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भारत के करोड़ों युवा रोजगार की दौड़ से बाहर रिपोर्ट में सामने आया आंकड़ा

Ratna Netam
22 Aug 2026 5:57 PM IST
भारत के करोड़ों युवा रोजगार की दौड़ से बाहर रिपोर्ट में सामने आया आंकड़ा
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दिल्ली : भारत में युवाओं की शिक्षा और रोजगार को लेकर एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 8.7 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो न तो किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं और न ही रोजगार या प्रशिक्षण से जुड़े हुए हैं। इस श्रेणी को **NEET (Not in Education, Employment or Training)** कहा जाता है। रिपोर्ट में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को शामिल किया गया है।
नीति आयोग की रिपोर्ट **"Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047"** में बताया गया है कि देश के सामने केवल बेरोजगारी ही नहीं, बल्कि युवाओं को शिक्षा से रोजगार तक जोड़ने की चुनौती भी बड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में युवा ऐसे हैं, जो किसी औपचारिक शिक्षा, नौकरी या कौशल प्रशिक्षण का हिस्सा नहीं हैं।
क्या है NEET श्रेणी?
NEET का मतलब है ऐसे युवा जो **शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण** तीनों से बाहर हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि ये सभी युवा बेरोजगार हैं, बल्कि इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो किसी कारण से पढ़ाई या नौकरी की प्रक्रिया से बाहर हैं।
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ग को समझना जरूरी है क्योंकि युवाओं की क्षमता को देश की आर्थिक प्रगति से जोड़ने के लिए उन्हें सही अवसर और कौशल प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
8.7 करोड़ युवाओं में बड़ी संख्या घरेलू कार्यों में
रिपोर्ट में बताया गया है कि NEET श्रेणी में आने वाले युवाओं में बड़ी संख्या घरेलू जिम्मेदारियों से जुड़ी हुई है। आंकड़ों के अनुसार इस समूह का करीब 88 प्रतिशत हिस्सा घरेलू कार्यों में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खासकर महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच बढ़ाना जरूरी है। कई बार सामाजिक जिम्मेदारियों, पारिवारिक परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के कारण युवा शिक्षा और रोजगार की मुख्यधारा से दूर हो जाते हैं।
कौशल विकास पर जोर
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भारत के स्किलिंग सिस्टम को और मजबूत बनाने की जरूरत बताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें रोजगार से जुड़े कौशल, तकनीकी ज्ञान और उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देना जरूरी है।
आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और नई इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में युवाओं को नई तकनीकों के अनुसार तैयार करना बड़ी चुनौती है।
शिक्षा से रोजगार तक की दूरी
भारत में हर साल बड़ी संख्या में युवा शिक्षा पूरी करके नौकरी की तलाश में निकलते हैं, लेकिन कई बार उनकी योग्यता और उद्योग की जरूरतों के बीच अंतर रह जाता है। यही कारण है कि कई युवा डिग्री होने के बावजूद रोजगार पाने में कठिनाई महसूस करते हैं।
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए। राज्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल विकास की योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया है।
युवाओं को जोड़ना क्यों जरूरी?
भारत को दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है। देश की बड़ी युवा आबादी आर्थिक विकास के लिए बड़ी ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर मिले।
यदि बड़ी संख्या में युवा शिक्षा और रोजगार से बाहर रहते हैं तो इसका असर आर्थिक विकास, आय और सामाजिक प्रगति पर पड़ सकता है।
सरकार के सामने चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को रोजगार योग्य बनाना और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है। इसके लिए कौशल विकास योजनाओं, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों और उद्योग आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रोजगार पैदा करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि युवाओं को उन क्षेत्रों के लिए तैयार करना होगा जहां भविष्य में ज्यादा अवसर बनने वाले हैं।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत
रिपोर्ट के आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि महिला युवाओं की भागीदारी बढ़ाना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। घरेलू जिम्मेदारियों के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं शिक्षा और रोजगार से दूर हो जाती हैं।
महिलाओं के लिए लचीले काम के अवसर, बेहतर प्रशिक्षण और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी माना जा रहा है।
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