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फर्जी ट्रैफिक चालान के झांसे में 1.58 लाख रुपए की साइबर ठगी

SHIDDHANT
27 Aug 2025 12:34 AM IST
फर्जी ट्रैफिक चालान के झांसे में 1.58 लाख रुपए की साइबर ठगी
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DELHI दिल्ली: साइबर क्राइम का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने फर्जी ट्रैफिक चालान का झांसा देकर पीड़ित को मालवेयर एप्लिकेशन इंस्टॉल करवाया और फिर उनके मोबाइल फोन को हैक करके 1.58 लाख रुपए उड़ा लिए। दिल्ली पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में पंजाब के जालंधर निवासी 24 वर्षीय अजय कुमार को गिरफ्तार किया है। उत्तर-पश्चिम जिले के डीसीपी भीष्म सिंह ने बताया कि पीतमपुरा निवासी आयुष गोयल ने साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। आयुष ने बताया कि उन्हें एक फर्जी लिंक के जरिए उनके लंबित ट्रैफिक चालान की सूचना भेजी गई। लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्हें एक एपीके फाइल डाउनलोड करनी पड़ी, जिसने उनके फोन को हैक कर लिया। इसके तुरंत बाद उनके बैंक खाते से 1.58 लाख रुपए गायब हो गए।

पुलिस ने मामले की तत्काल जांच शुरू की। जांच में पता चला कि अजय कुमार ने ठगी की रकम अपने क्रेडिट कार्ड खाते में ट्रांसफर कर ली थी। रकम का ट्रेस रोकने के लिए उसने पैसे को कई अलग-अलग बैंक खातों में विभाजित कर जमा कर दिया। पुलिस ने अजय के पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया क्रेडिट कार्ड बरामद कर लिया। पूछताछ में अजय ने और बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि इस तरह के फर्जी ट्रैफिक चालान और मालवेयर एप्लिकेशन के माध्यम से वह कई लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी ने कबूल किया कि वह अलग-अलग शहरों में इसी तरह की ठगी करता रहा है और रकम को कई खातों में बंटाकर ट्रेस रोकता था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि अजय कुमार के पीछे साइबर क्राइम नेटवर्क या सहयोगी हैं या नहीं।

डीसीपी भीष्म सिंह ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे फर्जी लिंक और संदिग्ध संदेशों पर कभी क्लिक न करें। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध एपीके फाइल या एप्लिकेशन को डाउनलोड करना भारी पड़ सकता है और इसके जरिए साइबर ठगी और बैंक खाते से धन हानि हो सकती है। साइबर पुलिस ने बताया कि ऐसे मामलों में तुरंत नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई जाए और मोबाइल बैंकिंग एप्लिकेशन के पासवर्ड तुरंत बदल दिए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल सुरक्षा और सतर्कता ही ऐसे साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

आयुष गोयल की शिकायत के बाद पुलिस ने फॉरेंसिक विश्लेषण कर यह पता लगाया कि मोबाइल में इंस्टॉल की गई एपीके फाइल ने फोन के सिक्योरिटी सिस्टम को भेदकर बैंक विवरण हासिल किए। इसके बाद अजय ने रकम ट्रांसफर कर दी। पुलिस ने कहा कि यह मामला यह दिखाता है कि साइबर अपराधियों की रणनीतियां दिन-ब-दिन जटिल और चालाक हो रही हैं, इसलिए नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।अजय कुमार को गिरफ्तार कर उत्तर-पश्चिम जिले की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजते हुए मामले की आगे की जांच के लिए साइबर पुलिस को जिम्मेदारी सौंप दी। यह मामला डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे को रेखांकित करता है और यह चेतावनी देता है कि साइबर जागरूकता और सुरक्षा उपायों को अपनाना कितना जरूरी है।

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