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BRICS डिनर को लेकर कांग्रेस का भाजपा पर बड़ा हमला

Ratna Netam
13 Sept 2026 9:47 PM IST
BRICS डिनर को लेकर कांग्रेस का भाजपा पर बड़ा हमला
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नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन की कूटनीतिक चर्चाओं के बीच अब खाने की थाली को लेकर देश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में आयोजित BRICS गाला डिनर में केवल शाकाहारी व्यंजन परोसे जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा अपनी खान-पान संबंधी पसंद को भारत की विविध खाद्य संस्कृति के रूप में पेश कर रही है। वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर अंतरराष्ट्रीय आयोजन के भोजन को भी राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है।
इस विवाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने कहा कि करीब 80 प्रतिशत भारतीय नॉन-वेज खाते हैं और भारतीय मांसाहारी व्यंजन भी बेहद स्वादिष्ट हैं। इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर पलटवार किया और कहा कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया तथा कांग्रेस खाने को लेकर अनावश्यक राजनीति कर रही है।
आखिर BRICS डिनर में ऐसा क्या था?
BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए गाला डिनर आयोजित किया गया था। इस भोज की खासियत यह थी कि इसका मेन्यू पूरी तरह शाकाहारी रखा गया।
डिनर में भारत के अलग-अलग हिस्सों के स्वाद को पेश करने की कोशिश की गई। रिपोर्टों के अनुसार मेन्यू में खांडवी, मशरूम से तैयार गलौटी, पनीर लबाबदार, गुच्छी से बने व्यंजन, दक्षिण भारतीय स्वाद वाला थक्काली बेले सारू और मिलेट पुलाव जैसे व्यंजन शामिल थे। मिठाइयों में जलेबी, शहतूत फिरनी और फ्रूट क्रीम जैसे विकल्प रखे गए थे।
सरकार और भाजपा की ओर से इसे भारतीय शाकाहारी व्यंजनों की विविधता दुनिया के सामने पेश करने के अवसर के रूप में देखा गया, लेकिन कांग्रेस ने सवाल उठाया कि भारत की भोजन संस्कृति केवल शाकाहारी व्यंजनों तक सीमित नहीं है।
राहुल गांधी ने उठाया ‘80 प्रतिशत’ का मुद्दा
विवाद उस समय और बढ़ गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने BRICS डिनर के शाकाहारी मेन्यू पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि 80 प्रतिशत भारतीय नॉन-वेज खाते हैं और नॉन-वेज खाना भी स्वादिष्ट होता है।
राहुल गांधी की टिप्पणी का राजनीतिक संदेश स्पष्ट था। कांग्रेस यह सवाल उठा रही है कि जब भारत में अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और संस्कृतियों की अपनी विशिष्ट भोजन परंपराएं हैं तो किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन में केवल एक प्रकार की खान-पान परंपरा को भारत की पहचान के रूप में क्यों पेश किया जाए।
कांग्रेस के मुताबिक भारत की विविधता को प्रदर्शित करने वाले ऐसे आयोजन में शाकाहारी के साथ देश की दूसरी भोजन परंपराओं को भी जगह दी जा सकती थी।
पवन खेड़ा बोले—अपनी पसंद थोप रही भाजपा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर भाजपा की और तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब अपनी खान-पान संबंधी पसंद विदेशी मेहमानों पर भी थोप रही है। खेड़ा का कहना था कि भारत की खाद्य संस्कृति बेहद विशाल और विविध है, इसलिए इसे केवल शाकाहारी मेन्यू तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।
कांग्रेस की आपत्ति का केंद्र यह नहीं था कि डिनर में शाकाहारी खाना क्यों रखा गया। पार्टी का तर्क था कि केवल शाकाहारी खाना रखकर भारत की पूरी खाद्य संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने की कोशिश पर सवाल उठता है।
खेड़ा ने सरकार पर देश की नॉन-वेज भोजन संस्कृति को विदेशी मेहमानों के सामने जगह नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे भाजपा की विचारधारा और खान-पान संबंधी प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए आलोचना की।
भाजपा ने किया जोरदार पलटवार
कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद भाजपा भी मैदान में उतर गई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का आनंद लिया।
रिजिजू का कहना था कि भारत की शाकाहारी भोजन परंपरा अपने आप में बेहद समृद्ध है और इसमें स्वाद तथा पोषण की बड़ी विविधता मौजूद है। उन्होंने कांग्रेस पर खाने को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।
भाजपा का तर्क है कि किसी आधिकारिक डिनर में शाकाहारी भोजन परोसने का मतलब भारत की दूसरी खान-पान परंपराओं को नकारना नहीं है। पार्टी नेताओं ने कांग्रेस के हमले को अनावश्यक राजनीतिक विवाद बताया।
भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया राजनीति का आरोप
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की सफलता से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, भू-राजनीतिक तनाव, ग्लोबल साउथ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन विपक्ष डिनर के मेन्यू को राजनीतिक बहस का मुद्दा बना रहा है।
भारत ने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। सम्मेलन में रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और दूसरे सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। BRICS अब दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
ऐसे में भाजपा इसे भारत की कूटनीतिक क्षमता दिखाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बता रही है।
खाने की थाली पर क्यों छिड़ी इतनी बड़ी बहस?
