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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली में 2500 लोगों की हिरासत का दावाअभिषेक बनर्जी ने उठाए सवाल
Ratna Netam
10 Oct 2026 6:45 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को हुए विरोध-प्रदर्शनों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले में लगभग 2,500 लोगों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और समर्थक ही नहीं, बल्कि ऐसे लोग भी शामिल थे जिनका किसी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं था। उनके अनुसार, कुछ राहगीरों को भी पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के पांच सांसदों को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने सरकार के रवैये की तुलना जर्मनी में एडॉल्फ हिटलर के शासनकाल से की और सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों से क्यों डरती है।हालांकि, अभिषेक बनर्जी की ओर से बताई गई 2,500 लोगों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। दिल्ली पुलिस का इस आरोप पर विस्तृत आधिकारिक जवाब भी उपलब्ध नहीं है।
अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली पुलिस पर उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।अभिषेक बनर्जी के अनुसार, पुलिस ने राजधानी में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या लगभग 2,500 बताई।उनका आरोप था कि पुलिस की कार्रवाई केवल प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल लोगों तक सीमित नहीं रही।उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ ऐसे व्यक्तियों को भी हिरासत में लिया गया, जिनकी किसी राजनीतिक दल से संबद्धता नहीं थी।अभिषेक बनर्जी ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए सरकार और पुलिस से सवाल किए।
ममता बनर्जी और पांच सांसदों को लेकर आरोप
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के पांच सांसदों को भी शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई।उनके अनुसार, ये नेता राजधानी में अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के कारण ऐसा नहीं कर सके।उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के रवैये पर आपत्ति जताई।हालांकि, संबंधित पांच सांसदों के नाम और उन्हें किस स्थान पर प्रदर्शन करने से रोका गया, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शन के लिए औपचारिक अनुमति मांगी गई थी या नहीं और पुलिस ने संबंधित नेताओं को रोकने के लिए किन कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया।इन प्रश्नों पर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
राहगीरों को भी हिरासत में लेने का दावा
अभिषेक बनर्जी ने पुलिस कार्रवाई को लेकर एक और आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों में ऐसे व्यक्ति भी शामिल थे, जिनका विरोध-प्रदर्शन या किसी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं था।उनके अनुसार, राजधानी में मौजूद कुछ राहगीरों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।हालांकि, इस दावे के समर्थन में हिरासत में लिए गए गैर-राजनीतिक व्यक्तियों की संख्या या पहचान से जुड़ा विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने किन परिस्थितियों में संबंधित लोगों को हिरासत में लिया था।अभिषेक बनर्जी के आरोपों के बाद पुलिस कार्रवाई के दायरे और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की पहचान को लेकर सवाल सामने आए हैं।
हिटलर के शासनकाल से की तुलना
तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए उसकी तुलना एडॉल्फ हिटलर के शासनकाल से की।उन्होंने सवाल उठाया कि जनता द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों से डरने की क्या आवश्यकता है।उनकी यह टिप्पणी सरकार के खिलाफ राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थी।हालांकि, इस तुलना को अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इससे किसी ऐतिहासिक समानता के प्रमाणित होने का निष्कर्ष नहीं निकलता।अभिषेक बनर्जी ने अपने बयान के माध्यम से विरोध-प्रदर्शन की स्वतंत्रता और पुलिस कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठाए।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर चर्चा
दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे आरोपों के बीच शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार भी चर्चा का विषय है।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्वक तथा बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है।हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से संबंधित परिस्थितियों में प्रशासन को निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार होता है।किसी विशेष प्रदर्शन को रोकने या लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई उचित थी या नहीं, इसका मूल्यांकन संबंधित परिस्थितियों और कानूनी आधार के अनुसार किया जाता है।दिल्ली में शनिवार को हुई कार्रवाई के संबंध में अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाए हैं, लेकिन पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध नहीं है।
हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या स्पष्ट नहीं
अभिषेक बनर्जी ने लगभग 2,500 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है।हालांकि, यह संख्या दिल्ली पुलिस के किसी आधिकारिक आंकड़े से पुष्ट नहीं हुई है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनके दावे में राजधानी के सभी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोग शामिल हैं या किसी विशेष प्रदर्शन से जुड़े व्यक्ति।इसके अतिरिक्त, हिरासत में लिए गए लोगों में कितने राजनीतिक कार्यकर्ता, समर्थक और अन्य नागरिक थे, इसका स्वतंत्र विवरण उपलब्ध नहीं है।इसलिए 2,500 लोगों की संख्या को फिलहाल तृणमूल कांग्रेस सांसद के दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
दिल्ली पुलिस के जवाब का इंतजार
अभिषेक बनर्जी ने BJP सरकार और दिल्ली पुलिस पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों को रोकने तथा बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया है।उन्होंने विशेष रूप से ममता बनर्जी और पांच TMC सांसदों को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया।हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।फिलहाल शनिवार को दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।आधिकारिक हिरासत आंकड़े, पुलिस की कार्रवाई का कानूनी आधार और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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