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CRPF ने रचा इतिहास! 47 साल बाद बना अनोखा रिकॉर्ड, लगातार 12 महीने ऑपरेशन में एक भी जवान की मौत नहीं

Shubhra Nandy
4 Nov 2026 6:56 AM IST
CRPF ने रचा इतिहास! 47 साल बाद बना अनोखा रिकॉर्ड, लगातार 12 महीने ऑपरेशन में एक भी जवान की मौत नहीं
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PM मोदी ने सराहा
नई दिल्ली : देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। पिछले 47 वर्षों में पहली बार सीआरपीएफ ने लगातार 12 महीने ऐसे पूरे किए हैं, जिनमें किसी भी जवान की ऑपरेशन के दौरान मौत नहीं हुई। आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहने वाले इस सुरक्षा बल के लिए यह उपलब्धि ऐतिहासिक मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि की सराहना की है। सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह के अनुसार, बल में आखिरी ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को दर्ज की गई थी। इसके बाद लगातार 12 महीने तक किसी भी अभियान के दौरान जवान की जान नहीं गई। इससे पहले इस तरह की उपलब्धि जनवरी 1979 में समाप्त हुए समयखंड के दौरान दर्ज की गई थी। इस उपलब्धि पर सीआरपीएफ के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने खुशी जाहिर करते हुए इसे मजबूत नेतृत्व, आधुनिक तकनीक, बेहतर रणनीति और जवानों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की उपलब्धि की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर को सीआरपीएफ के इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बल की उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताते हुए संकेत दिया कि शून्य ऑपरेशनल मौतों का आंकड़ा अपने आप में बहुत कुछ कहता है। सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने भी इस उपलब्धि पर जवानों और अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और घायल जवानों को तेजी से चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को इस सफलता के प्रमुख कारणों में शामिल किया।
3.25 लाख जवानों वाले बल की बड़ी सफलता
सीआरपीएफ के पूर्व महानिरीक्षक अरुण कुमार ने इस उपलब्धि को पूरे संगठन के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ देश के लगभग सभी संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही है। करीब 3.25 लाख जवानों वाले इतने बड़े बल के लिए लगातार एक साल तक किसी ऑपरेशनल मौत का नहीं होना असाधारण उपलब्धि है। अरुण कुमार ने इस सफलता के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह के योगदान की सराहना की। उनके अनुसार, सुरक्षा अभियानों में बेहतर समन्वय और नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
छत्तीसगढ़ के नक्सली हमलों से बदले हालात तक का सफर
पूर्व सीआरपीएफ महानिदेशक प्रणय सहाय ने भी इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ लंबे समय से आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों में अग्रिम भूमिका निभाती रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हुए बड़े नक्सली हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। विशेष रूप से 6 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में 75 सीआरपीएफ जवानों और एक राज्य पुलिसकर्मी सहित कुल 76 सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी। उस दौर में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाना सुरक्षा बलों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। घने जंगल, दुर्गम रास्ते और नक्सलियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी नहीं मिल पाना बड़ी समस्याएं थीं। प्रणय सहाय के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मजबूत नेतृत्व, अधिकारियों, जवानों और उनके परिवारों के सामूहिक योगदान को दिया।
ड्रोन और नाइट विजन तकनीक ने बदली रणनीति
सीआरपीएफ के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक एचआर सिंह ने आधुनिक तकनीक को सुरक्षा अभियानों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में नाइट विजन निगरानी उपकरणों और ड्रोन जैसी तकनीकों से सुरक्षा बलों की क्षमताएं बढ़ी हैं। इन तकनीकों की मदद से घने जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। बेहतर जानकारी मिलने से सुरक्षा बल अभियान की योजना अधिक प्रभावी ढंग से तैयार कर सकते हैं। आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के साथ जवानों को बेहतर प्रशिक्षण और त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। किसी अभियान के दौरान जवान घायल होने पर उसे जल्द अस्पताल पहुंचाने की क्षमता जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है।
सड़क निर्माण और स्थानीय लोगों का सहयोग भी अहम
पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक एचआर सिंह के मुताबिक, छत्तीसगढ़ सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क और संचार सुविधाओं के विस्तार ने भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती दी है। दुर्गम इलाकों में सड़क निर्माण से सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान हुई है। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों तक सरकारी सेवाओं और विकास योजनाओं की पहुंच बढ़ने से सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के बीच संवाद को बढ़ावा मिला है। मेडिकल कैंप, जनकल्याणकारी गतिविधियों और स्थानीय लोगों के साथ बेहतर समन्वय से भरोसा बढ़ने की बात भी पूर्व अधिकारियों ने कही है। उनके अनुसार, बेहतर सूचना तंत्र सुरक्षा अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार रहा है।
सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण संदेश
सीआरपीएफ की यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सुरक्षा अभियानों में जवानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत है। हालांकि, शून्य ऑपरेशनल मौतों का अर्थ यह नहीं है कि इस अवधि में बल में किसी भी कारण से कोई मृत्यु नहीं हुई। यह रिकॉर्ड विशेष रूप से सुरक्षा अभियानों के दौरान होने वाली मौतों से संबंधित है। पूर्व अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, मजबूत खुफिया तंत्र और समय पर चिकित्सा सहायता की व्यवस्था भविष्य में भी जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगी।
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