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जामिया में बढ़ा विवाद, छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसदों पर FIR

Rajeshwari Nishad
28 Oct 2026 2:55 PM IST
जामिया में बढ़ा विवाद, छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसदों पर FIR
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जामिया: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की प्रमुख मांग स्वीकार करते हुए छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी छात्र आंदोलन खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने संविधान को मंजूरी देने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान परिसर में जबरन प्रवेश, तोड़फोड़ और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी समेत अन्य लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव कराने को तैयार हुआ जामिया प्रशासन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग लंबे समय से उठ रही है। विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए हैं।छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि छात्र अपनी समस्याओं और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से उठा सकें।लगातार विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 26 अक्टूबर को एक लिखित आदेश जारी किया।रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिजवी द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस भी वापस लेने का फैसला किया है।इसके अलावा सुरक्षाकर्मियों के कथित दुर्व्यवहार की जांच के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की गई है।
चुनाव की तारीख तय नहीं होने से नाराज छात्र
विश्वविद्यालय प्रशासन की घोषणा के बावजूद छात्रों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है।प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने केवल संविधान को मंजूरी मिलने के बाद चुनाव कराने का आश्वासन दिया है, जबकि संविधान को कब मंजूरी मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया।छात्रों का तर्क है कि यदि संविधान की मंजूरी की समयसीमा तय नहीं होगी, तो चुनाव की प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक आगे बढ़ सकती है।छात्र प्रतिनिधियों ने मांग की है कि छात्रसंघ का संविधान 20 दिसंबर 2026 तक तैयार कर मंजूर किया जाए। इसके बाद निर्धारित समयसीमा में चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाए।प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने प्रशासन के आदेश में सार्वजनिक माफी मांगने की शर्त पर भी आपत्ति जताई है।उनका कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल छात्रों पर अतिरिक्त शर्तें लगाना उचित नहीं है।
16वें दिन भी जारी रहा विरोध, भूख हड़ताल पर बैठे छात्र
जामिया में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर आंदोलन 12 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ था।शुरुआत में कुछ छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की थी। बाद में अन्य छात्र भी आंदोलन में शामिल होने लगे।27 अक्टूबर को प्रदर्शन अपने 16वें दिन में पहुंच गया। छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक चुनाव की निश्चित समयसीमा घोषित नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि कई प्रदर्शनकारी समझौते के बाद भूख हड़ताल समाप्त कर चुके थे।हालांकि, आंदोलन से जुड़े कुछ छात्रों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं।28 अक्टूबर को भी प्रदर्शन जारी रहने और छात्रों तथा प्रशासन के बीच बातचीत में गतिरोध की खबरें सामने आईं।
कैंपस में तोड़फोड़ का आरोप, विश्वविद्यालय प्रशासन ने जताई नाराजगी
छात्र आंदोलन के बीच जामिया प्रशासन ने परिसर में तोड़फोड़ और जबरन प्रवेश की घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ नकाबपोश लोगों और बाहरी तत्वों ने परिसर में घुसकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
प्रशासन के मुताबिक, कुछ लोग लाठियां लेकर पहुंचे और विभिन्न प्रवेश द्वारों के आसपास तोड़फोड़ की गई।
विश्वविद्यालय
के गेट नंबर 4सी और केंद्रीय मस्जिद के प्रवेश द्वार को नुकसान पहुंचने की बात भी कही गई है।प्रशासन ने इन घटनाओं से संबंधित वीडियो सामने आने का दावा किया है।हालांकि, संबंधित घटनाओं में शामिल व्यक्तियों की पहचान और उनकी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट के समय पुलिस ने नई तोड़फोड़ संबंधी घटना पर शिकायत मिलने की पुष्टि भी नहीं की थी।इसलिए प्रशासन के आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी पर FIR
छात्र आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक नेताओं के प्रवेश को लेकर भी विवाद बढ़ गया है।जामिया प्रशासन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।25 अक्टूबर को जामिया नगर थाने में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इमरान प्रतापगढ़ी ने 21 अक्टूबर को गेट नंबर 4ए का ताला तोड़कर विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश किया था।वहीं, इमरान मसूद पर आरोप है कि उन्होंने 23 अक्टूबर को गफूर नगर के पास सीढ़ी की सहायता से विश्वविद्यालय की चारदीवारी पार की थी।
प्रशासन ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों के प्रवेश से परिसर में तनाव बढ़ा और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।मामले में आपराधिक अतिचार, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है।कुछ रिपोर्टों में समाजवादी पार्टी सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम भी इस विवाद से जुड़ी एफआईआर में सामने आया है।हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।
ऑनलाइन कक्षाएं शुरू, छात्रों की पढ़ाई पर असर
विश्वविद्यालय में लगातार तनाव को देखते हुए प्रशासन ने 24 अक्टूबर से कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का फैसला लिया।इसके साथ ही विश्वविद्यालय के कुछ प्रवेश द्वारों और पुस्तकालयों को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया।प्रशासन ने इस निर्णय के पीछे छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने की आवश्यकता बताई।दूसरी ओर प्रदर्शनकारी छात्रों ने परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने और सुरक्षा बलों की तैनाती का विरोध किया।छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन इन प्रतिबंधों को परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहा है।
अब चुनाव की तारीख पर टिकी सबकी नजर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली को लेकर चल रहा विवाद अब मुख्य रूप से चुनाव की निश्चित समयसीमा पर केंद्रित हो गया है।प्रशासन संविधान को मंजूरी मिलने के बाद चुनाव कराने का आश्वासन दे चुका है, लेकिन छात्रों की मांग है कि संविधान की मंजूरी और मतदान की तारीखों का स्पष्ट कार्यक्रम भी जारी किया जाए।इसी बीच सुरक्षाकर्मियों की भूमिका, छात्रों के खिलाफ कार्रवाई और परिसर में कथित तोड़फोड़ के आरोप भी जांच के विषय बने हुए हैं।
आने वाले दिनों में प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से ही यह स्पष्ट होगा कि आंदोलन कब समाप्त होगा और लगभग दो दशक बाद जामिया में छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी।
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