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जामिया में छात्रसंघ चुनाव को लेकर घमासान, लंबे शटडाउन पर पवन खेड़ा ने प्रशासन को घेरा

Ratna Netam
29 Oct 2026 2:58 PM IST
जामिया में छात्रसंघ चुनाव को लेकर घमासान, लंबे शटडाउन पर पवन खेड़ा ने प्रशासन को घेरा
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दिल्ली : प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन किए जाने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने प्रशासन के कदमों को छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज दबाने का प्रयास बताया। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2026। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन किए जाने तथा परिसर में सुरक्षा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को छात्रों के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देश में विद्यार्थियों को अपने छात्रसंघ के गठन के लिए इतने लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ना चिंताजनक है।उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया।
पवन खेड़ा ने प्रशासन की कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जामिया के छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया।उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के भारत में विद्यार्थियों को निर्वाचित छात्रसंघ के गठन के अधिकार के लिए दो सप्ताह से अधिक समय तक आंदोलन करना पड़ रहा है। यह देश में लोकतंत्र की स्थिति, विशेषकर युवाओं के दृष्टिकोण से, चिंता का विषय है।खेड़ा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(c) का उल्लेख किया, जो नागरिकों को संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश का भी आरोप लगाया। खेड़ा के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कथित आपत्तिजनक नारों से जुड़ी बातों को सामने लाया गया, लेकिन जब छात्रों ने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की तो प्रशासन अपने रुख से पीछे हट गया।हालांकि, यह पवन खेड़ा का आरोप है और इस संबंध में प्रशासन का पक्ष अलग है।
18वें दिन भी जारी रहा छात्रों का आंदोलन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की बहाली को लेकर 12 अक्टूबर से विरोध प्रदर्शन जारी है। गुरुवार 29 अक्टूबर को आंदोलन अपने 18वें दिन में पहुंच गया।विद्यार्थियों की प्रमुख मांग है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ को दोबारा स्थापित किया जाए और चुनाव की निश्चित तारीख घोषित की जाए।जामिया में छात्रसंघ के चुनाव लगभग दो दशक से नहीं हुए हैं। छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ की अनुपस्थिति में उनकी समस्याओं और मांगों को प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रखने का लोकतांत्रिक मंच कमजोर हुआ है।कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चुनावी समयसीमा और प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखा है।
ऑनलाइन कक्षाएं 24 नवंबर तक बढ़ाई गईं
छात्रों के आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमित कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है।विश्वविद्यालय ने 24 अक्टूबर से ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की थी। शुरुआत में यह व्यवस्था 8 नवंबर तक निर्धारित की गई थी, लेकिन बाद में इसे 24 नवंबर तक बढ़ा दिया गया।रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने अगले सेमेस्टर की नियमित कक्षाएं 13 जनवरी 2027 से शुरू करने की योजना भी घोषित की है।प्रशासन का कहना है कि परिसर की वर्तमान परिस्थितियों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि लंबे समय तक परिसर में सामान्य गतिविधियां रोकने से उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक अनुभव प्रभावित हो रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने तोड़फोड़ के लगाए आरोप
इस विवाद में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है।प्रशासन के अनुसार, मंगलवार देर रात कुछ अज्ञात नकाबपोश लोगों ने विश्वविद्यालय परिसर में कथित रूप से तोड़फोड़ की।विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों ने गेट नंबर 4C को नुकसान पहुंचाया, पत्थरबाजी की और सीसीटीवी कंट्रोल रूम तथा कैमरों को क्षतिग्रस्त किया।प्रशासन का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से परिसर की सुरक्षा प्रभावित हुई है।विश्वविद्यालय ने यह भी बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन विवाद का पूर्ण समाधान नहीं निकल पाया है।दूसरी ओर आंदोलनकारी छात्रों ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
छात्रसंघ चुनाव पर प्रशासन ने दिया आश्वासन
लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच जामिया प्रशासन ने 26 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर छात्रसंघ चुनाव कराने पर सहमति जताई थी।आदेश के अनुसार, छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।प्रशासन ने आंदोलन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का भी निर्णय लिया।इसके अतिरिक्त सुरक्षा कर्मचारियों की कथित कार्रवाई की जांच के लिए समिति गठित करने का आश्वासन दिया गया।हालांकि, प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि छात्रसंघ के संविधान को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी।प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक चुनाव की निश्चित समयसीमा घोषित नहीं होती, तब तक केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है।
कांग्रेस ने छात्रों के आंदोलन को दिया समर्थन
कांग्रेस ने जामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति एकजुटता व्यक्त की है।पवन खेड़ा के बयान के बाद छात्रसंघ चुनाव और परिसर में प्रतिबंधों का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।कांग्रेस का कहना है कि विश्वविद्यालयों में छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने का अवसर मिलना चाहिए।छात्र संगठनों ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्णय लेने और विश्वविद्यालय में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बहाल करने की मांग उठाई है।इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विश्वविद्यालय पहुंचकर छात्रों से मिलने की संभावित योजना भी चर्चा में रही।
स्थापना दिवस के कार्यक्रमों पर भी पड़ा असर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने 29 अक्टूबर को अपनी स्थापना के 106 वर्ष पूरे किए।हालांकि, परिसर में जारी तनाव और छात्रों के आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक स्थापना दिवस समारोह और तालीमी मेले को रद्द करने का निर्णय लिया।तालीमी मेला 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित किया जाना प्रस्तावित था।प्रशासन ने कार्यक्रम रद्द करने के पीछे विद्यार्थियों, अतिथियों और अन्य प्रतिभागियों की सुरक्षा को प्रमुख कारण बताया।वहीं, आंदोलनकारी छात्रों ने अपने स्तर पर स्थापना दिवस मनाने की गतिविधियों की योजना बनाई।
अब प्रशासन और छात्रों के बीच समाधान पर नजर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जारी विवाद का मुख्य मुद्दा छात्रसंघ की बहाली और चुनाव की निश्चित तारीख है।विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और शैक्षणिक व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है, जबकि छात्रों का तर्क है कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ी मांगों पर समयबद्ध निर्णय होना चाहिए।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की आलोचना के बाद यह विवाद राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से कब समाधान निकलता है और परिसर में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां कब बहाल होती हैं।
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