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- वंदे मातरम् विवाद पर...

जम्मू-कश्मीर। वंदे मातरम् को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने मंगलवार को अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय गीत के सभी छह अंतरे गाए जाने का हवाला देते हुए कहा कि उसके सहयोगी दलों को स्वतंत्रता सेनानियों के फैसले और विवेक का सम्मान करना चाहिए।
कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राष्ट्रीय गीत के उसी संस्करण को गाया जाना चाहिए, जिसे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया था ताकि वंदे मातरम् को किसी तरह के सांप्रदायिक विवाद में न घसीटा जाए।
सभी छह अंतरे गाए जाने पर उठी चर्चा
हाल ही में जम्मू-कश्मीर में एक कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला की मौजूदगी थी।
इसके बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आई। पार्टी ने कहा कि वंदे मातरम् का सम्मान सभी को करना चाहिए, लेकिन इसके उस स्वरूप को भी ध्यान में रखना चाहिए जिसे देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वीकार किया गया था।
कांग्रेस ने बताया ऐतिहासिक फैसला
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और उस समय के नेताओं ने काफी विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रीय गीत के एक विशेष संस्करण को अपनाया था। उन्होंने कहा कि उस निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम् को लेकर उस समय जो निर्णय लिया गया था, उसके पीछे देश की विविधता और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखा गया था।
सांप्रदायिक रंग देने से बचाने की बात
कांग्रेस नेता ने कहा कि राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक विवाद से दूर रखने के लिए ही एक विशेष संस्करण अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि आज भी इस गीत को लेकर सांप्रदायिक राजनीति का खतरा बना हुआ है।
उनका कहना था कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान जरूरी है, लेकिन उन्हें राजनीतिक या विभाजनकारी मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
सहयोगी दलों से अपील
कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों से भी अपील की कि वे स्वतंत्रता सेनानियों के फैसले और उस समय की परिस्थितियों को समझते हुए उसी संस्करण का पालन करें जिसे स्वीकार किया गया था।
पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। ऐसे मुद्दों पर इतिहास और संवैधानिक भावना को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व
वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत रहा है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह आंदोलन का प्रमुख नारा बना।
देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने इसका इस्तेमाल लोगों में राष्ट्र भावना जगाने के लिए किया। आज भी इसे देश के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीकों में शामिल किया जाता है।
राजनीतिक बहस तेज
वंदे मातरम् को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है। अलग-अलग राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने नजरिए से देखते रहे हैं।
कांग्रेस के ताजा बयान के बाद एक बार फिर इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। जहां कांग्रेस ने ऐतिहासिक निर्णय और सामाजिक संतुलन का हवाला दिया है, वहीं अन्य दल इस मुद्दे पर अलग राय रख सकते हैं।
राष्ट्रीय प्रतीकों पर सहमति की जरूरत
कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय गीत और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। पार्टी ने जोर दिया कि देश की विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
फिलहाल वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुई यह बहस राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। कांग्रेस के बयान के बाद अब सहयोगी दलों और अन्य राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।





