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दुर्गा पूजा में शामिल हुईं CM रेखा गुप्ता, मां दुर्गा के किए दर्शन

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मिंटो रोड स्थित काली मंदिर परिसर में आयोजित दुर्गा पूजा समारोह में भाग लिया। उन्होंने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया और दिल्ली सहित देशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बंगाली समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, सामाजिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर लोगों को नवरात्रि और दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं।
यह कार्यक्रम सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को आयोजित हुआ था, जिसकी जानकारी मंगलवार को सामने आई। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी मंदिर में अपने दर्शन और बंगाली समाज के साथ उत्सव में शामिल होने का अनुभव साझा किया।
मिंटो रोड काली मंदिर में की पूजा-अर्चना
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मिंटो रोड स्थित काली मंदिर परिसर पहुंचीं और वहां आयोजित दुर्गा पूजा समारोह में सहभागिता की।
मंदिर में उन्होंने मां दुर्गा के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बंगाली समाज की धार्मिक परंपराओं और उत्सव की सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है, जो समाज में आस्था, भक्ति और आपसी सद्भाव का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहने की प्रार्थना की।
बंगाली समाज की सांस्कृतिक विरासत को सराहा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बंगाली समाज की कला, साहित्य, संगीत और धार्मिक परंपराओं की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि बंगाली समाज ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से दिल्ली की संस्कृति को निरंतर समृद्ध किया है।
दिल्ली में विभिन्न राज्यों और समुदायों के लोग रहते हैं। ऐसे में दुर्गा पूजा जैसे त्योहार लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं और संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल की दुर्गा पूजा अपनी विशेष परंपराओं, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के कारण देशभर में विशिष्ट पहचान रखती है।
उन्होंने दुर्गा पूजा को आध्यात्मिक समृद्धि और सामूहिक चेतना का उत्सव बताया।
ढाक की थाप और शंखनाद का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा अपने संदेश में दुर्गा पूजा की पारंपरिक विशेषताओं का भी वर्णन किया।
उन्होंने बंगाल की दुर्गा पूजा में बजने वाले ढाक, शंखनाद और धुनुची नृत्य की सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित किया।
ढाक की थाप बंगाली दुर्गा पूजा का प्रमुख आकर्षण मानी जाती है। वहीं, शंखनाद धार्मिक अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
धुनुची नृत्य भी दुर्गा पूजा की विशेष परंपराओं में शामिल है। इसमें श्रद्धालु पारंपरिक तरीके से धूप के पात्र के साथ नृत्य करते हैं।
मुख्यमंत्री ने इन परंपराओं को भारतीय संस्कृति की विविधता और आध्यात्मिक समृद्धि का प्रतीक बताया।
दुर्गा पूजा से मिलता है एकता का संदेश
रेखा गुप्ता ने कहा कि दुर्गा पूजा समाज में एकता, सकारात्मक सोच और सामूहिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाला पर्व है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक उत्सव केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
दुर्गा पूजा के दौरान लोग सामूहिक रूप से धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं।
उन्होंने इस अवसर पर सभी के मंगलमय जीवन की कामना की।
दिल्ली में दुर्गा पूजा की पुरानी परंपरा
राजधानी दिल्ली में दुर्गा पूजा का आयोजन कई दशकों से होता आ रहा है।
विशेष रूप से मिंटो रोड स्थित काली मंदिर परिसर में आयोजित दुर्गा पूजा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।
यहां मिंटो रोड पूजा समिति की स्थापना वर्ष 1940 में हुई थी। उस समय दिल्ली में रहने वाले बंगाली समाज के कुछ लोगों ने मिलकर दुर्गा पूजा की परंपरा शुरू की थी।
समय के साथ यह आयोजन दिल्ली के प्रमुख दुर्गा पूजा समारोहों में शामिल हो गया।
इस मंदिर परिसर में बंगाली समाज के लोग बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।
यहां आयोजित दुर्गा पूजा अपनी पारंपरिक शैली और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए जानी जाती है।
राजधानी के कई इलाकों में दुर्गा पूजा की धूम
शारदीय नवरात्रि के अवसर पर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में दुर्गा पूजा के भव्य आयोजन किए जा रहे हैं।
चित्तरंजन पार्क, कश्मीरी गेट, पहाड़गंज और मिंटो रोड सहित कई स्थानों पर पूजा पंडाल सजाए गए हैं।
इन पंडालों में धार्मिक परंपराओं के साथ कला और संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है।
इस वर्ष कई पूजा समितियों ने पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक कला को अपनी सजावट का प्रमुख विषय बनाया है।
कुछ स्थानों पर प्राकृतिक सामग्री और हस्तशिल्प का उपयोग करके पंडाल तैयार किए गए हैं।
दुर्गा पूजा के आयोजन लोगों को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर दे रहे हैं।
महानवमी पर मुख्यमंत्री ने किया था कन्या पूजन
इससे पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को महानवमी के अवसर पर अपने आवास पर परिवार के साथ कन्या पूजन भी किया था।
इस दौरान उन्होंने बेटियों के सम्मान, शिक्षा और सुरक्षा पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि बेटियां शक्ति का स्वरूप हैं और समाज की प्रगति के लिए उनका सशक्त होना आवश्यक है।
उन्होंने प्रत्येक बेटी को शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री ने कन्या पूजन के दौरान सभी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और समाज की खुशहाली की कामना की थी।
सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के माध्यम से भारतीय त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया।
दुर्गा पूजा के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है।
दिल्ली जैसे महानगर में विभिन्न समुदायों के त्योहारों का आयोजन शहर की सांस्कृतिक विविधता को भी प्रदर्शित करता है।
मिंटो रोड काली मंदिर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री की भागीदारी इसी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रही।
सभी के मंगलमय जीवन की प्रार्थना
मिंटो रोड काली मंदिर परिसर में मां दुर्गा के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।
उन्होंने दुर्गा पूजा को श्रद्धा, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व बताते हुए समाज में आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने बंगाली समाज की सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए राजधानी की विविधतापूर्ण संस्कृति में उसके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर उनका मुख्य संदेश धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने का रहा।





