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PM मोदी का वीडियो हटाने का मामला गरमाया, Meta की ग्लोबल टीम देगी सफाई

Ratna Netam
4 Aug 2026 8:21 PM IST
PM मोदी का वीडियो हटाने का मामला गरमाया, Meta की ग्लोबल टीम देगी सफाई
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दिल्ली :भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) के खिलाफ उठ रहे विभिन्न विवादों को गंभीरता से लेते हुए उसकी वैश्विक टीम को भारत तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 5 और 6 अगस्त को मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक तय की है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक से वीडियो हटने की घटना, बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM), एल्गोरिदम की पारदर्शिता, सत्यापित खातों पर कार्रवाई और भारतीय कानूनों के पालन जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कंपनी से जवाब मांगा जाएगा।
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि मेटा की वैश्विक टीम के साथ होने वाली बैठक में कई गंभीर विषयों पर चर्चा होगी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कंपनी की ओर से किन वरिष्ठ अधिकारियों को भारत भेजा जाएगा, लेकिन सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले पर सख्त कार्रवाई का भरोसा देते हुए फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया था। यह वीडियो कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े हो गए। बाद में मेटा ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए माफी मांगी और वीडियो दोबारा बहाल कर दिया। हालांकि सरकार ने कंपनी के इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और पूरे मामले को गंभीरता से लिया।
सरकार का मानना है कि यदि किसी प्रमुख संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति या सत्यापित खाते की सामग्री हटाई जाती है तो उसके लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और स्पष्ट प्रक्रिया होनी चाहिए। आईटी सचिव ने कहा कि इतनी बड़ी वैश्विक तकनीकी कंपनी के पास ऐसी तकनीकी क्षमता होनी चाहिए जिससे इस तरह की गलतियां न हों।
बैठक में बाल यौन शोषण और उत्पीड़न से संबंधित सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) पहले ही इस मामले में मेटा को नोटिस जारी कर चुका है। आयोग ने मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की थी, जिनमें आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर सशुल्क विज्ञापनों के माध्यम से बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री प्रसारित की जा रही थी।
सरकार मेटा से यह भी जानना चाहती है कि ऐसी आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करने और उसे तुरंत हटाने के लिए कंपनी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार किए गए भ्रामक या हानिकारक कंटेंट की निगरानी और नियंत्रण को लेकर भी कंपनी से विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी।
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि मेटा जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके सिस्टम उसी तरह कार्य करें, जैसा उनसे अपेक्षित है। यदि किसी प्रकार की तकनीकी या एल्गोरिदमिक समस्या सामने आती है तो उसके समाधान की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार यह समझना चाहती है कि आखिर किन कारणों से ऐसी घटनाएं हो रही हैं और उन्हें रोकने के लिए कंपनी की क्या रणनीति है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में मेटा के एल्गोरिदम में संभावित पक्षपात (Algorithmic Bias), कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में कंपनी की भूमिका जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल तकनीकी मंच नहीं हैं, बल्कि उनका प्रभाव समाज, लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ता है। इसलिए भारतीय कानूनों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इस बीच भारतीय जनता पार्टी के सांसद और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने भी सोशल मीडिया कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सरकार-विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी सामग्री को बढ़ावा देते हैं, जबकि महिलाओं और बच्चों से जुड़ी अवैध सामग्री को रोकने में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाते।
दुबे ने यह भी कहा कि संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से सिफारिश की है कि यदि सोशल मीडिया कंपनियां भारतीय कानूनों का पालन नहीं करतीं, तो उन्हें मिलने वाला **'सेफ हार्बर'** संरक्षण वापस लिया जा सकता है। यह कानूनी प्रावधान इंटरनेट मध्यस्थों और सोशल मीडिया कंपनियों को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। यदि यह सुरक्षा समाप्त होती है तो कंपनियों को प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री के लिए सीधे कानूनी जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है।
सरकार और मेटा के बीच होने वाली यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें केवल एक तकनीकी त्रुटि पर चर्चा नहीं होगी, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, डिजिटल सुरक्षा, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे व्यापक मुद्दों पर भविष्य की दिशा तय हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भारत में काम करने वाली सभी वैश्विक डिजिटल कंपनियों को देश के कानूनों और नियामकीय मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा।
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