेकर प्रतिक्रिया सीमित है।

कुल मिलाकर, डीडीए की 1,020 करोड़ रुपये की कमाई एक बड़ी उपलब्धि जरूर है, लेकिन इसके पीछे नरेला के फ्लैटों की बिक्री और पुराने स्टॉक को खत्म करने की रणनीति अहम भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में डीडीए के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह इस बिक्री गति को बनाए रखे और सभी क्षेत्रों में आवासीय योजनाओं को सफल बना सके।

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