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कांग्रेस अब दिशाहीन हो गई है किरेन रिजिजू का बड़ा बयान
Ratna Netam
12 Oct 2026 6:01 PM IST

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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार को INDIA गठबंधन के नेताओं ने कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के उद्देश्य से मार्च निकाला। इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को दिशाहीन बताते हुए उसके नेतृत्व पर सवाल उठाए। रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों का सार्वजनिक रूप से अपमान करना निंदनीय है।केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विपक्ष के प्रदर्शन और कांग्रेस नेतृत्व को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति सुधारने के लिए परिपक्व और समर्पित नेतृत्व की आवश्यकता है। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया, जब INDIA गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
कांग्रेस को दिशाहीन बताकर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि कांग्रेस पार्टी अब दिशाहीन हो गई है।रिजिजू ने लिखा, "कांग्रेस पार्टी अब दिशाहीन हो गई है। लेकिन अगर उन्हें कोई परिपक्व और समर्पित नेता मिल जाए, जिसे साल में 200 छुट्टियां मनाने में मजा न आता हो, तो वे अपनी संख्या में सुधार कर सकते हैं।"उनकी इस टिप्पणी को कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, छुट्टियों की संख्या को लेकर किया गया दावा रिजिजू की राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी में इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।रिजिजू ने अपने बयान के माध्यम से कांग्रेस के संगठनात्मक नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए।
विरोध प्रदर्शन को बताया नागरिकों का अधिकार
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है।उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।हालांकि, रिजिजू ने संवैधानिक अधिकारियों के प्रति इस्तेमाल की जाने वाली भाषा और सार्वजनिक टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।उन्होंने एक्स पर लिखा, "संवैधानिक अधिकारियों का खुलेआम अपमान करना निंदनीय है।"उनका यह बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की कार्रवाई की मांग के संदर्भ में आया।रिजिजू ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार को स्वीकार करते हुए संवैधानिक पदों के सम्मान का मुद्दा उठाया।
SIR के खिलाफ INDIA गठबंधन का मार्च
सोमवार को INDIA गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां हुई हैं।उनका कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।इन्हीं आरोपों को लेकर गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए मार्च निकाला।विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को अभी न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग
INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।उनका कहना है कि मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इसी मुद्दे पर विपक्षी दल न्यायिक हस्तक्षेप चाहते हैं।
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संवैधानिक अधिकारियों के सार्वजनिक अपमान को अनुचित बताया।इस प्रकार एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठा रहा है, जबकि दूसरी ओर रिजिजू ने विरोध प्रदर्शन के दौरान संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च को लेकर राजनीतिक हलचल
विपक्षी गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने से सोमवार को राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं।INDIA गठबंधन के नेता एसआईआर से जुड़े आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाना चाहते थे।इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी प्रमुखता से सामने आईविपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।वहीं, रिजिजू ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के तरीके और संवैधानिक अधिकारियों को लेकर की जा रही टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।उपलब्ध विवरण में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के किसी अंतिम न्यायिक निर्णय का उल्लेख नहीं है।
कांग्रेस नेतृत्व पर रिजिजू का तंज
केंद्रीय मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में केवल विरोध प्रदर्शन का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि कांग्रेस के नेतृत्व को भी निशाने पर लिया।उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को कोई परिपक्व और समर्पित नेता मिल जाए, तो पार्टी अपनी संख्या में सुधार कर सकती है।रिजिजू की यह टिप्पणी कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को लेकर उनका अपना आकलन है।उन्होंने नेतृत्व की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए छुट्टियों का भी उल्लेख किया।हालांकि, इस बयान में किसी विशिष्ट नेता का नाम नहीं लिया गया है।रिजिजू के इस राजनीतिक कटाक्ष को कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग को लेकर जारी है मतभेद
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच मतभेद सामने आए हैं।विपक्षी दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।वहीं, केंद्रीय मंत्री ने संवैधानिक अधिकारियों के प्रति विपक्षी नेताओं के रवैये की आलोचना की है।मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।इसका उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड को अद्यतन रखना और निर्धारित नियमों के अनुसार आवश्यक सुधार करना होता है।ऐसी प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और नियमों का पालन महत्वपूर्ण होता है।वर्तमान विवाद इसी प्रक्रिया की निष्पक्षता और उसके संचालन से जुड़े आरोपों पर केंद्रित है।
लोकतांत्रिक अधिकार और संवैधानिक सम्मान पर चर्चा
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान के विषय को चर्चा में ला दिया है।लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और राजनीतिक दलों को कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है।इसके साथ ही संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों पर सवाल उठाना और कानूनी चुनौती देना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।रिजिजू ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार को स्वीकार किया, लेकिन अधिकारियों के सार्वजनिक अपमान पर आपत्ति जताई।दूसरी ओर, विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी शिकायतें सामने रखीं।दोनों पक्षों के बयानों से एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक मतभेद स्पष्ट होते हैं।
आगे की कार्रवाई पर रहेगी नजर
INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया के बाद एसआईआर का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है।विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि रिजिजू ने कांग्रेस को दिशाहीन बताते हुए उसके नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।अब इस मामले में विपक्ष की याचिका से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।फिलहाल दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही चाहता है, जबकि केंद्रीय मंत्री ने संवैधानिक अधिकारियों के प्रति सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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