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हाईराइज बिल्डिंग्स का रास्ता साफ, बदल जाएगी दिल्ली की तस्वीर

नई दिल्ली। जमीन की बढ़ती कमी और तेजी से बढ़ती आबादी की जरूरतों को देखते हुए दिल्ली में अब ऊंचाई की ओर विकास को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। नई ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति और फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) में बदलाव के जरिए राजधानी में गगनचुंबी इमारतों और बड़े पैमाने पर पुनर्विकास परियोजनाओं का रास्ता साफ हो रहा है।
नीति में किए गए बदलावों का उद्देश्य सीमित जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना और लोगों को आधुनिक आवास सुविधाएं उपलब्ध कराना है। खासतौर पर मेट्रो कॉरिडोर के आसपास हाईराइज इमारतों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके और सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव को कम किया जा सके।
ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD नीति का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के आसपास शहर का विकास करना है। इसके तहत मेट्रो स्टेशन और प्रमुख परिवहन केंद्रों के आसपास अधिक घनत्व वाले आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट विकसित किए जाते हैं। इससे लोगों को परिवहन सुविधाओं के करीब रहने का अवसर मिलता है और निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सकती है।
वहीं, फ्लोर एरिया रेशियो यानी FAR में बढ़ोतरी का मतलब है कि किसी प्लॉट पर पहले की तुलना में अधिक निर्माण क्षेत्र उपलब्ध होगा। इससे बिल्डरों और डेवलपर्स को ऊंची इमारतें बनाने का मौका मिलेगा और कम जमीन में ज्यादा लोगों के लिए आवास तैयार किए जा सकेंगे।
नई नीति के तहत दिल्ली में कई क्षेत्रों में पुनर्विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। पुराने इलाकों में नई इमारतों का निर्माण, बेहतर सुविधाओं वाले आवासीय परिसर और आधुनिक शहरी ढांचे को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, शहरी नियोजन विशेषज्ञों ने इस बदलाव को लेकर कुछ चिंताएं भी जताई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ऊंची इमारतें बनाने से शहर की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसके लिए पानी, बिजली, सीवेज व्यवस्था, पार्किंग, सड़क क्षमता और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी होगा।
आर्किटेक्ट और नगर नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार, अगर बिना पर्याप्त बुनियादी ढांचे के हाईराइज निर्माण को मंजूरी दी गई तो कई इलाकों में भीड़भाड़ और सुविधाओं पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए नई नीति के साथ मजबूत शहरी योजना और निगरानी व्यवस्था की जरूरत होगी।
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में जमीन की उपलब्धता हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में ऊंचाई की ओर विकास को एक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। दुनिया के कई बड़े शहरों में भी सीमित जमीन के बेहतर इस्तेमाल के लिए हाईराइज मॉडल अपनाया गया है।
सरकार का लक्ष्य है कि नई नीतियों के जरिए दिल्ली को अधिक व्यवस्थित, आधुनिक और परिवहन सुविधा से जुड़ा शहर बनाया जाए। TOD नीति के माध्यम से मेट्रो आधारित विकास को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को घर, काम और परिवहन सुविधाओं के बीच बेहतर तालमेल मिल सकेगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली को शंघाई या अन्य बड़े वैश्विक शहरों की तरह विकसित करने के लिए केवल ऊंची इमारतें पर्याप्त नहीं होंगी। इसके लिए पर्यावरण संतुलन, हरित क्षेत्र, जल प्रबंधन और मजबूत आधारभूत ढांचे पर भी समान ध्यान देना होगा।
नई TOD और FAR नीति आने वाले वर्षों में दिल्ली के शहरी स्वरूप में बड़ा बदलाव ला सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन नीतियों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और विकास के साथ शहर की सुविधाओं का संतुलन कैसे बनाया जाता है।





