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कावेरी जल विवाद पर CWMA की अहम बैठक आज

Kavita2
23 Jun 2026 10:15 AM IST
कावेरी जल विवाद पर CWMA की अहम बैठक आज
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New Delhi नई दिल्ली : कावेरी नदी बेसिन में मॉनसून की कमजोर बारिश के कारण जल संकट की स्थिति को देखते हुए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने आज एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इस बैठक में नदी प्रणाली और जलाशयों की मौजूदा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

बैठक में मुख्य रूप से कावेरी बेसिन के जलाशयों में मौजूदा पानी का भंडारण स्तर, नदी प्रणाली में उपलब्ध जल प्रवाह और बेसिन से जुड़े राज्यों में कृषि गतिविधियों की स्थिति पर चर्चा की जाएगी। लगातार कम बारिश के कारण क्षेत्र में जल प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में तमिलनाडु की ओर से कर्नाटक के जलाशयों से अपने हिस्से का बचा हुआ 9.19 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMCFT) पानी छोड़ने की मांग उठाई जा सकती है। यह पानी जून माह के लिए तय किया गया था, लेकिन अब तक पूरा नहीं छोड़ा गया है।

वर्तमान स्थिति में कर्नाटक ने इस महीने अब तक केवल लगभग 2 TMCFT पानी ही छोड़ा है। ऐसे में तमिलनाडु की ओर से अपनी हिस्सेदारी के अनुसार शेष पानी की आपूर्ति को लेकर दबाव बनाए जाने की संभावना है।

दूसरी ओर, कर्नाटक के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि राज्य में इस बार मॉनसून कमजोर रहा है और जलाशयों में पानी का स्तर अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में अतिरिक्त पानी छोड़ने की स्थिति फिलहाल अनुकूल नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि बैठक में कर्नाटक की ओर से यह तर्क रखा जा सकता है कि मौजूदा जल भंडारण स्थिति और कम बारिश के कारण अतिरिक्त पानी छोड़ना राज्य की आंतरिक जल आपूर्ति और कृषि आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकता है।

कावेरी जल विवाद लंबे समय से दोनों राज्यों—कर्नाटक और तमिलनाडु—के बीच एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। हर वर्ष मॉनसून के दौरान और बाद में पानी के वितरण को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद सामने आते हैं।

CWMA की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब बेसिन क्षेत्रों में किसान वर्ग भी जल आपूर्ति को लेकर चिंतित है। धान और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन कम बारिश ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

बैठक में विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा जलाशयों की वास्तविक स्थिति, आने वाले दिनों के पूर्वानुमान और जल उपयोग की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की जाएगी। इसके आधार पर आगे की सिफारिशें तैयार की जाएंगी।

जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले हफ्तों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति दोनों पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें CWMA की बैठक पर टिकी हैं, जिसमें यह तय होगा कि तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जल वितरण को लेकर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा और क्या किसी अस्थायी समाधान पर सहमति बनती है।

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