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कंगना के नाम और आवाज के दुरुपयोग पर अदालत सख्त

Kavita2
12 Oct 2026 11:36 AM IST
कंगना के नाम और आवाज के दुरुपयोग पर अदालत सख्त
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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत को उनके व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) के संरक्षण के मामले में अंतरिम राहत दी है। अदालत ने उनके नाम, तस्वीर, आवाज और अन्य निजी विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इस आदेश के दायरे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार डीपफेक वीडियो, छेड़छाड़ किए गए वीडियो और उनके नाम से बनाए गए कथित फर्जी भाषण भी शामिल हैं।

न्यायमूर्ति विकास महाजन ने 8 अक्टूबर को दिए आदेश में मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक को निर्देश दिया कि कंगना रनौत की ओर से उल्लंघनकारी बताए गए कंटेंट को आदेश की प्रति मिलने के 72 घंटे के भीतर हटाया जाए और स्थायी रूप से डिलीट किया जाए। इस आदेश का उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके नाम और पहचान के कथित दुरुपयोग को रोकना है।

यह आदेश डिजिटल युग में सार्वजनिक हस्तियों की पहचान, प्रतिष्ठा और उनके व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोशल मीडिया और AI तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा या वीडियो बदलकर ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है, जिससे दर्शकों को वास्तविकता को लेकर भ्रम हो सकता है।

नाम, तस्वीर और आवाज के दुरुपयोग पर रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने कंगना रनौत के व्यक्तित्व अधिकारों को अंतरिम सुरक्षा देते हुए उनके नाम, तस्वीर, आवाज और दूसरी निजी विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाई है। ऐसे अधिकार किसी व्यक्ति की पहचान और उससे जुड़ी विशेषताओं के व्यावसायिक या अन्य अनधिकृत इस्तेमाल के मामलों में महत्वपूर्ण होते हैं।

किसी सार्वजनिक हस्ती की पहचान का इस्तेमाल करके सामग्री तैयार करना अपने आप में हर परिस्थिति में गैरकानूनी नहीं माना जाता। हालांकि, जब किसी व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग करके भ्रामक, छेड़छाड़ की गई या कथित तौर पर उल्लंघनकारी सामग्री प्रसारित की जाती है, तो इससे उसके अधिकारों और प्रतिष्ठा पर सवाल उठ सकते हैं।

इस मामले में अदालत ने कंगना रनौत को अंतरिम राहत दी है। इसका मतलब है कि मुकदमे के अंतिम निपटारे से पहले उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए आदेश जारी किया गया है। मामले में अंतिम निर्णय और व्यापक कानूनी निष्कर्ष आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।

AI डीपफेक और फर्जी भाषण भी आदेश के दायरे में

हाई कोर्ट के आदेश में AI से तैयार डीपफेक, छेड़छाड़ किए गए वीडियो और बनावटी भाषण जैसी सामग्री का भी उल्लेख है। डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति का चेहरा या आवाज दूसरे वीडियो अथवा ऑडियो में इस तरह जोड़ी जा सकती है कि सामग्री देखने या सुनने वालों को वह वास्तविक लग सकती है।

ऐसी तकनीक का इस्तेमाल मनोरंजन, रचनात्मक कार्य या व्यंग्य के लिए भी किया जा सकता है। लेकिन जब किसी व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल उसकी अनुमति के बिना भ्रामक सामग्री तैयार करने या फैलाने के लिए किया जाता है, तो कानूनी विवाद पैदा हो सकता है।

कंगना रनौत के मामले में अदालत का निर्देश ऐसे कंटेंट पर केंद्रित है, जिसे उनके पक्ष ने कथित तौर पर अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताया। इस आदेश से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके नाम और पहचान के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है।

मेटा को 72 घंटे में कंटेंट हटाने का निर्देश

न्यायमूर्ति विकास महाजन के 8 अक्टूबर के आदेश के अनुसार, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक को कंगना रनौत द्वारा बताए गए कथित उल्लंघनकारी कंटेंट को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 72 घंटे के भीतर हटाना और स्थायी रूप से डिलीट करना होगा।

मेटा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम का संचालन करने वाली कंपनी है। ऑनलाइन सामग्री से जुड़े मामलों में प्लेटफॉर्म की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उपयोगकर्ता अपनी पोस्ट, वीडियो और दूसरी सामग्री इन्हीं माध्यमों पर प्रकाशित करते हैं।

इस आदेश के तहत जिन सामग्रियों को हटाने के लिए कहा गया है, वे कंगना रनौत की ओर से कथित तौर पर उल्लंघनकारी बताई गई हैं। आदेश की शर्तों और दायरे के अनुसार कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित प्लेटफॉर्म पर होगी।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हटाए जाने वाले कंटेंट की कुल संख्या, संबंधित खातों की पहचान या यह विवरण नहीं दिया गया है कि आदेश के बाद कितनी सामग्री वास्तव में हटाई गई। इसलिए आदेश जारी होने और उसके अनुपालन की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।

डिजिटल युग में व्यक्तित्व अधिकारों का महत्व

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और AI तकनीक के विस्तार के साथ किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और नाम का इस्तेमाल करके डिजिटल सामग्री तैयार करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। ऐसे में व्यक्तित्व अधिकार सार्वजनिक हस्तियों के साथ-साथ अन्य व्यक्तियों की पहचान और प्रतिष्ठा की सुरक्षा से भी जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।

कंगना रनौत को मिली अंतरिम राहत इस संदर्भ में चर्चा का विषय है। अदालत ने उनके नाम और अन्य निजी विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए कथित उल्लंघनकारी सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है।

इस मामले में अदालत का आदेश यह रेखांकित करता है कि डिजिटल मंचों पर सामग्री के प्रसार के दौरान व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े दावों को कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया जा सकता है। हालांकि, हर मामले में सामग्री की प्रकृति, उसके इस्तेमाल का उद्देश्य और संबंधित कानूनी परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

आदेश के अनुपालन पर रहेगी नजर

दिल्ली हाई कोर्ट से मिली अंतरिम सुरक्षा के बाद अब मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक की ओर से आदेश के अनुपालन पर नजर रहेगी। अदालत ने कंगना रनौत द्वारा बताए गए कथित उल्लंघनकारी कंटेंट को हटाने और स्थायी रूप से डिलीट करने के लिए 72 घंटे की समयसीमा निर्धारित की है।

यह मामला AI से बनाए गए डीपफेक, छेड़छाड़ किए गए वीडियो और फर्जी भाषणों से जुड़े कानूनी सवालों को भी सामने लाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी व्यक्ति की पहचान का अनधिकृत इस्तेमाल किस सीमा तक स्वीकार्य है, यह सामग्री और मामले की परिस्थितियों के आधार पर तय होता है।

फिलहाल हाई कोर्ट ने कंगना रनौत के व्यक्तित्व अधिकारों को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। मामले में आगे की सुनवाई और आदेश के अनुपालन से संबंधित जानकारी आने पर इसकी अगली स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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