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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली में CM पिनाराई विजयन हिरासत में सियासी विवाद
Ratna Netam
10 Oct 2026 6:51 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र की मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का दमन संविधान और मतदान के अधिकार की रक्षा करने के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकता। विजयन ने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ विरोध-प्रदर्शन की खबरें कवर कर रहे पत्रकारों को भी हिरासत में लिया जा रहा है।यह बयान उस घटनाक्रम के बाद सामने आया, जिसमें दिल्ली स्थित केरल भवन के बाहर विरोध-प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास को पुलिस ने हिरासत में लिया। विजयन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और केंद्र सरकार से चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की।
केरल भवन के बाहर विरोध-प्रदर्शन के बाद कार्रवाई
शनिवार को दिल्ली में केरल भवन के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास भी मौजूद थे।प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई को लेकर केरल के राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।हालांकि, प्रदर्शन में कुल कितने लोग शामिल थे और पुलिस ने कितने व्यक्तियों को हिरासत में लिया, इसका विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।इसके अलावा, पुलिस ने किस कानूनी प्रावधान के तहत हिरासत की कार्रवाई की, इस संबंध में भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।मुख्यमंत्री विजयन ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया और केंद्र सरकार की आलोचना की।
मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पिनाराई विजयन ने एक्स पर अपनी पोस्ट में दावा किया कि दिल्ली में मोदी सरकार के तहत लोकतंत्र पर कठोर कार्रवाई की जा रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा है और विरोध-प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के खिलाफ भी कार्रवाई हो रही है।विजयन ने कहा कि सरकार चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई कर रही है।उन्होंने केंद्र सरकार पर जवाबदेही की मांग करने वालों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।हालांकि, ये आरोप मुख्यमंत्री विजयन के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
पत्रकारों को हिरासत में लेने का भी दावा
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने पुलिस कार्रवाई को लेकर एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन में शामिल लोगों के अलावा वहां समाचार संकलन कर रहे पत्रकारों को भी हिरासत में लिया जा रहा है।विजयन के अनुसार, प्रदर्शन को कवर करने वाले पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई होना चिंता का विषय है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा।हालांकि, हिरासत में लिए गए पत्रकारों की संख्या, उनकी पहचान और पुलिस कार्रवाई के कारणों का स्वतंत्र विवरण उपलब्ध नहीं है।इसलिए पत्रकारों की हिरासत से जुड़े दावों को फिलहाल विजयन के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
संविधान और मतदान के अधिकार की रक्षा का संकल्प
पिनाराई विजयन ने अपने बयान में संविधान और मतदान के अधिकार की रक्षा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की सरकारी कार्रवाई से संविधान और वोट देने के अधिकार की रक्षा करने का संकल्प समाप्त नहीं किया जा सकता।मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों से बच नहीं सकती और जवाबदेही की मांग करने वालों को पुलिस कार्रवाई के जरिए चुप नहीं कराया जा सकता।उनका यह बयान दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में आया है।विजयन ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए इस संबंध में उठाए जा रहे सवालों के जवाब देने की मांग की।हालांकि, उनके बयान में उठाए गए चुनावी आरोपों की सत्यता के संबंध में स्वतंत्र जांच का कोई निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।
CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास भी हिरासत में
केरल भवन के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। जॉन ब्रिटास के साथ मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की हिरासत का घटनाक्रम सामने आने के बाद केरल के राजनीतिक नेताओं ने प्रतिक्रिया दी। हालांकि, दोनों नेताओं को किस पुलिस स्टेशन ले जाया गया और कितनी देर तक हिरासत में रखा गया, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने उन्हें बाद में रिहा कर दिया था या नहीं।पुलिस की ओर से इस कार्रवाई का विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
वीडी सतीशन ने की पुलिस कार्रवाई की निंदा
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को हिरासत में लिए जाने की निंदा की।उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और मुख्यमंत्री की तत्काल रिहाई की आवश्यकता बताई।प्राप्त जानकारी के अनुसार, केरल के मुख्य सचिव मुख्यमंत्री की रिहाई के संबंध में दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय कर रहे थे।हालांकि, मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस के बीच हुई बातचीत का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।इस घटनाक्रम में मुख्यमंत्री की हिरासत पर विपक्ष के नेता की प्रतिक्रिया भी सामने आई।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर उठे सवाल
दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर भी चर्चा शुरू हुई है।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है।हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के हित में इन अधिकारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।किसी विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई हिरासत की कार्रवाई का कानूनी आधार संबंधित परिस्थितियों और लागू प्रावधानों पर निर्भर करता है।केरल भवन के बाहर हुए प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए कार्रवाई की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शनकारियों तथा पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं।उन्होंने चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की और संविधान तथा मतदान के अधिकार की रक्षा करने का संकल्प दोहराया।हालांकि, पुलिस की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या और कार्रवाई के कानूनी आधार का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।फिलहाल केरल भवन के बाहर विरोध-प्रदर्शन, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और सांसद जॉन ब्रिटास की हिरासत तथा इस पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं प्रमुख घटनाक्रम हैं।
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