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नई दिल्ली। दीपावली के त्योहार से पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन द्वारा आयोजित 'दीपावली बाजार 2026' का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बाजार में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और दृष्टिबाधित कारीगरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की सराहना की। उन्होंने संस्था के दृष्टिबाधित सदस्यों के साथ बैठकर भोजन भी किया और उनसे आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने इस पहल को सामाजिक समावेशिता, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे इस विशेष बाजार में पहुंचकर खरीदारी करें और दृष्टिबाधित कारीगरों के कौशल को प्रोत्साहित करें। यह बाजार केवल दीपावली की खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों की शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आर्थिक सशक्तीकरण को सहयोग देने का माध्यम भी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कार्यक्रम में पहुंचने पर संस्था के प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने दीपावली बाजार का उद्घाटन करते हुए आयोजन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अलग-अलग स्टॉलों पर पहुंचकर वहां रखे गए हस्तनिर्मित उत्पादों को देखा और उनके निर्माण से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने दृष्टिबाधित सदस्यों के साथ समय बिताया। उन्होंने उनके साथ भोजन किया और उनके अनुभवों तथा कार्यों के बारे में बातचीत की। इस मुलाकात को आयोजन का विशेष पहलू माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में सभी लोगों को आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के समान अवसर मिलने चाहिए। दिव्यांग व्यक्तियों की प्रतिभा को पहचानना और उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
उन्होंने ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का अवसर भी देते हैं।
दीपावली बाजार 2026 का आयोजन दिल्ली के लोधी रोड स्थित ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन परिसर में किया जा रहा है। यह बाजार 30 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चलेगा। आयोजकों के कार्यक्रम विवरण के अनुसार, बाजार प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहेगा।
इस आयोजन में प्रवेश निःशुल्क रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग यहां पहुंचकर खरीदारी कर सकें और संस्था से जुड़े कार्यों को समझ सकें।
बाजार में दीपावली की सजावट से जुड़े सामान, मोमबत्तियां, दीये, हस्तनिर्मित उपहार, सजावटी वस्तुएं और अन्य घरेलू उपयोग के उत्पाद उपलब्ध हैं। कई उत्पादों को दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं और कारीगरों ने अपने कौशल से तैयार किया है।
इन उत्पादों की विशेषता यह है कि इन्हें बनाने में कारीगरों की मेहनत, रचनात्मकता और प्रशिक्षण का योगदान होता है। बाजार में आने वाले लोगों को उनकी कला से परिचित होने का अवसर मिलता है।
ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन लंबे समय से दृष्टिबाधित व्यक्तियों की शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास के क्षेत्र में काम कर रही है। संस्था का उद्देश्य दृष्टिबाधित लोगों को ऐसी सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराना है, जिनसे वे आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकें।
संस्था द्वारा आयोजित दीपावली बाजार की परंपरा लगभग चार दशक पुरानी है। इसकी शुरुआत वर्ष 1980 में हस्तनिर्मित मोमबत्तियों और दीयों के छोटे प्रदर्शन से हुई थी।
समय के साथ यह आयोजन दिल्ली के लोकप्रिय दीपावली बाजारों में शामिल हो गया। अब इसमें विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प, सजावटी उत्पाद और अन्य वस्तुओं के स्टॉल लगाए जाते हैं।
इस बाजार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका सामाजिक उद्देश्य है। यहां दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार किए गए सामान की बिक्री से प्राप्त आय संस्था की शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों में सहयोग करती है।
ऐसे आयोजनों से दृष्टिबाधित व्यक्तियों को अपने उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। साथ ही बाजार में लोगों से सीधा संवाद होने के कारण उनकी व्यावसायिक समझ और आत्मविश्वास भी मजबूत हो सकता है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को आत्मनिर्भरता की दिशा में उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को केवल सहायता का लाभार्थी मानने के बजाय उनकी प्रतिभा और क्षमता को पहचानने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर उन्होंने दिल्लीवासियों से अपील की कि दीपावली की खरीदारी के लिए इस बाजार को भी प्राथमिकता दें। यहां की गई खरीदारी दृष्टिबाधित कारीगरों के कार्य को प्रोत्साहन दे सकती है।
दीपावली के अवसर पर राजधानी में कई बड़े बाजार और मेले आयोजित किए जाते हैं। लेकिन ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन का यह आयोजन अपने सामाजिक उद्देश्य के कारण अलग पहचान रखता है।
यहां आने वाले लोग त्योहार की जरूरत का सामान खरीदने के साथ दृष्टिबाधित व्यक्तियों के कौशल और मेहनत के बारे में भी जान सकते हैं।
बाजार में खरीदारी के अलावा सांस्कृतिक और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों की भी व्यवस्था की गई है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में दृष्टिबाधित युवाओं का फैशन शो, समावेशिता पर नुक्कड़ नाटक और बच्चों के लिए रचनात्मक गतिविधियां आकर्षण का हिस्सा हैं।
इस वर्ष बाजार में 350 से अधिक स्टॉल होने की जानकारी दी गई है। यहां विभिन्न प्रकार के उत्पादों के साथ कुछ विशेष सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी से इस आयोजन को विशेष महत्व मिला है। उन्होंने स्टॉलों का निरीक्षण करके दृष्टिबाधित कारीगरों के काम की जानकारी ली और उनके साथ भोजन कर संवाद किया।
इस मुलाकात ने सामाजिक समावेशिता के संदेश को और प्रमुखता दी। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सामाजिक सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कौशल प्रशिक्षण तभी अधिक उपयोगी साबित होता है, जब प्रशिक्षित व्यक्तियों को अपने उत्पाद और सेवाएं लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिले।
दीपावली बाजार जैसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यहां ग्राहक सीधे कारीगरों के काम को देख सकते हैं और उनके उत्पादों की खरीदारी कर सकते हैं।
इसके माध्यम से समाज में दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनकी क्षमताओं को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।
इस आयोजन का एक उद्देश्य यह संदेश देना भी है कि दृष्टिबाधिता किसी व्यक्ति की प्रतिभा या कार्यक्षमता का पूर्ण निर्धारण नहीं करती। उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिलने पर दृष्टिबाधित व्यक्ति विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आयोजन के दौरान संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए लोगों से इसमें भागीदारी करने की अपील की।
फिलहाल राजधानी में दीपावली की तैयारियों के बीच ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन का यह बाजार लोगों के लिए खरीदारी और सामाजिक सहयोग का विशेष अवसर बनकर सामने आया है।
30 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलने वाला यह आयोजन दृष्टिबाधित कारीगरों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराएगा।
मुख्यमंत्री द्वारा बाजार का उद्घाटन, स्टॉलों का निरीक्षण और दृष्टिबाधित सदस्यों के साथ भोजन करना इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। इस पहल के माध्यम से समावेशिता, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन के अवसरों को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।





