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टैक्स चोरी पर शिकंजा, दिल्ली के चार वार्डों में हर संपत्ति की होगी पड़ताल

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (MCD) संपत्ति कर से राजस्व बढ़ाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। निगम जल्द ही कैमरों, मैपिंग उपकरणों और थ्री डी मैपिंग तकनीक की मदद से उन संपत्तियों की पहचान करेगा, जिनसे संपत्ति कर नहीं मिल रहा है या जिनके मालिक सही जानकारी के आधार पर टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं। इस योजना की शुरुआत फिलहाल दिल्ली के चार वार्डों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जाएगी।
एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य संपत्ति कर नहीं चुकाने वाले लोगों की पहचान करना है। इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि जिन लोगों द्वारा टैक्स जमा किया जा रहा है, वह उनकी वास्तविक संपत्ति के हिसाब से है या नहीं। निगम को आशंका है कि बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां हैं, जहां निर्माण अधिक है लेकिन संपत्ति कर कम क्षेत्रफल या कम मंजिलों के आधार पर जमा किया जा रहा है।
एमसीडी ने इस सर्वे के लिए एक निजी एजेंसी के साथ करार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, एजेंसी फिलहाल बिना किसी शुल्क के सर्वे की सुविधा उपलब्ध कराएगी। सर्वे के दौरान संपत्ति का पता, भवन में बनी मंजिलों की संख्या, निर्माण की स्थिति और संपत्ति कर भुगतान से जुड़ी पूरी जानकारी जुटाई जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि सर्वे में यह देखा जाएगा कि किसी मकान में मौके पर कितनी मंजिलें बनी हुई हैं और उसके अनुसार संपत्ति कर जमा किया जा रहा है या नहीं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी भवन में चार मंजिलों का निर्माण है, लेकिन टैक्स केवल दो मंजिलों के हिसाब से जमा किया जा रहा है तो ऐसी संपत्तियों को चिन्हित किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में थ्री डी मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे एमसीडी को किसी भी वार्ड में मौजूद संपत्तियों की विस्तृत जानकारी एक क्लिक पर मिल सकेगी। थ्री डी मैपिंग के जरिए भवनों की संरचना, आकार और निर्माण संबंधी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी। इससे संपत्ति कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
एमसीडी ने पायलट प्रोजेक्ट के लिए अपने चार जोन के चार वार्डों का चयन किया है। इनमें करोल बाग, नरेला, रोहिणी और शाहदरा साउथ जोन शामिल हैं। मानसून की बारिश खत्म होने के बाद इस सर्वे की शुरुआत की जाएगी। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है और इससे राजस्व में बढ़ोतरी होती है तो इसे पूरे दिल्ली क्षेत्र में लागू किया जाएगा।
दरअसल, एमसीडी लंबे समय से संपत्ति कर के दायरे को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। निगम का मानना है कि दिल्ली में कई ऐसी संपत्तियां हैं, जो अभी तक टैक्स नेटवर्क से बाहर हैं। इन संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाकर निगम अपनी आय बढ़ाना चाहता है।
पिछले वित्त वर्ष में एमसीडी को संपत्ति कर से करीब 3116 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस दौरान 13.52 लाख संपत्ति करदाताओं ने टैक्स जमा किया था। यह आंकड़ा अब तक का सबसे अधिक था। हालांकि, निगम का अनुमान है कि दिल्ली में संपत्ति कर से करीब 4500 करोड़ रुपये तक का राजस्व जुटाया जा सकता है।
एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि नए सर्वे से न केवल टैक्स चोरी करने वालों की पहचान होगी, बल्कि नए करदाताओं को भी संपत्ति कर व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा। इससे निगम की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और दिल्ली में नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
नई तकनीक आधारित यह पहल दिल्ली में संपत्ति कर व्यवस्था को डिजिटल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। निगम को उम्मीद है कि कैमरों और 3D मैपिंग के जरिए वास्तविक संपत्तियों की जानकारी मिलने से टैक्स संग्रह में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।





