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पश्चिमी हिमालय पर जलवायु संकट बढ़ा तेजी से पिघल रही बर्फ अरबों लोगों पर खतरा
nidhi
20 Aug 2026 8:19 AM IST

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बढ़ते तापमान से हिमालय बेहाल ग्लेशियर पिघलने से बढ़ी चिंता
नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन का असर अब हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से दिखाई देने लगा है। पश्चिमी हिमालय में बढ़ते तापमान के कारण बर्फ और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका प्रभाव केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन अरबों लोगों पर पड़ सकता है, जो हिमालय से निकलने वाली नदियों पर निर्भर हैं।
हिमालय को दुनिया के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक माना जाता है। पश्चिमी हिमालय के ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव से जल संसाधनों, कृषि, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों के जीवन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी के कारण हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव आया है। कई इलाकों में सर्दियों के दौरान अपेक्षित बर्फ नहीं गिर रही है, जबकि गर्मियों में तापमान बढ़ने से बर्फ तेजी से पिघल रही है। इसका सीधा असर ग्लेशियरों के आकार और उनकी जल संग्रह क्षमता पर पड़ रहा है।
हिमालय से निकलने वाली कई प्रमुख नदियां करोड़ों लोगों की जीवनरेखा हैं। इन नदियों का पानी पीने, सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यदि ग्लेशियरों का तेजी से क्षय जारी रहा तो भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लेशियरों के पिघलने से शुरुआत में नदियों में पानी की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन लंबे समय में ग्लेशियरों के सिकुड़ने से जल प्रवाह में कमी आ सकती है, जिसका असर कृषि और पेयजल व्यवस्था पर पड़ेगा।
पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड के कई हिस्से शामिल हैं। यहां बढ़ता तापमान पहले ही मौसम में बदलाव, अचानक भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय को बचाने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी, जंगलों का संरक्षण और टिकाऊ विकास योजनाओं को अपनाना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन की तैयारी भी मजबूत करनी होगी। जलवायु परिवर्तन की चुनौती अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह मानव जीवन, खाद्य सुरक्षा और जल सुरक्षा से जुड़ा गंभीर संकट बन चुकी है। पश्चिमी हिमालय में हो रहे बदलाव आने वाले समय में पूरी दुनिया के लिए चेतावनी माने जा रहे हैं।
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