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जाजपुर का दशरथपुर 50 दिनों में पांचवीं बार बाढ़ की चपेट में, तटबंधों में दरार से बढ़ी परेशानी

Kavita2
25 Aug 2026 1:46 PM IST
जाजपुर का दशरथपुर 50 दिनों में पांचवीं बार बाढ़ की चपेट में, तटबंधों में दरार से बढ़ी परेशानी
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जाजपुर। ओडिशा के जाजपुर जिले का दशरथपुर ब्लॉक एक बार फिर बाढ़ की चपेट में आ गया है। पिछले करीब 50 दिनों में यह पांचवीं बार है जब इलाके में बाढ़ की स्थिति बनी है। बार-बार आने वाली बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई परिवार अभी पिछली बाढ़ से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि बैतरणी नदी के नए बाढ़ के पानी ने एक बार फिर उनके सामने संकट खड़ा कर दिया।

इस बार हालात इसलिए भी गंभीर बताए जा रहे हैं क्योंकि कानी नदी और बैतरणी नदी के तटबंधों में कई स्थानों पर दरारें आ गई हैं। इन दरारों से पानी आसपास के गांवों और निचले इलाकों में प्रवेश कर रहा है। लगातार बाढ़ के कारण स्थानीय लोगों के सामने घर, सड़क, खेती और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

पांचवीं बार आई बाढ़

दशरथपुर ब्लॉक में लगातार बाढ़ आने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। पिछले 50 दिनों के दौरान चार बार बाढ़ का सामना कर चुके लोग अभी सामान्य स्थिति में लौटने की कोशिश ही कर रहे थे कि एक बार फिर नदी का जलस्तर बढ़ने लगा।

बैतरणी नदी का नया बाढ़ का पानी ब्लॉक के कई इलाकों में प्रवेश कर गया है। जिन क्षेत्रों में पहले आई बाढ़ का पानी पूरी तरह नहीं निकल पाया था, वहां नई बाढ़ ने स्थिति और खराब कर दी है।

बार-बार जलभराव होने से ग्रामीणों के लिए अपने घरों और संपत्ति को सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है। खेती और अन्य स्थानीय गतिविधियां भी प्रभावित होने की आशंका है।

कानी नदी के तटबंध में खुली दरार

रिपोर्टों के मुताबिक, तारपाड़ा पंचायत के तहत डोवाबिल पटना के पास कानी नदी के किनारे तटबंध में आई दरार से पानी गांवों की ओर बह रहा है। बताया जा रहा है कि इस हिस्से में खुली दरार के कारण नदी का पानी लगातार आसपास के इलाकों में फैल रहा है।

स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि पानी के लगातार प्रवाह से दरार के और चौड़ी होने का खतरा बना हुआ है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई तो अधिक क्षेत्र में पानी फैलने की आशंका है।

कांटापाड़ा में भी तटबंध क्षतिग्रस्त

कांटापाड़ा में भी एक दरार के कारण बाढ़ का पानी आसपास के क्षेत्रों में पहुंच रहा है। बताया गया है कि यह दरार पहली बाढ़ के दौरान बनी थी। पिछली बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ यह हिस्सा अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाया है।

नई बाढ़ आने के साथ पुराने क्षतिग्रस्त हिस्सों से पानी का रिसाव और प्रवाह बढ़ गया है। इससे स्थानीय ग्रामीणों के बीच यह चिंता बनी हुई है कि कहीं तटबंध का बड़ा हिस्सा टूट न जाए।

बार-बार बाढ़ और तटबंधों में हो रहे नुकसान ने इलाके में स्थायी बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था की जरूरत को भी सामने ला दिया है।

बैतरणी तटबंध में 40 फीट की दरार

जयनतारा महापात्र साही के पास बैतरणी नदी के तटबंध में भी बड़ी दरार आने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, इस हिस्से में करीब 40 फीट लंबी दरार बन गई है।

तटबंध में इतनी बड़ी दरार से नदी का पानी आसपास के इलाकों में पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। पांचवीं बाढ़ के दौरान महापात्र साही में करीब 100 फीट की एक और दरार से पानी घुसने की बात सामने आई है।

इन दरारों के कारण ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन क्षतिग्रस्त तटबंधों की तत्काल मरम्मत कर पानी को गांवों की ओर फैलने से रोके।

सैकड़ों परिवारों पर संकट

दशरथपुर में लगातार बाढ़ आने से सैकड़ों परिवार प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक बाढ़ का असर खत्म होने से पहले दूसरी बाढ़ आ जाती है।

इससे लोगों को अपने घरों की सफाई, सामान को सुरक्षित रखने और सामान्य जीवन बहाल करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। जिन परिवारों के घरों में पहले पानी घुस चुका है, उनके सामने फिर से वही स्थिति पैदा हो गई है।

बार-बार आने वाली बाढ़ से खाद्यान्न, घरेलू सामान और अन्य जरूरी वस्तुओं को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बना हुआ है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में सड़क और संपर्क मार्ग प्रभावित होने से लोगों की आवाजाही भी बाधित हो सकती है।

राहत और स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों के सामने तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी समाधान की चुनौती है। बार-बार बाढ़ आने के कारण केवल अस्थायी राहत पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। तटबंधों की मजबूती, कमजोर हिस्सों की पहचान और समय पर मरम्मत जरूरी है।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि पुराने क्षतिग्रस्त हिस्सों की समय रहते मरम्मत कर दी जाती और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाती, तो नई बाढ़ के दौरान पानी के फैलाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था।

फिलहाल दशरथपुर में पांचवीं बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं। बैतरणी और कानी नदी के तटबंधों में कई जगह आई दरारें स्थिति की गंभीरता को बढ़ा रही हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ के पानी को आबादी वाले क्षेत्रों में फैलने से रोकना, प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाना और क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत करना है। बार-बार बाढ़ झेल रहे ग्रामीण अब ऐसी व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे उन्हें हर कुछ दिनों में नए जल संकट का सामना न करना पड़े।

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