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राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी पर कांग्रेस हमलावर, जांच की मांग तेज
Ratna Netam
3 Nov 2026 4:39 PM IST

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नई दिल्ली। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे और चढ़ावे में कथित चोरी का मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर इस प्रकरण को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मंदिर में प्राप्त दान की राशि, कीमती वस्तुओं और वित्तीय लेनदेन में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की थी।जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी धनराशि के मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के बजाय जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज, संदिग्ध गतिविधियों और संबंधित कर्मचारियों के बारे में जानकारी सामने आ चुकी थी, तो प्राथमिकी दर्ज करने में 21 दिन क्यों लगे। उनके अनुसार, इस देरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके बड़ी जिम्मेदारियों से ध्यान हटाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर सवाल उठाए। हालांकि, कांग्रेस के ये आरोप राजनीतिक दावे हैं और किसी अदालत ने सरकार या शीर्ष नेताओं की संलिप्तता स्थापित नहीं की है।जयराम रमेश ने मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के कुछ महीने बाद ही नवंबर 2020 में एक निजी ऑडिट कंपनी ने आंतरिक लेखापरीक्षा और जोखिम प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि उन सुझावों पर किस स्तर तक अमल किया गया और यदि वित्तीय निगरानी की व्यवस्था मजबूत थी, तो कथित चोरी की घटनाएं कैसे हुईं।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 2020 से अब तक मंदिर के लिए प्राप्त दान, मूल्यवान वस्तुओं, ऑडिट रिपोर्ट, जमीन से जुड़े लेनदेन और निर्माण कार्यों के भुगतान का व्यापक परीक्षण किया जाए। कांग्रेस के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा आस्था के साथ दी गई राशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा विषय है।इस मामले में कांग्रेस ने मंदिर परिसर में कथित तौर पर बार-बार हुई चोरी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए भी सवाल उठाए थे। रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में दान की राशि से संबंधित 105 संदिग्ध घटनाएं सामने आने की जानकारी दी गई। जयराम रमेश ने इस आधार पर पूछा कि इतनी घटनाओं का लंबे समय तक पता क्यों नहीं चल सका और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी।मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। विभिन्न याचिकाओं में राम मंदिर को मिलने वाले दान और चढ़ावे के कथित गबन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच, वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और व्यापक फोरेंसिक ऑडिट की जरूरत बताई थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी की जांच की प्रगति से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की। अदालत ने पहले जांच की निगरानी करते हुए आवश्यक रिपोर्ट मांगी थीं। वित्तीय पहलुओं की जांच में विशेषज्ञता सुनिश्चित करने के लिए फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश भी दिया गया था।इस बीच 2 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि एसआईटी ने जांच पूरी करके आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने स्वतंत्र जांच और अदालत की निगरानी से संबंधित लंबित याचिकाओं का निपटारा कर दिया।इस आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अपनी निगरानी समाप्त कर दी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत में चलने वाली कार्यवाही में सहायता करने की अनुमति भी दी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश को आरोपों के गुण-दोष पर टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, एसआईटी ने करीब 2.7 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने की जानकारी दी है। आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होना अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के बाद यह मामला राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील बन गया है। अयोध्या का राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। मंदिर के निर्माण और संचालन में प्राप्त दान की राशि को लेकर पारदर्शिता का विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें आम नागरिकों का विश्वास जुड़ा हुआ है।जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने पूरे प्रकरण में निगरानी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की भूमिकाओं की जांच की जरूरत बताई।वहीं, सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया निचली अदालत में आगे बढ़ेगी। एसआईटी की ओर से प्रस्तुत आरोपपत्र और संबंधित साक्ष्यों की जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि कथित चोरी की घटनाओं में किन लोगों की भूमिका रही और क्या जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं।
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जांच दल ने मंदिर को दान में दी गई चांदी की ईंटों से संबंधित आरोपों की भी जांच की थी। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट को दी गई रिपोर्ट में एसआईटी ने इन मूल्यवान दानों के प्रबंधन में अनियमितता नहीं मिलने की जानकारी दी थी। इसलिए नकद चढ़ावे की कथित चोरी और अन्य मूल्यवान दानों से जुड़े आरोपों को अलग-अलग समझना आवश्यक है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल कथित वित्तीय गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संस्थाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता की व्यापक बहस से भी जुड़ा है। कांग्रेस इस प्रकरण में सरकार और मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन से जवाब मांग रही है, जबकि कानूनी प्रक्रिया अब आरोपपत्र के आधार पर आगे बढ़ रही है।फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समाप्त हो चुकी है, लेकिन आठ आरोपियों के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही का रास्ता खुला है। आने वाले समय में निचली अदालत की सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच में सामने आए आरोपों का कानूनी परिणाम क्या होता है।
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