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अन्ना हजारे को लेकर दीपके की टिप्पणी पर विवाद अमित मालवीय ने जमकर सुनाया

Ratna Netam
8 Aug 2026 4:30 PM IST
अन्ना हजारे को लेकर दीपके की टिप्पणी पर विवाद अमित मालवीय ने जमकर सुनाया
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नई दिल्ली : सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके के एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। दीपके ने अन्ना हजारे समेत 60 से 70 वर्ष की उम्र के लोगों को राजनीति और सामाजिक आंदोलनों से दूर होकर रिटायर होने की सलाह दी। उन्होंने बुजुर्गों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि युवाओं को अब देश और समाज से जुड़े फैसलों में आगे आना चाहिए। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी के नेता और पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके से अन्ना हजारे और युवाओं से जुड़े मुद्दे पर सवाल पूछा गया था। जवाब में उन्होंने कहा कि अब युवाओं को चीजें अपने हाथ में लेनी चाहिए। उनका कहना था कि जो लोग 60 या 70 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं, उन्हें राजनीति या सामाजिक सक्रियता से रिटायर हो जाना चाहिए। उन्होंने बुजुर्गों को आश्रम में बैठने तक की सलाह दे दी।
दीपके ने कहा कि आज युवाओं और छात्रों के भविष्य का सवाल है, इसलिए उन्हें यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि आगे क्या किया जाना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक बुजुर्ग लोग फैसले लेते रहेंगे। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
दीपके की टिप्पणी पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अभिजीत दीपके के बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए उनकी भाषा और सोच पर सवाल उठाए। मालवीय ने कहा कि अन्ना हजारे जैसे वरिष्ठ व्यक्ति के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल केवल बदतमीजी नहीं है, बल्कि संस्कारों की कमी को भी दिखाता है।
अमित मालवीय ने कहा कि राजनीतिक या सामाजिक मुद्दों पर किसी व्यक्ति से असहमति हो सकती है, लेकिन असहमति व्यक्त करने के लिए भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने दीपके की टिप्पणी को लेकर सवाल उठाया कि जो व्यक्ति अपने से कहीं अधिक उम्र के लोगों के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करता है, उसे यह भी सोचना चाहिए कि उसके अपने माता-पिता की उम्र क्या है। क्या वह उनके लिए भी ऐसी ही भाषा स्वीकार करेगा?
मालवीय ने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन शालीनता और सामाजिक मर्यादा का महत्व भी बना रहना चाहिए। उनके मुताबिक जब किसी बहस में भाषा का स्तर गिरता है तो तर्क की गंभीरता भी प्रभावित होती है।
आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे ने किया था समर्थन
अभिजीत दीपके और अन्ना हजारे का यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ समय पहले अन्ना हजारे ने दीपके के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को समर्थन दिया था। छात्रों के मुद्दों को लेकर हुए इस आंदोलन के दौरान हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में छात्रों के समर्थन में मौन प्रदर्शन किया था। उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास करीब दो घंटे तक विरोध जताया था।
अन्ना हजारे ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छात्रों से जुड़े मुद्दों और प्रदर्शन के दौरान सामने आई हिंसा तथा पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि प्रदर्शनकारियों की नाराजगी को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे मौजूद सामाजिक पीड़ा और अपेक्षाओं को भी समझना चाहिए।
हजारे ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि यदि प्रदर्शनकारियों की मांगों के बीच शिक्षा मंत्री से इस्तीफा देने को कहा जाता है तो इससे सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि सरकार की जवाबदेही और कार्यप्रणाली को लेकर संदेश जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्रों से जुड़े आंदोलन और उसकी मांगों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई थी। अब उसी आंदोलन के दौरान समर्थन देने वाले अन्ना हजारे के खिलाफ अभिजीत दीपके की टिप्पणी ने नया विवाद पैदा कर दिया है।
फिलहाल दीपके के बयान पर भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वहीं, अन्ना हजारे की ओर से इस टिप्पणी पर कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि युवाओं की भूमिका बढ़ाने की बहस को क्या वरिष्ठ लोगों के प्रति सम्मान और मर्यादा बनाए रखते हुए आगे बढ़ाया जा सकता है।
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