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दानम नागेंद्र को सुप्रीम कोर्ट से झटका अयोग्यता बरकरार
Ratna Netam
24 Sept 2026 4:31 PM IST

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तेलंगाना के खैरताबाद से विधायक रहे दानम नागेंद्र को बड़ा झटका देते हुए उनकी अयोग्यता के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें नागेंद्र को संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित किया गया था। हाई कोर्ट ने खैरताबाद विधानसभा सीट को भी खाली घोषित किया था।मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने नागेंद्र की याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट की 24 सितंबर की कॉज लिस्ट भी इस तीन सदस्यीय पीठ की पुष्टि करती है। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही नागेंद्र की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने और खैरताबाद सीट खाली होने का फैसला बरकरार रहा।मामला दानम नागेंद्र के 2024 के राजनीतिक कदम से जुड़ा है। नागेंद्र ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भारत राष्ट्र समिति (BRS) के टिकट पर खैरताबाद सीट से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2024 में उन्होंने कांग्रेस का रुख किया और सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उस समय वह BRS के टिकट पर निर्वाचित विधायक बने हुए थे।
23 अप्रैल 2024 से अयोग्य
तेलंगाना हाई कोर्ट ने नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से अयोग्य माना था। यह वही तारीख थी जब उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में सिकंदराबाद सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। हाई कोर्ट के मुताबिक उनका यह कदम दसवीं अनुसूची के तहत स्वेच्छा से अपनी मूल राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ने के समान था।नागेंद्र लोकसभा चुनाव जीत नहीं सके थे, लेकिन इसके बाद वह खैरताबाद के विधायक के रूप में बने रहे। इसी को लेकर उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग उठी।अयोग्यता की याचिकाएं BRS विधायक पी. कौशिक रेड्डी और भाजपा विधायक दल के नेता एलेटी महेश्वर रेड्डी की ओर से दायर की गई थीं। तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने इस साल 11 मार्च को नागेंद्र को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। बाद में मामला हाई कोर्ट पहुंचा और अदालत ने स्पीकर के फैसले को पलट दिया।
हाई कोर्ट ने 18 सितंबर को सुनाया था फैसला
तेलंगाना हाई कोर्ट ने 18 सितंबर को नागेंद्र को विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करते हुए खैरताबाद विधानसभा सीट खाली घोषित कर दी थी। अदालत ने माना कि BRS विधायक रहते हुए कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ना दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आता है।हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए नागेंद्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य सवाल यह रहा कि कांग्रेस में जाने और उसके टिकट पर चुनाव लड़ने के बाद नागेंद्र की BRS में वापसी की कोशिश क्या पहले हो चुके दलबदल के कानूनी परिणामों को खत्म कर सकती है।
आया राम गया राम फिर आया राम’ की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने मौखिक रूप से मामले को “आया राम, गया राम, फिर आया राम” जैसी स्थिति बताया। भारतीय राजनीति में यह अभिव्यक्ति बार-बार राजनीतिक दल बदलने वाले नेताओं के संदर्भ में इस्तेमाल होती रही है।अदालत ने नागेंद्र की ओर से दी गई दलीलों को स्वीकार नहीं किया और हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बाद में मूल पार्टी में लौटने का दावा पहले हो चुके दलबदल के प्रभाव को स्वतः समाप्त नहीं करता।
दसवीं अनुसूची के तहत हुई कार्रवाई
भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची दलबदल विरोधी कानून से संबंधित है। इसके पैरा 2(1)(a) के तहत किसी राजनीतिक दल से निर्वाचित विधायक को अयोग्य ठहराया जा सकता है यदि वह स्वेच्छा से उस दल की सदस्यता छोड़ देता है।नागेंद्र के मामले में याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करना उनके BRS छोड़ने का स्पष्ट प्रमाण था। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए उन्हें नामांकन की तारीख से अयोग्य माना था। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया।
अन्य विधायकों के मामलों पर भी नजर
नागेंद्र उन BRS विधायकों में शामिल थे जिनके 2024 में कांग्रेस की ओर जाने को लेकर दलबदल का विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि नागेंद्र का मामला दूसरे मामलों से इस मायने में अलग था कि उन्होंने औपचारिक रूप से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। अन्य विधायकों से जुड़े अयोग्यता के मामले अलग कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन हैं और प्रत्येक का फैसला उसके तथ्यों के आधार पर होगा।
नागेंद्र ने कहा फैसले का स्वागत
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद नागेंद्र ने कहा कि वह अदालत के आदेश का स्वागत करते हैं। उन्होंने खैरताबाद में लोगों के समर्थन पर भरोसा जताया, हालांकि संभावित उपचुनाव में वह किस पार्टी के टिकट पर उतरेंगे, इस बारे में उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल खैरताबाद विधानसभा सीट खाली घोषित करने वाला हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा। नागेंद्र की अयोग्यता 23 अप्रैल 2024 से मानी गई है। इस फैसले ने दलबदल कानून के तहत उस सवाल को भी प्रमुखता से सामने रखा है कि एक पार्टी के टिकट पर निर्वाचित प्रतिनिधि का दूसरी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना उसकी विधानसभा सदस्यता पर क्या कानूनी असर डालता है।
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