- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- आकाशवाणी भवन में...

x
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कार्यालय तक INDIA ब्लॉक के मार्च के बाद मंगलवार को राजधानी दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी इलाके में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। आकाशवाणी भवन के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू रहने के बावजूद वहां जमा हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं, इंडियन यूथ कांग्रेस और NSUI के सदस्यों को पुलिस ने हटाने की कोशिश की। कुछ कार्यकर्ताओं के आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश करने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
इससे पहले INDIA ब्लॉक के सांसदों और नेताओं ने संसद मार्ग से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR के विरोध में आयोग तक पहुंचना चाहते थे। हालांकि पुलिस ने मार्च को चुनाव आयोग मुख्यालय से पहले ही रोक दिया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कई विपक्षी सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इसी दौरान राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी पुलिस बैरिकेड पर चढ़ गए। बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कुछ समर्थक आकाशवाणी भवन परिसर की ओर बढ़े। यह परिसर चुनाव आयोग मुख्यालय के काफी नजदीक स्थित है।
घटनाक्रम के बाद आकाशवाणी भवन के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, इंडियन यूथ कांग्रेस और NSUI के सदस्य जमा हो गए। पुलिस अधिकारी ने लाउडस्पीकर के जरिए उन्हें क्षेत्र खाली करने का निर्देश दिया और कहा कि निषेधाज्ञा लागू होने के कारण वहां लोगों का समूह बनाकर खड़ा होना गैर-कानूनी है। पुलिस ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं करने वालों को हिरासत में लिया जाएगा।
इसके बाद पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। अधिकारियों का कहना था कि धारा 163 लागू होने के चलते इलाके में किसी प्रकार की सभा या प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी। केंद्रीय दिल्ली के इस क्षेत्र में पहले से ही पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी ताकि चुनाव आयोग मुख्यालय और आसपास के सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस दौरान चुनाव आयोग और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने और अपना ज्ञापन सौंपने की अनुमति क्यों नहीं दी गई। विपक्ष का कहना था कि वह संवैधानिक संस्था के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहता था, लेकिन पुलिस ने उन्हें निर्धारित स्थान से आगे नहीं बढ़ने दिया।
INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को वापस लेने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं और पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।
फॉर्म-6 को लेकर भी हाल के दिनों में विवाद बढ़ा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म में गलत तरीके से बदलाव किया गया, जबकि चुनाव आयोग ने इस दावे को भ्रामक बताया। आयोग का कहना है कि मूल फॉर्म में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR प्रक्रिया के तहत एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई है।
इस मुद्दे ने चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया है। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक का कहना है कि आयोग को विपक्षी नेताओं के सवालों का जवाब देना चाहिए और उन्हें आयोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि निर्धारित सुरक्षा नियमों और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
मंगलवार को आकाशवाणी भवन के बाहर पुलिस अधिकारी की ओर से बार-बार लोगों को हटने के लिए कहा गया। इसके बावजूद कुछ कार्यकर्ता वहां मौजूद रहे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कहा कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे विरोध की आवाज दबाने की कार्रवाई बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केंद्रीय दिल्ली में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हुई। संसद मार्ग, नीति आयोग कार्यालय, आकाशवाणी भवन और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। कई जगह बैरिकेड लगाए गए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आकाशवाणी भवन परिसर की ओर बढ़ने के बाद स्थिति कुछ समय के लिए और तनावपूर्ण हो गई। कांग्रेस समर्थकों ने नारेबाजी की, जबकि पुलिस ने परिसर और आसपास के क्षेत्रों को खाली कराने की कार्रवाई की। विपक्षी नेताओं ने इसे चुनाव आयोग तक पहुंचने की कोशिश बताया, जबकि पुलिस ने इसे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश और निषेधाज्ञा के उल्लंघन से जोड़ा।
अब इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। INDIA ब्लॉक चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है। वहीं चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहा है। मंगलवार का घटनाक्रम यह संकेत देता है कि मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रह सकता है।
Next Story





