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सत्य निकेतन हादसे के बाद देहरादून में बढ़ी चिंता

Kavita2
7 Sept 2026 9:25 AM IST
सत्य निकेतन हादसे के बाद देहरादून में बढ़ी चिंता
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नई दिल्ली/देहरादून। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद जर्जर और गिरासू भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में छह लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका के बीच राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद देहरादून में भी गिरासू भवनों को लेकर चिंता बढ़ गई है, जहां नगर निगम ने 21 ऐसे भवन चिह्नित किए हैं।

सत्य निकेतन में हुए हादसे ने एक बार फिर घनी आबादी वाले इलाकों में पुरानी और कमजोर इमारतों की स्थिति की ओर ध्यान खींचा है। रविवार दोपहर पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। घटना इतनी गंभीर थी कि इमारत का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। हादसे के बाद आसपास अफरा-तफरी मच गई और मौके पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

हादसे में छह लोगों की मौत होने की सूचना है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मलबे में अन्य लोगों के दबे होने की आशंका के चलते बचाव कार्य पर विशेष ध्यान दिया गया। भारी मलबे के बीच फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की गई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

घटना के बाद इमारत की सुरक्षा और उसके रखरखाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि भवन की वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या उससे जुड़े सुरक्षा मानकों को लेकर पहले किसी प्रकार की चेतावनी या कार्रवाई की गई थी।

सत्य निकेतन दिल्ली के प्रमुख छात्र इलाकों में शामिल है। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस और आसपास के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में छात्र यहां पीजी और किराए के मकानों में रहते हैं। ऐसे में पांच मंजिला इमारत के गिरने की घटना ने छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है। हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि छात्रों और अन्य किरायेदारों को दिए जाने वाले भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच कितनी नियमित और प्रभावी तरीके से की जाती है।

दिल्ली के इस हादसे की खबर सामने आने के बाद देहरादून में भी पुराने और गिरासू भवनों को लेकर चिंता बढ़ गई है। नगर निगम की ओर से शहर में 21 गिरासू भवन चिह्नित किए गए हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि इनमें से कई भवनों में अब भी लोग रह रहे हैं। ऐसे भवनों की स्थिति विशेष रूप से बारिश के मौसम में गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

गिरासू भवन वे इमारतें होती हैं जिनकी संरचना कमजोर हो चुकी होती है और जिनके गिरने की आशंका बनी रहती है। समय के साथ भवनों में आई कमजोरी, रखरखाव की कमी और मौसम का असर उनकी स्थिति को और खराब कर सकता है। लगातार बारिश के दौरान दीवारों और नींव में नमी बढ़ने से पहले से कमजोर भवनों के लिए खतरा बढ़ सकता है।

देहरादून में चिह्नित 21 भवनों को लेकर अब नगर निगम की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। यदि इनमें लोग रह रहे हैं तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय रहते कदम उठाना जरूरी है। किसी भवन को गिरासू घोषित करने के बाद केवल उसकी पहचान करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वहां रहने वाले लोगों को खतरे के बारे में सचेत करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी जरूरत होती है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ हादसा ऐसे भवनों को लेकर चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। किसी जर्जर इमारत के गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान चलाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण यह है कि खतरे की पहचान पहले की जाए और दुर्घटना होने से पहले लोगों को सुरक्षित किया जाए।

देहरादून में कई गिरासू भवनों के आबाद होने की बात सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर लोग ऐसे भवनों में क्यों रह रहे हैं। इसके पीछे आर्थिक और संपत्ति से जुड़े अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कई बार पुरानी इमारतों में लंबे समय से रह रहे परिवार दूसरी जगह जाने को तैयार नहीं होते, जबकि कुछ मामलों में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग जोखिम के बावजूद वहीं रहते हैं।

नगर निकायों के सामने ऐसी इमारतों को खाली कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की चुनौती रहती है। भवन के मालिक, किरायेदार और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की कमी भी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। लेकिन किसी बड़े हादसे की आशंका होने पर सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी हो जाता है।

सत्य निकेतन की घटना के बाद देहरादून ही नहीं, बल्कि अन्य शहरों में भी जर्जर इमारतों की स्थिति की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा सकती है। खासकर मॉनसून के दौरान पुरानी इमारतों पर अतिरिक्त नजर रखना आवश्यक है। बारिश से कमजोर भवनों पर दबाव बढ़ने और हादसे का खतरा पैदा होने की आशंका रहती है।

दिल्ली में हुए दर्दनाक हादसे के बाद जहां पुलिस ने इमारत मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, वहीं देहरादून में चिह्नित 21 गिरासू भवन अब प्रशासन के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं। इनमें से कई भवनों में लोगों का रहना खतरे को और गंभीर बनाता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नगर निगम इन भवनों को लेकर क्या कदम उठाता है और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए किस तरह की व्यवस्था की जाती है।

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