दिल्ली-एनसीआर

संसद में पहनावे पर विवाद सुष्मिता देव ने ब्रिटास को घेरा

Ratna Netam
12 Aug 2026 4:29 PM IST
संसद में पहनावे पर विवाद सुष्मिता देव ने ब्रिटास को घेरा
x
नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी की सांसद सुष्मिता देव और सीपीआईएम सांसद जॉन ब्रिटास के बीच पहनावे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विशेषाधिकार हनन के नोटिस तक पहुंच गया है। जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया था कि सदन की कार्यवाही के दौरान एक महिला सांसद ने उनके पहनावे को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और उन्हें बार-बार ‘लुंगीवाला’ कहा। इसके बाद ब्रिटास ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। अब भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है। दोनों पक्षों के आरोपों के बाद संसद में मामला और गरमा गया है।
जॉन ब्रिटास ने सोमवार को बिना किसी सांसद का नाम लिए सदन में आरोप लगाया था कि जब वह वैधानिक प्रस्ताव पेश करने की अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, तब एक महिला सांसद ने उनके पहनावे पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बहस और राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी सदस्य के पहनावे या क्षेत्रीय पहचान को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं है। ब्रिटास ने कहा कि उन्हें मलयाली होने पर गर्व है और वह अपनी भाषा, संस्कृति, खान-पान तथा पारंपरिक पहनावे को लेकर सम्मान महसूस करते हैं।
ब्रिटास के आरोपों के बाद बुधवार को वह लुंगी पहनकर संसद पहुंचे। उन्होंने सत्ता पक्ष के खिलाफ नारेबाजी भी की। इस दौरान विपक्षी दलों के अन्य नेताओं ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उनके लुंगी पहनकर संसद पहुंचने को इस विवाद के विरोध के प्रतीक के रूप में देखा गया।
वहीं, भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने संसद के बाहर कहा कि न तो उन्होंने और न ही किसी अन्य सदस्य ने किसी राज्य या समुदाय के पहनावे को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यदि जॉन ब्रिटास को किसी बात से आपत्ति है तो वह व्यक्तिगत रूप से उनसे बातचीत करने के लिए तैयार हैं। सुष्मिता देव की ओर से विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिए जाने के बाद अब यह मामला दोनों सांसदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संसदीय प्रक्रिया का विषय बन गया है।
विवाद को बढ़ता देख राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन में किसी भी सदस्य की सांस्कृतिक और क्षेत्रीय पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए। सभापति ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधताओं से भरी हुई है और सभी सदस्यों को अपने साथी सांसदों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने संबंधित सदस्यों को अपने चैंबर में बातचीत के लिए आमंत्रित भी किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्यसभा में सत्ता पक्ष के नेता जेपी नड्डा ने भी इस विवाद पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार देश के हर राज्य और उसकी सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक पहनावे का भी सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि चूंकि जॉन ब्रिटास की ओर से लगाए गए आरोप सदन के रिकॉर्ड पर आ चुके हैं, इसलिए सुष्मिता देव को भी अपनी बात सदन के रिकॉर्ड पर रखने का अवसर मिलना चाहिए।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सभापति से सुष्मिता देव को अपनी बात रखने का अवसर देने का अनुरोध किया। रिजिजू ने कहा कि यदि एक सदस्य पर आरोप लगाए गए हैं और उनका बयान रिकॉर्ड पर आ चुका है, तो दूसरे सदस्य को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि, सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित हो गई और सुष्मिता देव को तत्काल अपनी बात सदन में रखने का अवसर नहीं मिल सका।
इस बीच, सभापति ने साफ किया कि सदन में अभद्र या अशोभनीय टिप्पणियों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे की क्षेत्रीय पहचान, भाषा और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान किया जाए।
पहनावे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब विशेषाधिकार हनन नोटिस तक पहुंच चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों सांसदों के नोटिस पर संसदीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने सदस्यों के पक्ष को उचित बता रहे हैं और मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
Next Story