दिल्ली-एनसीआर

एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस ने जताई चिंता, आयोग से जवाब तलब

Admindelhi1
23 Sept 2026 3:45 PM IST
एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस ने जताई चिंता, आयोग से जवाब तलब
x
एसआईआर को लेकर खरगे ने चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर बार-बार आपत्ति दर्ज कराए जाने की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि कांग्रेस और कई विपक्षी दल पिछले कई वर्षों से चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब इन मुद्दों को उठाया गया तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। अब चुनाव आयोग के भीतर से सामने आई जानकारी में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 14 बार आपत्ति दर्ज कराने की बात सामने आई है। खरगे ने फॉर्म-6 में बदलाव, सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल, मतदाता सूची और चुनाव आयोग के फैसलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13.8 करोड़ नाम बाहर हुए हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि मतदाता सूची में कथित ‘वोट चोरी’ भारतीय नागरिकों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला है। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने इसमें भूमिका निभाई है। इस मामले में न्याय होना चाहिए।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि एक व्यक्ति अन्य संवैधानिक अधिकारियों को दरकिनार कर ऐसे फैसले ले सकता है, जिनसे मतदाता सूची प्रभावित होती है, तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे प्रभावित करने की किसी भी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एसआईआर से जुड़े फैसलों की वैधानिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि एसआईआर से संबंधित फैसले तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए हैं, जबकि आयोग को सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर निर्णय लेने होते हैं तो ऐसे फैसलों और पूरी एसआईआर प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठता है। अब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने इन सवालों का जवाब देने की चुनौती है।

उल्लेखनीय है कि एक अंग्रेजी अखबार की 23 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, एसआईआर से जुड़े मामलों में अपील दाखिल करने तथा मतदाता सूची के डाटाबेस की सुरक्षा और उसके संचालन से जुड़े मुद्दों पर थीं।

Next Story