दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली में हिरासत को लेकर बढ़ा विवाद, CJP ने अदालत से लगाई गुहार

Kiran
21 Oct 2026 10:46 AM IST
दिल्ली में हिरासत को लेकर बढ़ा विवाद, CJP ने अदालत से लगाई गुहार
x
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इसमें पार्टी ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत पार्टी के नेताओं - सौरव दास और आशुतोष रांका - की हिरासत की अवधि बढ़ा दी गई थी। पार्टी का आरोप है कि इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले उनके 'स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार' का उल्लंघन हुआ है।
पार्टी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मंगलवार को दायर की गई इस रिट याचिका में 19 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जो 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS), 2023 की धारा 126 और 170 के तहत हुई कार्यवाही में पारित किया गया था। पार्टी ने इस मामले में तत्काल सुनवाई (जिसमें रात की सुनवाई भी शामिल है) की मांग की है।
याचिका के मुताबिक, 10 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर हिरासत में लिया गया था। अगले दिन उनके खिलाफ एहतियाती कार्यवाही शुरू की गई और 50,000-50,000 रुपये के बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद, 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय ध्वज के साथ जंतर-मंतर जाने पर उन्हें फिर से हिरासत में ले लिया गया। याचिका में कहा गया है कि 14 अक्टूबर की सुबह, इन दोनों को BNSS की धारा 126 और 170 के तहत गिरफ्तार दिखाया गया और धारा 135(4) के तहत पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोप है कि मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया कि बॉन्ड की अवधि कितनी होगी या उसकी राशि क्या होगी।
हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने को चुनौती देते हुए, CJP की याचिका में कहा गया है कि 16 और 19 अक्टूबर को पेश की गई कई जमानतों (sureties) को SEM कोर्ट ने खारिज कर दिया। ऐसा तब हुआ, जब वेरिफिकेशन रिपोर्ट में फिक्स्ड डिपॉजिट और जमानत देने वालों के पते सही पाए गए थे। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ और लोग भी जमानत देने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्हें अपने दस्तावेज जमा करने का मौका ही नहीं दिया गया। याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के 2018 के एक फैसले ('अलदानिश रेन बनाम स्टेट ऑफ NCT ऑफ दिल्ली') का हवाला दिया गया है। इसमें तर्क दिया गया है कि जब तक जमानत देने वालों (sureties) का वेरिफिकेशन चल रहा हो, तब तक व्यक्ति को 'पर्सनल बॉन्ड' पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, अन्य न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया है कि जमानत को खारिज करना और हिरासत को जारी रखना कानून के खिलाफ है। पार्टी ने मजिस्ट्रेट के हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि मजिस्ट्रेट ने हालात का स्वतंत्र रूप से जायजा लिए बिना, सिर्फ पुलिस की बातों के आधार पर यह आदेश दे दिया। पार्टी का तर्क है कि अधिकारी यह साबित करने में नाकाम रहे कि नेताओं की आजादी पर रोक जारी रखने के लिए सार्वजनिक व्यवस्था को कोई तत्काल खतरा था।
CJP ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की तय जगह के रूप में हटाए जाने (डीनोटिफिकेशन) के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में अलग से चुनौती दी गई है। CJP की लीगल हेड, रत्ना सिंह ने एक बयान में कहा कि दोनों नेताओं को हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे उनके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है। पार्टी ने बताया कि उन्होंने नेताओं की तुरंत रिहाई की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका के अनुसार, यह मामला 21 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
Next Story