- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- भारत की परमाणु ताकत...
भारत की परमाणु ताकत में लगातार इजाफा, लंबी दूरी की मिसाइलों से मजबूत हो रही स्ट्राइक क्षमता

नई दिल्ली। भारत की परमाणु क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है। विदेशी वैज्ञानिकों के अनुमानों के मुताबिक भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी परमाणु शक्ति की वास्तविक क्षमता केवल हथियारों की संख्या से तय नहीं होती। परमाणु हथियारों को सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से लक्ष्य तक पहुंचाने वाली प्रणालियां भी रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।
भारत पिछले कुछ वर्षों में अपने परमाणु हथियार ले जाने वाले विभिन्न सिस्टम को लगातार आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें जमीन, समुद्र और हवा से परमाणु क्षमता वाले हथियारों को संचालित करने की क्षमता विकसित करना शामिल है। भारत की रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी नो फर्स्ट यूज (NFU) नीति भी है, जिसके तहत भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर कायम रहने की बात कहता है।
परमाणु क्षमता केवल हथियारों की संख्या तक सीमित नहीं
परमाणु हथियारों की चर्चा में अक्सर किसी देश के पास मौजूद हथियारों की अनुमानित संख्या को आधार बनाया जाता है। लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञों के लिए हथियारों की संख्या के साथ उन्हें तैनात करने, सुरक्षित रखने और लक्ष्य तक पहुंचाने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
भारत ने इसी वजह से अपने परमाणु हथियारों को ले जाने वाले डिलीवरी सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया है। लंबी दूरी की मिसाइलें किसी भी देश की रणनीतिक क्षमता का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। इन प्रणालियों के जरिए किसी देश को दूर स्थित संभावित लक्ष्यों तक हमला करने की क्षमता मिलती है।
जमीन से लेकर समुद्र तक क्षमता विकसित
भारत की रणनीतिक परमाणु क्षमता को आम तौर पर जमीन, हवा और समुद्र आधारित प्रणालियों के संदर्भ में देखा जाता है। जमीन से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें भारत के परमाणु प्रतिरोधक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके अलावा लड़ाकू विमान भी परमाणु हथियार पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले प्लेटफॉर्म का हिस्सा हैं।
समुद्र आधारित क्षमता को रणनीतिक रूप से विशेष महत्व दिया जाता है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां समुद्र में लंबे समय तक छिपकर रहने में सक्षम होती हैं। इससे किसी देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती मिलती है और दूसरे हमले की क्षमता यानी सेकंड-स्ट्राइक क्षमता को विश्वसनीय बनाया जा सकता है।
लंबी दूरी की मिसाइलों पर जोर
भारत लंबे समय से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों के विकास पर काम कर रहा है। देश के रणनीतिक मिसाइल कार्यक्रम में अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों को महत्वपूर्ण माना जाता है। इन प्रणालियों की क्षमता और तकनीक में समय के साथ सुधार किया गया है।
लंबी दूरी की मिसाइलों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के लिए केवल हथियार होना पर्याप्त नहीं है। किसी संभावित विरोधी को यह भरोसा होना चाहिए कि संकट की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की क्षमता मौजूद है। इसी अवधारणा को विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता कहा जाता है।
परमाणु नीति में NFU का महत्व
भारत की परमाणु नीति में नो फर्स्ट यूज यानी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल न करने की नीति महत्वपूर्ण स्थान रखती है। भारत लंबे समय से यह कहता आया है कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल पहले नहीं करेगा, लेकिन परमाणु हमले की स्थिति में प्रभावी जवाब देने की क्षमता बनाए रखेगा।
इस नीति का उद्देश्य परमाणु हथियारों को आक्रामक युद्ध के बजाय प्रतिरोधक क्षमता के रूप में देखना है। भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि परमाणु हथियारों का उद्देश्य देश की सुरक्षा और संभावित परमाणु हमले को रोकने के लिए विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना है।
आधुनिक सिस्टम से बढ़ रही रणनीतिक क्षमता
भारत की परमाणु क्षमता में केवल मिसाइलों की रेंज बढ़ाने पर ही जोर नहीं है। आधुनिक नेविगेशन, संचार, कमांड और नियंत्रण प्रणाली भी रणनीतिक हथियारों की विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
परमाणु हथियारों से जुड़े सिस्टम में सुरक्षा और कमांड एवं कंट्रोल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का निर्णय अत्यंत नियंत्रित व्यवस्था के तहत किया जाता है। इसलिए डिलीवरी सिस्टम के आधुनिकीकरण के साथ कमांड और नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना भी रणनीतिक प्राथमिकता रहती है।
बदलते सुरक्षा माहौल में रणनीतिक तैयारी
भारत की परमाणु नीति और रणनीतिक क्षमता का विकास उसके आसपास के सुरक्षा माहौल से भी जुड़ा है। दक्षिण एशिया में भारत के सामने परमाणु क्षमता रखने वाले पड़ोसी देश मौजूद हैं। ऐसे में भारत अपनी रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को विश्वसनीय बनाए रखने पर जोर देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, परमाणु हथियारों का उद्देश्य युद्ध लड़ना नहीं बल्कि युद्ध को रोकने के लिए प्रतिरोधक क्षमता तैयार करना है। इसी कारण भारत अपने परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले सिस्टम को लगातार आधुनिक बना रहा है।
भारत के पास परमाणु हथियारों की संख्या को लेकर अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय अनुमान मौजूद हैं और करीब 190 हथियारों का आंकड़ा भी ऐसे ही अनुमानों में शामिल है। हालांकि, परमाणु क्षमता का आकलन केवल हथियारों की संख्या से नहीं किया जा सकता। लंबी दूरी की मिसाइलों, समुद्र आधारित प्रणालियों, विमान और आधुनिक कमांड-कंट्रोल व्यवस्था के साथ भारत अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर रहा है। साथ ही नो फर्स्ट यूज की नीति के जरिए भारत अपनी परमाणु रणनीति को मुख्य रूप से विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता के रूप में प्रस्तुत करता है।





