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200 करोड़ केस में जैकलीन को राहत कोर्ट ने खारिज की अर्जी
Ratna Netam
22 Sept 2026 9:19 PM IST

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नई दिल्ली। कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपये के उगाही मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज को आरोपी के तौर पर समन करने की मांग से जुड़ी अर्जी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह अर्जी आरोपी नवास कक्कट की ओर से दायर की गई थी। कक्कट को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत डिपोर्ट किया गया था और दिल्ली पुलिस के मुताबिक वह सुकेश चंद्रशेखर का कथित करीबी सहयोगी रहा है।यह मामला महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी MCOCA के तहत चल रहे कथित 200 करोड़ रुपये के उगाही केस से संबंधित है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस MCOCA केस में जैकलीन फर्नांडीज को दिल्ली पुलिस ने आरोपी नहीं बनाया है। दूसरी ओर इसी कथित अपराध की आय से जुड़े अलग PMLA मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय ने जैकलीन को आरोपी बनाया है। इसलिए दोनों कार्यवाहियों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पिंकी ईरानी के बयान पर आधारित थी दलील
कक्कट की ओर से दायर अर्जी में जैकलीन फर्नांडीज के साथ फैशन डिजाइनर लीपाक्षी एलावादी को भी MCOCA मामले में आरोपी बनाए जाने और समन करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इससे पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से इस आवेदन पर जवाब मांगा था।अर्जी में मुख्य रूप से सह-आरोपी पिंकी ईरानी और मामले की जांच के दौरान सामने आए लेनदेन का उल्लेख किया गया था। कक्कट की तरफ से यह सवाल उठाया गया कि अगर कथित अपराध की आय से बॉलीवुड हस्तियों के लिए महंगे गिफ्ट और दूसरी वस्तुएं खरीदी गईं तो उन लाभार्थियों की भूमिका पर भी विचार किया जाना चाहिए।अदालत ने उपलब्ध सामग्री पर विचार करते हुए जैकलीन को समन करने के लिए इसे पर्याप्त आधार नहीं माना।
कौन है नवास कक्कट?
नवास कक्कट को जांच एजेंसियां सुकेश चंद्रशेखर का कथित सहयोगी बताती हैं। उसे UAE से डिपोर्ट किए जाने के बाद उसके खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई थी।दिल्ली पुलिस का आरोप है कि कक्कट कथित अपराध से हासिल रकम को अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर और लेयर करने में शामिल था। अभियोजन के मुताबिक उसने कथित अपराध की आय को विभिन्न खातों के जरिए भेजने और महंगी वस्तुओं की खरीद के भुगतान की व्यवस्था करने में भूमिका निभाई। ये अभियोजन के आरोप हैं, जिन पर मुकदमे में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कक्कट के खिलाफ कोर्ट ने तय किए आरोप
इसी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज गगनदीप सिंह ने कक्कट के खिलाफ MCOCA की धारा 3(2), 3(3) और 3(4) सहित भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, जबरन वसूली, धोखाधड़ी और धमकी से जुड़ी धाराओं के तहत आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री पाई थी।अदालत ने रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया था। आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं है और कक्कट के खिलाफ आरोपों का अंतिम फैसला ट्रायल के बाद होगा।
जैकलीन को लेकर क्या थी अर्जी में दलील?
कक्कट के वकीलों ने अदालत के सामने तर्क दिया था कि जांच एजेंसी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट के अनुसार कथित अपराध की आय का इस्तेमाल महंगे गिफ्ट और दूसरी वस्तुओं को खरीदने के लिए किया गया।पुलिस के मुताबिक कक्कट ने पिंकी ईरानी के माध्यम से बॉलीवुड हस्तियों के लिए गिफ्ट खरीदने के भुगतान की व्यवस्था की थी। कुछ रकम पिंकी ईरानी और लीपाक्षी एलावादी को ट्रांसफर किए जाने का भी आरोप है।इसी आधार पर बचाव पक्ष ने सवाल किया था कि अगर कक्कट के खिलाफ इन लेनदेन के आधार पर कार्रवाई की जा रही है तो कथित रूप से लाभ पाने वाले दूसरे लोगों की भूमिका पर भी विचार होना चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने किया था मांग का विरोध
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की तरफ से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अखंड प्रताप सिंह ने कक्कट की अर्जी का विरोध किया था। वहीं आरोपी कक्कट की ओर से अधिवक्ता नवीन मल्होत्रा और ऋत्विक मल्होत्रा ने पक्ष रखा।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आवेदन पर आदेश सुरक्षित रखा था।
जैकलीन का PMLA केस है अलग
यहां यह समझना जरूरी है कि सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े मामलों में जैकलीन फर्नांडीज की कानूनी स्थिति अलग-अलग केस में अलग है।दिल्ली पुलिस के MCOCA और उगाही के मूल मामले में जैकलीन को अभियोजन गवाह के तौर पर पेश किया गया था। दिल्ली हाई कोर्ट के जुलाई 2025 के फैसले में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में उन्हें अभियोजन गवाह बनाया गया था।वहीं ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की अलग कार्यवाही में जैकलीन को आरोपी बनाया। ED का आरोप है कि उन्हें सुकेश से कथित अपराध की आय से खरीदे गए महंगे गिफ्ट मिले। जैकलीन ने इन आरोपों का विरोध किया है और उनका पक्ष रहा है कि उन्हें कथित उगाही के अपराध की जानकारी नहीं थी।
दिल्ली हाई कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
जुलाई 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने जैकलीन की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने ED की ECIR और मनी लॉन्ड्रिंग की सप्लीमेंट्री शिकायत को रद्द करने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि मामले से जुड़े तथ्यों का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाएगा।बाद में मई 2026 में दिल्ली की अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैकलीन सहित आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। जैकलीन ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 25 जून 2026 को उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कानून के अनुसार उपलब्ध उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।
क्या है 200 करोड़ रुपये का मामला?
यह मामला कारोबारी शिविंदर मोहन सिंह की पत्नी अदिति सिंह की शिकायत से जुड़ा है। अगस्त 2021 में उन्होंने आरोप लगाया था कि खुद को केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के रूप में पेश करने वाले लोगों ने उनसे करीब 200 करोड़ रुपये की उगाही की। जांच में सुकेश चंद्रशेखर और उसके कथित सहयोगियों का नाम सामने आया।जांच एजेंसियों का आरोप है कि सुकेश ने जेल में रहते हुए तकनीक और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर कथित अपराध को अंजाम दिया और रकम को अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर कराया। इन आरोपों पर विभिन्न अदालतों में अलग-अलग कार्यवाहियां जारी हैं।
जैकलीन को MCOCA केस में समन नहीं
ताजा आदेश का सीधा अर्थ यह है कि कक्कट की ओर से जैकलीन फर्नांडीज को MCOCA उगाही मामले में आरोपी बनाकर समन करने की कोशिश को अदालत से मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि इससे जैकलीन के खिलाफ चल रहा अलग ED मनी लॉन्ड्रिंग मामला समाप्त नहीं होता।इस पूरे प्रकरण में एक तरफ मूल उगाही और MCOCA का मामला है, जबकि दूसरी तरफ कथित अपराध की आय से संबंधित PMLA मामला है। अदालतों में दोनों मामलों की अलग-अलग कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
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