- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- सुप्रीम कोर्ट पर CJP...
सुप्रीम कोर्ट पर CJP ने उठाए सवाल, सौरभ दास ने वोटिंग अधिकारों को लेकर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रवक्ता और सह-संयोजक सौरभ दास ने रविवार को आरोप लगाया कि युवाओं के मतदान अधिकार प्रभावित होने के मामले में शीर्ष अदालत की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची का नाम लेते हुए तीखी टिप्पणी की। ये CJP और दास के आरोप हैं; सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन आरोपों को स्वीकार किए जाने जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।
सौरभ दास का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इस कारण CJP की टिप्पणी और अदालत में होने वाली सुनवाई दोनों पर राजनीतिक और कानूनी नजरें टिकी हुई हैं।
CJP पिछले कुछ समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। हालांकि चुनाव आयोग ऐसे आरोपों से इनकार करता रहा है और उसका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं।
सौरभ दास इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को लेकर सवाल उठा चुके हैं। सितंबर में उन्होंने SIR विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ शीर्ष अदालत की भी आलोचना की थी। अब एक बार फिर उन्होंने न्यायपालिका को लेकर बयान दिया है। ताजा टिप्पणी में उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची का नाम लिया है।
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले CJP ने सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत भी किया था। जुलाई में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों से जुड़े एक मामले में सौरभ दास ने कहा था कि शीर्ष अदालत युवाओं के हित में काम कर रही है, हालांकि उन्होंने अदालत की कुछ शर्तों पर असहमति भी जताई थी। इससे साफ है कि पार्टी और अदालत के बीच अलग-अलग मामलों में रुख बदलता रहा है।
मौजूदा विवाद का केंद्र चुनाव आयोग और मतदाता सूची का पुनरीक्षण है। CJP लगातार आरोप लगा रही है कि इस प्रक्रिया में युवाओं समेत बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। दो अक्टूबर को मुंबई समेत कई स्थानों पर CJP समर्थकों ने प्रदर्शन किया था।
CJP की तरफ से चुनाव आयोग के खिलाफ शुरू किया गया अभियान अब अदालत तक पहुंच चुके मामलों के कारण नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की मांग के साथ चुनाव आयोग के कामकाज पर उठाए गए सवालों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा। हालांकि याचिका में मांग किया जाना और अदालत द्वारा उसे स्वीकार करना अलग-अलग बातें हैं। अंतिम स्थिति न्यायिक आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ा है। विपक्षी दलों और CJP समेत विभिन्न समूहों ने मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के लिए सत्यापन की प्रक्रिया जरूरी है तथा नाम हटाने की कार्रवाई कानूनी आधार पर की जाती है।
इसी विवाद के बीच CJP ने देशव्यापी विरोध अभियान भी शुरू किया। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। मुंबई में हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जबकि दिल्ली में भी चुनाव आयोग के खिलाफ अलग-अलग संगठनों की ओर से प्रदर्शन किए गए।
सौरभ दास का ताजा बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने केवल चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि सीधे शीर्ष न्यायालय के न्यायाधीशों का नाम लेकर आरोप लगाए हैं। संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े ऐसे आरोपों में आरोप और स्थापित तथ्य के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। फिलहाल दास की टिप्पणियां CJP का राजनीतिक पक्ष हैं और इनसे संबंधित मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
CJP इसी साल एक युवा आंदोलन के रूप में चर्चा में आई थी। संगठन का नाम भी सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया था। बाद में मुख्य न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण भी दिया था। इसके बाद संगठन ने सोशल मीडिया और विरोध प्रदर्शनों के जरिए अपनी गतिविधियां बढ़ाईं।
अब सभी की नजर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर रहेगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अदालत जो भी आदेश देती है, उससे इस विवाद की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। वहीं CJP ने संकेत दिया है कि उसका राजनीतिक विरोध अदालत की कार्यवाही से अलग जारी रह सकता है।





