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राज्यसभा उपचुनाव की तारीख घोषित, एल मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर 12 नवंबर को मतदान

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश से राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। यह सीट भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, राज्यसभा की इस सीट के लिए 12 नवंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। इसी दिन शाम को मतगणना भी होगी। उपचुनाव के लिए अधिसूचना 26 अक्टूबर को जारी की जाएगी, जिसके बाद उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकेंगे। आयोग के इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ने की संभावना है। भाजपा के साथ अन्य राजनीतिक दलों की निगाहें भी इस सीट पर होने वाले उपचुनाव पर टिकी हैं।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता एल. मुरुगन के इस्तीफे के कारण मध्य प्रदेश से राज्यसभा की एक सीट रिक्त हो गई थी। उनका इस्तीफा 14 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हुआ था।
राज्यसभा सचिवालय की अधिसूचना के अनुसार, सभापति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। मुरुगन का राज्यसभा कार्यकाल मूल रूप से 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही सदस्यता छोड़ दी।
इसके बाद निर्वाचन आयोग ने रिक्त सीट पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की। आयोग ने संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत चुनाव कार्यक्रम जारी किया है।
26 अक्टूबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, राज्यसभा उपचुनाव की अधिसूचना सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को जारी होगी। इसी दिन से उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
इच्छुक उम्मीदवार 2 नवंबर तक अपने नामांकन पत्र जमा कर सकेंगे। इसके बाद 3 नवंबर को निर्वाचन अधिकारियों द्वारा नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी।
जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उम्मीदवारों की ओर से जमा किए गए दस्तावेज और नामांकन पत्र निर्धारित नियमों के अनुसार हैं या नहीं।
उम्मीदवारों को अपना नाम वापस लेने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद चुनाव मैदान में बचे उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
यदि केवल एक उम्मीदवार चुनाव मैदान में रहता है, तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकता है।
12 नवंबर को मतदान और उसी दिन मतगणना
चुनाव आयोग के अनुसार, यदि मतदान की आवश्यकता होती है, तो 12 नवंबर 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे।
इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। मतदान के नतीजे सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा की रिक्त सीट पर कौन सा उम्मीदवार निर्वाचित हुआ है।
इस उपचुनाव की पूरी प्रक्रिया 16 नवंबर तक संपन्न करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
चुनाव आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा के विधायक करेंगे मतदान
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों से अलग होती है। राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव आम जनता सीधे मतदान करके नहीं करती।
इसके बजाय संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य राज्यसभा उम्मीदवारों को चुनते हैं।
मध्य प्रदेश की इस सीट के लिए भी विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करेंगे। राज्यसभा चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली लागू होती है।
एक सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में राजनीतिक दलों का विधानसभा में संख्याबल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में इस सीट पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
हालांकि, पार्टी किस नेता को उम्मीदवार बनाएगी, इस संबंध में आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा है।
तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने पर मुरुगन का जोर
एल. मुरुगन तमिलनाडु भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। वह राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक गतिविधियों के विस्तार के लिए लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।
केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद मुरुगन ने तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत बनाने की दिशा में काम करने की बात कही थी।
तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ दलों का लंबे समय से प्रभाव रहा है। ऐसे में भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
मुरुगन की संगठनात्मक सक्रियता को इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की भविष्य की रणनीति और मुरुगन की नई जिम्मेदारियों को लेकर अंतिम जानकारी पार्टी नेतृत्व की ओर से ही स्पष्ट होगी।
भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपचुनाव?
राज्यसभा संसद का उच्च सदन है। केंद्र सरकार के लिए विभिन्न विधेयकों को पारित कराने और संसदीय कामकाज को आगे बढ़ाने में राज्यसभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
किसी भी राजनीतिक दल के लिए राज्यसभा में अपना संख्याबल बनाए रखना रणनीतिक रूप से आवश्यक होता है।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से भाजपा की एक सीट रिक्त हुई है। ऐसे में पार्टी इस सीट पर अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करके उच्च सदन में अपनी स्थिति बनाए रखना चाहेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा का बहुमत होने के कारण पार्टी को इस चुनाव में संख्यात्मक बढ़त हासिल है।
हालांकि, विपक्ष की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने की स्थिति में चुनावी मुकाबला भी देखने को मिल सकता है।
नए सदस्य को मिलेगा शेष कार्यकाल
राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसे लोकसभा की तरह भंग नहीं किया जाता। इसके सदस्यों का सामान्य कार्यकाल छह वर्ष का होता है।
प्रत्येक दो वर्ष में राज्यसभा के लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी सीटों पर नए चुनाव आयोजित किए जाते हैं।
लेकिन जब कोई सदस्य कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देता है या किसी अन्य कारण से सीट रिक्त होती है, तो उपचुनाव कराया जाता है।
ऐसे उपचुनाव में निर्वाचित सदस्य को सामान्यतः नया छह वर्ष का कार्यकाल नहीं मिलता, बल्कि वह पूर्व सदस्य के बचे हुए कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
इस मामले में एल. मुरुगन का निर्धारित कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था। इसलिए उपचुनाव में जीतने वाला उम्मीदवार इसी शेष अवधि के लिए राज्यसभा का सदस्य बनेगा।
उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी निगाहें
निर्वाचन आयोग की ओर से कार्यक्रम जारी होने के बाद अब सभी की निगाहें राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों पर टिकी हैं।
भाजपा किस नेता को राज्यसभा भेजने का फैसला करेगी, इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है।
वहीं, कांग्रेस या अन्य विपक्षी दल इस उपचुनाव में उम्मीदवार उतारेंगे या नहीं, यह भी आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
26 अक्टूबर से नामांकन शुरू होने के बाद चुनावी तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगेगी। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 5 नवंबर के बाद मुकाबले की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।
फिलहाल निर्वाचन आयोग ने मतदान और मतगणना सहित सभी प्रमुख तारीखों की घोषणा कर दी है। ऐसे में मध्य प्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।





