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सौरव दास की पुरानी पोस्ट पर विवाद, उमर खालिद को लेकर बयान पर BJP ने साधा निशाना

नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास की एक पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस पोस्ट में दास ने जेल में बंद छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद को लेकर कथित तौर पर प्रशंसा की थी। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस पोस्ट का हवाला देते हुए दास और छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़े लोगों पर सवाल उठाए हैं।
मामला उस समय चर्चा में आया जब दिल्ली में हालिया छात्र विरोध प्रदर्शनों और उनसे जुड़े नेताओं पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को दास की पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र करते हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े लोगों पर निशाना साधा।
पुरानी पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, सौरव दास की पुरानी पोस्ट में उन्होंने उमर खालिद को लेकर सम्मान व्यक्त किया था। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। आलोचकों ने इस पोस्ट को लेकर सवाल उठाए और दास के विचारों पर टिप्पणी की।
उमर खालिद को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया था और वह इस मामले में जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ जांच एजेंसियों ने विभिन्न आरोप लगाए हैं, जबकि खालिद और उनके समर्थक आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
दास की पुरानी पोस्ट को लेकर भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग ऐसे व्यक्तियों का समर्थन कर रहे हैं, जिन पर गंभीर मामलों में आरोप लगे हैं। वहीं, दास की ओर से इस मामले में अपनी स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
राजीव चंद्रशेखर ने उठाए सवाल
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने दिल्ली में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में सौरव दास की पुरानी पोस्ट का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े लोगों और उनके समर्थकों की विचारधारा को समझना जरूरी है।
भाजपा नेता ने विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग ऐसे व्यक्तियों के समर्थन में खड़े होते हैं, जिनकी भूमिका और गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच इस मुद्दे ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्र सुरक्षा जैसे विषयों पर बहस को तेज कर दिया है।
उमर खालिद मामला क्या है?
उमर खालिद को वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की थी। यह मामला लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन है।
खालिद के समर्थकों का कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक दबाव का परिणाम है, जबकि जांच एजेंसियां अपने आरोपों पर कायम रही हैं। अदालतों में मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक टकराव
देश में छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़े संगठनों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अक्सर मतभेद देखने को मिलते हैं। एक पक्ष जहां इन्हें लोकतांत्रिक विरोध और छात्रों की आवाज बताता है, वहीं दूसरा पक्ष कुछ आंदोलनों से जुड़े लोगों की पृष्ठभूमि और विचारधारा पर सवाल उठाता है।
दिल्ली में हाल के छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद भी इसी तरह की राजनीतिक बहस देखने को मिली है। नेताओं की ओर से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट बनी राजनीतिक मुद्दा
सोशल मीडिया पर वर्षों पुरानी पोस्ट का सामने आना अब राजनीतिक विवादों का एक आम कारण बन गया है। सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की पुरानी टिप्पणियों और पोस्ट को लेकर अक्सर नई बहस शुरू हो जाती है।
सौरव दास की पोस्ट को लेकर भी यही स्थिति बनी है। भाजपा नेताओं ने इसे मुद्दा बनाकर विरोधियों पर हमला बोला है, जबकि आलोचक इस तरह की पुरानी पोस्ट को वर्तमान संदर्भ से जोड़ने पर सवाल उठाते हैं।
आगे की प्रतिक्रिया पर नजर
फिलहाल सौरव दास की पुरानी पोस्ट को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। भाजपा नेताओं के आरोपों के बाद अब नजर इस बात पर है कि CJP या सौरव दास की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाती है या नहीं।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब छात्र आंदोलनों, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में चर्चा चल रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है।





