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Delhi प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय राजधानी लौट आए। सुप्रीम कोर्ट के सरकार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाज़त देने और लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली पुलिस ने 200 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया। तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े नेताओं को "एक साल तक अच्छे व्यवहार का शांति बॉन्ड" भरने के बाद हिरासत से रिहा कर दिया गया।
अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को 50,000 रुपये का ज़मानत बॉन्ड जमा करने के बाद एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश पर रिहा किया गया। दिपके, जो शनिवार को अपनी दादी के निधन के बाद महाराष्ट्र चले गए थे, ने रिहाई की शर्तों की व्याख्या पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई अंडरटेकिंग साइन नहीं किया था जो उन्हें प्रदर्शन करने या जारी रखने से रोकता हो।
इसके बाद दास ने घोषणा की कि CJP सड़कों पर लौटेगी। दास ने इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी के साथ कहा, "सभी को सड़कों पर आना चाहिए। राज्य अपने नागरिकों के खिलाफ़ युद्ध कर रहा है।" राठी को रविवार तड़के उनके गुरुग्राम स्थित घर से हिरासत में लेने के बाद रिहा किया गया था। दिल्ली भर में पुलिस ने 200 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें से ज़्यादातर कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर जाने वाले रास्तों पर थे। सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती के बीच, प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाली सड़कें - जिनमें अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोलचक्कर, टॉल्स्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग, रेल भवन गोलचक्कर, पटेल चौक और गोल डाक खाना शामिल हैं - वाहनों और पैदल चलने वालों के लिए बंद रहीं।
हिरासत में लेने की पहली घटना दोपहर करीब 12.30 बजे हुई, जब लेफ्ट फ्रंट के सांसद - जिनमें राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कार्यकर्ता शामिल थे - जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। CPI(M) द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पुलिसकर्मी ब्रिटास को उठाते हुए और फिर उन्हें बस की सीढ़ियों पर गिरते हुए दिखाया गया। बाद में छाती में चोट की आशंका के चलते उन्हें जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। ब्रिटास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर पुलिस की कथित बर्बरता की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
दिन में बाद में, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्यों ने मध्य दिल्ली के RK आश्रम से मार्च करने की कोशिश की, लेकिन जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही उन्हें रोक दिया गया। AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। विरोध प्रदर्शनों को कवर कर रहे कई पत्रकारों को भी प्रेस पहचान पत्र दिखाने के बावजूद हिरासत में लिया गया; इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
मध्य दिल्ली में कई जगहों पर अचानक हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान SFI, AISA और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) जैसे संगठनों के सदस्यों और CJP समर्थकों को हिरासत में लिया गया। SFI ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को तय विरोध स्थल तक पहुंचने से रोकने के दौरान उन पर हमला किया, जिससे कई लोग घायल हो गए। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने शनिवार की घटनाओं के सिलसिले में 20 से ज़्यादा FIR दर्ज कीं। ये सभी अज्ञात लोगों के खिलाफ थीं और इनमें पुलिसकर्मियों पर हमले और सरकारी कर्मचारियों को उनके काम में बाधा डालने का आरोप लगाया गया।
पुलिस ने एक बयान में कहा कि CJP नेताओं - दिपके, रंका और दास - को 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और नेताओं को रविवार को दिल्ली कैंट स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। बयान में कहा गया, "अदालत ने एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के लिए 50,000 रुपये का ज़मानत बॉन्ड स्वीकार किया, जिसके बाद तीनों नेताओं को रिहा कर दिया गया।" पुलिस ने सिविक सेंटर के पास प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के वायरल वीडियो के सिलसिले में चार लोगों को भी गिरफ्तार किया। CJP द्वारा X पर शेयर किए गए इस वीडियो में आरोप लगाया गया कि पुलिस की मौजूदगी में एक युवती की पिटाई की गई; वीडियो में पिटाई करने वालों को "BJP-RSS के गुंडे" बताया गया।
सूत्रों ने बताया कि इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद, एक महिला से जुड़े पुराने मामले में CJP नेताओं को नए नोटिस जारी किए। यह मामला महिला की तस्वीरों को मॉर्फ करके आपत्तिजनक तस्वीरें बनाने और उन्हें ऑनलाइन फैलाने के आरोपों से जुड़ा है। कोर्ट ने पहले महिला की याचिका पर CJP नेताओं को नोटिस जारी किए थे और पुलिस को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। उनकी रिहाई ऐसे समय में हुई जब दादी की मौत के बाद डिपके के तुरंत महाराष्ट्र न जा पाने को लेकर विवाद चल रहा था। उनके परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें ठीक से जानकारी नहीं दी और उनकी रिहाई में देरी की, जिससे वे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए। इसके जवाब में, दिल्ली पुलिस ने रविवार को एक वीडियो जारी किया जिसमें अधिकारी डिपके को मौत की खबर देते और मदद की पेशकश करते दिख रहे हैं। इसमें यात्रा का इंतज़ाम और परिवार के सदस्यों से बातचीत में मदद शामिल थी। पुलिस ने कहा कि उन्होंने मदद लेने से इनकार कर दिया।
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