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दिल्ली-एनसीआर
CJP के अभिजीत दिपके का बड़ा बयान बोले मुस्कुराते हुए जेल गए हमारे साथी
Ratna Netam
20 Oct 2026 4:50 PM IST

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नई दिल्ली। भारत में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों और दुनिया के विभिन्न देशों में जारी राजनीतिक आंदोलनों की तुलना को लेकर चल रही बहस के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बड़ा बयान दिया है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी वीडियो संदेश में दिपके ने भारतीय प्रदर्शनकारियों की तुलना नेपाल, बांग्लादेश और फ्रांस में हुई हिंसक घटनाओं से किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत में उनके साथी अहिंसा और गांधीवादी विचारधारा के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।अभिजीत दिपके ने जेल में बंद सीजेपी कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका का समर्थन करते हुए कहा कि दोनों ने गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत का सामना शांतिपूर्ण तरीके से किया है। उनके अनुसार, यह आचरण गांधीवादी सत्याग्रह की भावना को दर्शाता है।
मुस्कुराते हुए जेल गए हमारे साथी
दिपके ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि कुछ लोग लगातार भारत के विरोध-प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश की घटनाओं से कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भारतीय प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिएउन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका बिना किसी हिंसक प्रतिक्रिया के जेल गए। दिपके ने दावा किया कि दोनों कार्यकर्ताओं ने यह जानते हुए भी शांति का रास्ता चुना कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई गैरकानूनी है।उन्होंने कहा कि उनके साथियों के मन में किसी के प्रति नफरत नहीं है और वे कठिन परिस्थितियों में भी अहिंसा के सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं।
नेपाल और बांग्लादेश के आंदोलनों से तुलना पर आपत्ति
अभिजीत दिपके ने कहा कि भारत में हो रहे नागरिक विरोध को विदेशों में हुए हिंसक आंदोलनों या सत्ता परिवर्तन की घटनाओं जैसा बताना उचित नहीं है।उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में उनके साथी किसी प्रकार की हिंसा या उकसावे का रास्ता नहीं अपना रहे हैं।दिपके के अनुसार, विरोध जताना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे शांतिपूर्ण तरीके से भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारधारा आज भी भारतीय नागरिक आंदोलनों के लिए प्रासंगिक है।
सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत बढ़ी
सीजेपी के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए थे।दोनों की न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर को दो दिनों के लिए बढ़ा दी गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें 21 अक्टूबर तक तिहाड़ जेल में रखने का आदेश दिया गया है।दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के आधार पर हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया था। वहीं कार्यकर्ताओं के वकीलों ने हिरासत की वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
गांधीवादी सत्याग्रह का दिया उदाहरण
दिपके ने अपने बयान में कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका का व्यवहार दिखाता है कि विरोध बिना हिंसा के भी किया जा सकता है।उन्होंने दावा किया कि दोनों कार्यकर्ताओं के चेहरे पर जेल जाते समय और अदालत में पेशी के दौरान भी मुस्कान थी।दिपके ने आलोचकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके साथियों के भीतर नफरत पैदा नहीं की जा सकती। उन्होंने राजनीतिक असहमति व्यक्त करने के लिए शांति, करुणा और अहिंसा के रास्ते को महत्वपूर्ण बताया।
चुनावी मुद्दों को लेकर जारी है विरोध
कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता हाल के दिनों में चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने प्रदर्शन से संबंधित कानून-व्यवस्था के मुद्दों का हवाला दिया था।
शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने पर जोर
अभिजीत दिपके ने अपने संदेश के जरिए समर्थकों से गांधीवादी मूल्यों को बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनके साथियों का संघर्ष हिंसा के बजाय लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध पर आधारित है।इस बीच दिपके ने दिवाली तक आंदोलन रोकने और कार्यकर्ताओं से अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील भी की है।फिलहाल सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत तथा आगामी न्यायिक कार्यवाही को लेकर सीजेपी समर्थकों की निगाहें अदालत पर टिकी हैं। वहीं अभिजीत दिपके के बयान के बाद शांतिपूर्ण विरोध, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक असहमति को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।
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