भारत में खान-पान लंबे समय से केवल स्वाद का विषय नहीं रहा है। अलग-अलग राज्यों और समुदायों की भोजन परंपराएं उनकी सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई हैं।
उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारतीय भोजन में जबरदस्त विविधता देखने को मिलती है। कहीं शाकाहारी व्यंजन स्थानीय संस्कृति का प्रमुख हिस्सा हैं तो कहीं मछली, मांस, अंडे और सी-फूड पारंपरिक भोजन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
इसी विविधता के आधार पर कांग्रेस का कहना है कि किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भोजन संस्कृति पेश करते समय उसकी व्यापकता भी दिखाई जानी चाहिए।
दूसरी तरफ भाजपा का तर्क है कि भारतीय शाकाहारी भोजन भी इतना विविध है कि उसके जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की पाक परंपराओं को आसानी से दुनिया के सामने रखा जा सकता है।
सिर्फ खाना नहीं सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व की बहस
BRICS डिनर का विवाद असल में शाकाहारी बनाम मांसाहारी से आगे बढ़कर सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व की बहस बन गया है।
कांग्रेस पूछ रही है कि भारत जैसे विविधता वाले देश की पहचान किसी एक भोजन शैली से क्यों की जाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार की अपनी पसंद देश की सामूहिक पसंद नहीं मानी जा सकती।
भाजपा इसे स्वीकार नहीं करती। पार्टी नेताओं के मुताबिक शाकाहारी मेन्यू रखना एक आयोजन संबंधी फैसला था और इसे देश के नागरिकों की खान-पान की स्वतंत्रता से जोड़ना गलत है।
इस तरह दोनों पक्ष एक ही डिनर को अलग-अलग नजरिए से पेश कर रहे हैं।
पहले से ही BRICS को लेकर कांग्रेस-भाजपा में था विवाद
दिलचस्प बात यह है कि BRICS सम्मेलन शुरू होने से पहले ही कांग्रेस और भाजपा के बीच इसे लेकर राजनीतिक टकराव हो चुका था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया था कि BRICS, SCO, G20 और QUAD जैसे मंचों से भारत को वास्तविक और ठोस रूप से क्या लाभ मिला है। भाजपा ने उनके बयान पर तीखा पलटवार किया था।
हालांकि कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर एक जैसी राय भी नहीं दिखाई दी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी को भारत के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसे देश की कूटनीतिक क्षमता का प्रदर्शन कहा था।
अब गाला डिनर के मेन्यू को लेकर नया विवाद सामने आने से BRICS की घरेलू राजनीतिक चर्चा एक अलग दिशा में चली गई है।
क्या था सम्मेलन का असली एजेंडा?
खाने पर राजनीतिक विवाद के बावजूद BRICS सम्मेलन का मुख्य एजेंडा कहीं व्यापक था। इसमें भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक सप्लाई चेन, आर्थिक सहयोग, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद साझा घोषणा पर सहमति बनना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा गया।
अब ‘वेज बनाम नॉन-वेज’ पर सियासी जंग
BRICS सम्मेलन खत्म होने के बाद अब इसकी कूटनीतिक उपलब्धियों के साथ गाला डिनर की थाली भी चर्चा में आ गई है। राहुल गांधी के ‘80 प्रतिशत भारतीय नॉन-वेज खाते हैं’ वाले बयान और पवन खेड़ा के भाजपा पर अपनी पसंद थोपने के आरोप ने विवाद को हवा दी है।
भाजपा ने साफ किया है कि विदेशी मेहमानों को परोसा गया भारतीय शाकाहारी भोजन स्वाद और विविधता से भरपूर था और मेहमानों ने इसका आनंद लिया। कांग्रेस दूसरी ओर सवाल कर रही है कि भारत की पूरी खाद्य संस्कृति को दिखाने के मौके पर नॉन-वेज परंपराओं को जगह क्यों नहीं मिली।
इसलिए विवाद केवल इस बात पर नहीं है कि मेहमानों ने क्या खाया। राजनीतिक बहस अब इस सवाल पर पहुंच गई है कि दुनिया के सामने भारत की सांस्कृतिक और खान-पान की विविधता को किस तरह पेश किया जाना चाहिए। BRICS की बड़ी कूटनीतिक मेज पर शुरू हुई चर्चा अब देश की राजनीतिक थाली तक पहुंच चुकी है।
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