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सरकारी स्कूलों पर CJP का वार, मंत्री-अधिकारियों से की बड़ी मांग

Kavita2
18 Aug 2026 4:32 PM IST
सरकारी स्कूलों पर CJP का वार, मंत्री-अधिकारियों से की बड़ी मांग
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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर शिक्षा विभाग से जुड़े सभी लोग, जिनमें मंत्री, अधिकारी, प्रिंसिपल और शिक्षक शामिल हैं, अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराएं तो इन स्कूलों की हालत में तेजी से सुधार हो सकता है।

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले उन लोगों को भरोसा दिखाना चाहिए जो शिक्षा व्यवस्था को संचालित करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकारी विभागों से जुड़े लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में क्यों भेजते हैं।

उन्होंने लिखा कि शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराना चाहिए। इसके बाद सरकारी स्कूलों की स्थिति में "जादुई" तरीके से बदलाव देखने को मिलेगा।

दीपके ने सरकारी अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब शिक्षा विभाग से जुड़े लोग अपने ही स्कूलों की व्यवस्था पर भरोसा नहीं करते और अपने बच्चों को निजी संस्थानों में भेजते हैं, तो इससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि अगर मंत्री, अधिकारी, शिक्षक और प्रिंसिपल खुद सरकारी स्कूलों की सुविधाओं का इस्तेमाल करेंगे तो उनकी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। इससे स्कूलों में सुधार की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

अभिजीत दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लगातार बहस चल रही है। कई राज्यों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं की समस्या और संसाधनों की कमी जैसे मुद्दे सामने आते रहे हैं।

CJP संस्थापक ने इससे पहले भी शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाई है। पिछले महीने दिल्ली में NEET-UG प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर छात्रों के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद उन्होंने कहा था कि उनका संगठन फिलहाल राजनीतिक दल के रूप में काम नहीं करेगा, बल्कि एक दबाव समूह (प्रेशर ग्रुप) की भूमिका निभाएगा।

दीपके ने कहा था कि CJP का उद्देश्य सरकार और प्रशासन का ध्यान आम लोगों से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि संगठन चुनावी राजनीति में उतरने की बजाय जनहित के मुद्दों को उठाने पर ध्यान देगा।

उन्होंने कहा था कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने के बाद अब संगठन ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाने के लिए अभियान चला रहा है।

CJP की ओर से "स्कूल थिंक करो" अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत गांवों में सरकारी स्कूलों की स्थिति, सुविधाओं और छात्रों की समस्याओं को उजागर करने का प्रयास किया जा रहा है।

अभिजीत दीपके का ताजा बयान सरकारी और निजी शिक्षा व्यवस्था के बीच अंतर को लेकर एक बार फिर बहस को तेज कर सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए केवल नामांकन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षकों की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों और प्रबंधन व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नीति बनाने वाले लोग खुद सरकारी संस्थानों की वास्तविक स्थिति से जुड़े रहेंगे तो सुधार के लिए प्रभावी फैसले लेने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए लंबे समय तक योजनाबद्ध प्रयास जरूरी हैं।

अभिजीत दीपके के बयान पर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है। उनके समर्थक इसे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल एक राजनीतिक बयान के रूप में देख रहे हैं।

फिलहाल CJP सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अपने अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। संगठन का कहना है कि वह शिक्षा व्यवस्था से जुड़े जमीनी मुद्दों को सामने लाता रहेगा और सरकार से सुधार के लिए कदम उठाने की मांग करता रहेगा।

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